सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में ₹20 के नकली सिक्कों के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद पुलिस की जांच अब इसके कथित मास्टरमाइंड उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह और उसके पुराने संपर्कों तक पहुंच गई है। पुलिस के मुताबिक, लूथरा लंबे समय से नकली सिक्कों के कारोबार से जुड़ा रहा है और उसके खिलाफ पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। मौजूदा जांच में सहारनपुर में एक बड़े उत्पादन केंद्र की तैयारी, कई मशीनों और डाई की बरामदगी के साथ-साथ ऐसे लोगों की तलाश की जा रही है जो इन सिक्कों को बाजार तक पहुंचाते थे।
सहारनपुर पुलिस की कार्रवाई में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने 6,400 तैयार नकली ₹20 के सिक्के, करीब ₹5 लाख मूल्य के अधबने सिक्के और छह मशीनें बरामद की हैं। जांच के मुताबिक इस सेटअप में प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार सिक्के तैयार करने की क्षमता विकसित की गई थी।
पुलिस के हाथ लगे सात रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन अब इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ियों में हैं। इन्हीं के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली सिक्कों की सप्लाई कहां-कहां हुई, कौन लोग एजेंट के तौर पर जुड़े थे और इस नेटवर्क में पैसों का लेनदेन किस तरह होता था।
कौन है उपकार लूथरा, जिस पर पुलिस की नजर?
पुलिस के अनुसार उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह मूल रूप से मोहाली का रहने वाला बताया गया है। उसका नाम नकली सिक्कों के पुराने मामलों में पहले भी सामने आ चुका है। 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे हरियाणा के कुंडली से गिरफ्तार किया था और उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित होने की जानकारी सामने आई थी।
इससे पहले भी उसके खिलाफ नकली सिक्कों से जुड़े मामले दर्ज रहे हैं। दिल्ली की एक अदालत के 2024 के फैसले में मनोज उर्फ उपकार लूथरा के खिलाफ 2013 में ₹5 के नकली सिक्कों की बरामदगी का रिकॉर्ड दर्ज है। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक उस मामले में उसके कब्जे से 5,000 नकली सिक्के बरामद किए गए थे और जांच के दौरान नकली सिक्के बनाने से जुड़ी मशीन और डाई भी बरामद होने का उल्लेख है।
इस पुराने रिकॉर्ड से यह जरूर स्पष्ट होता है कि नकली सिक्कों के मामले में उपकार लूथरा का नाम वर्षों पहले भी सामने आ चुका था। हालांकि मौजूदा सहारनपुर मामले में उसकी भूमिका और नेटवर्क का पूरा दायरा पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
तिहाड़ में हुई मुलाकात, सहारनपुर तक पहुंची जांच की कड़ी
मौजूदा जांच में एक और नाम सामने आया है—हिमांशु उर्फ गुल्लू। पुलिस के मुताबिक उपकार लूथरा की मुलाकात उससे तिहाड़ जेल में हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बना और यही संपर्क आगे सहारनपुर में सामने आए नेटवर्क की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने किन लोगों से संपर्क किया और किस तरह अलग-अलग राज्यों में नकली सिक्कों की सप्लाई का नेटवर्क तैयार किया।
यहां यह समझना जरूरी है कि तिहाड़ में हुई मुलाकात को नेटवर्क की एक कड़ी बताया जा रहा है, न कि नकली सिक्कों के कारोबार की शुरुआत वहीं से हुई थी। उपकार लूथरा का इस तरह के मामलों में इससे काफी पुराना रिकॉर्ड मौजूद है।
नेपाल तक पहुंच चुका था नेटवर्क
उपकार लूथरा का नाम पहले भी नेपाल से जुड़े नकली सिक्कों के नेटवर्क की जांच में सामने आ चुका है। 2016-17 की रिपोर्टों के अनुसार वह नेपाल में रहकर नकली सिक्कों के कारोबार को आगे बढ़ा रहा था। दिल्ली पुलिस की जांच में उसके नेटवर्क के उत्तर भारत के कई राज्यों तक फैले होने की बात सामने आई थी।
2017 की रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि लूथरा नेपाल से नकली सिक्कों के नेटवर्क को संचालित कर रहा था और गिरोह पर कई करोड़ रुपये मूल्य के नकली सिक्के बाजार में खपाने का आरोप था।
मौजूदा सहारनपुर मामले में जांच एजेंसियां पुराने संपर्कों को नए नेटवर्क से जोड़कर देख रही हैं। नेपाल के बाद थाईलैंड तक संपर्क होने के दावे भी सामने आए हैं, लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय कड़ी की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों से नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल पुलिस जांच का हिस्सा मानकर ही देखा जाना चाहिए।
सहारनपुर में कैसा था नकली सिक्कों का सेटअप?
सहारनपुर में पुलिस ने जिस सेटअप का खुलासा किया है, वह किसी छोटे स्तर की अवैध गतिविधि जैसा नहीं दिखता। मौके से छह मशीनें, सिक्के तैयार करने वाली डाई और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, यहां प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार नकली ₹20 के सिक्के तैयार करने की क्षमता विकसित की गई थी। इसके अलावा बड़ी संख्या में अधबने सिक्के भी बरामद हुए हैं।
बरामदगी में तैयार सिक्कों के अलावा बिना मुहर और मुहर लगी डाई, पॉलिशिंग और फिनिशिंग से जुड़े उपकरण भी शामिल बताए गए हैं। इससे पुलिस को आशंका है कि सिक्कों को तैयार करने के बाद उन्हें बाजार में भेजने से पहले अंतिम रूप देने की पूरी व्यवस्था की गई थी।
सात रजिस्टर और आठ मोबाइल खोलेंगे नेटवर्क के राज
सहारनपुर पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि तैयार किए गए सिक्के आखिर किन लोगों तक पहुंचते थे।
पुलिस को मिले सात रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन इस सवाल का जवाब तलाशने में अहम हो सकते हैं। रजिस्टरों में दर्ज हिसाब-किताब और मोबाइल फोन में मौजूद संपर्कों की जांच से खरीदारों, एजेंटों और सप्लाई से जुड़े लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अब तक कितने सिक्के तैयार किए गए और सहारनपुर में पकड़े गए सेटअप से पहले इस नेटवर्क ने किन स्थानों से काम किया।
बाजार में कहां खपाए जाते थे नकली सिक्के?
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार गिरोह ऐसे स्थानों को निशाना बनाता था जहां रोजाना बड़ी संख्या में छोटे नकद लेनदेन होते हैं। रिपोर्टों में शराब की दुकानों, टोल प्लाजा, सब्जी मंडियों और छोटे कारोबारियों के जरिए नकली सिक्कों को बाजार में उतारे जाने की बात सामने आई है।
ऐसी जगहों पर बड़ी मात्रा में नकदी का लेनदेन होने के कारण छोटे मूल्य के सिक्कों की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से पुलिस अब केवल निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वितरण नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
पांच आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश
सहारनपुर पुलिस की कार्रवाई में गिरोह से जुड़े पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक नेटवर्क में करीब आठ लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है और बाकी संदिग्धों की तलाश जारी है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि किस व्यक्ति की जिम्मेदारी निर्माण, परिवहन, सप्लाई और बाजार में सिक्कों को खपाने की थी। पुलिस का मानना है कि काम अलग-अलग लोगों के बीच बांटे जाने से पूरे नेटवर्क का संचालन एक साथ सामने आने से बच सकता था।
20 रुपये के नकली सिक्कों का मामला क्यों अहम?
सहारनपुर में नकली सिक्कों का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब जिले में नकली मुद्रा से जुड़े दूसरे मामले की जांच भी चल रही है। पंजाब नेशनल बैंक की सहारनपुर करेंसी चेस्ट में करीब ₹17.29 करोड़ की कथित नकली करेंसी मिलने के मामले में NIA जांच कर रही है।
हालांकि दोनों मामलों को एक-दूसरे से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर नकली सिक्कों का मामला अलग जांच के तहत चल रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इसका नेटवर्क कितना बड़ा है और कितने समय से सक्रिय था।
पुराना नेटवर्क, नया ठिकाना?
उपकार लूथरा के पुराने मामलों को देखें तो नकली सिक्कों से उसका जुड़ाव करीब दो दशक से अधिक पुराना दिखाई देता है। 2013 के मामले में अदालत के रिकॉर्ड में ₹5 के नकली सिक्कों की बरामदगी और मशीनरी का उल्लेख है। 2017 में भी दिल्ली पुलिस ने उसे नकली सिक्कों के एक पुराने नेटवर्क से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था।
अब 2026 में सहारनपुर में ₹20 के नकली सिक्कों की बड़ी खेप और उत्पादन क्षमता सामने आने के बाद जांच एजेंसियों के सामने सवाल है कि क्या यह पुराने नेटवर्क का नया चरण है या अलग-अलग पुराने संपर्कों को जोड़कर नया नेटवर्क तैयार किया गया।
इसका जवाब सात रजिस्टरों, आठ मोबाइल फोन, बरामद मशीनों और आरोपियों से पूछताछ के बाद ही साफ होगा।
एक नजर में
- मामला: ₹20 के नकली सिक्कों का नेटवर्क
- स्थान: सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
- गिरफ्तारी: पांच आरोपी
- बरामद तैयार सिक्के: 6,400
- अधबने सिक्के: करीब ₹5 लाख मूल्य के
- मशीनें: छह
- रजिस्टर: सात
- मोबाइल फोन: आठ
- कथित उत्पादन क्षमता: 10-12 हजार सिक्के प्रतिदिन
- मुख्य नाम: उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह
- जांच: सप्लायर, एजेंट, खरीदार और आर्थिक लेनदेन की पड़ताल जारी
source use – तिहाड़ जेल से शुरू हुआ चिल्लर किंग का खेल, 10वीं फेल लूथरा ने कैसे नेपाल-थाईलैंड तक खड़ा किया नेटवर्क?
आगे की जांच में खुलेंगे कई सवाल
सहारनपुर में पकड़ा गया सेटअप पुलिस के लिए सिर्फ नकली सिक्कों की बरामदगी का मामला नहीं है। अब जांच का असली फोकस उस सप्लाई चेन पर है, जिसके जरिए सिक्के निर्माण केंद्र से निकलकर बाजार तक पहुंचते थे।
किसने मशीनें और डाई उपलब्ध कराईं? सहारनपुर में इस सेटअप को तैयार करने में स्थानीय स्तर पर किसने मदद की? अब तक कितने सिक्के बाजार में पहुंच चुके हैं? किन राज्यों में इनकी सप्लाई हुई? और उपकार लूथरा के पुराने संपर्क इस नए नेटवर्क में किस भूमिका में थे?
इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच और बरामद डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच से सामने आएंगे।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सहारनपुर में सामने आया मामला छोटे स्तर पर नकली सिक्के चलाने तक सीमित नहीं दिखता। बरामद मशीनरी, बड़ी संख्या में सिक्के और हिसाब-किताब के दस्तावेज पुलिस को एक बड़े नेटवर्क की संभावित कड़ियों की जांच का आधार दे रहे हैं। हालांकि नेटवर्क के कुल आकार और ₹70 करोड़ से अधिक के सिक्के बाजार में खपाने जैसे दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही मानी जानी चाहिए।
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