संभल: दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों के मांसाहारी भोजन को लेकर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के कथित बयान पर अब संभल के कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर सीधे तौर पर सहमति या असहमति जताने के बजाय आचार्य प्रमोद कृष्णम ने हिंदुओं के बच्चों की परवरिश और ताकत को लेकर एक सवाल खड़ा किया। उनके बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज होने की संभावना है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम से जब धीरेंद्र शास्त्री के उस कथित बयान को लेकर सवाल किया गया, जिसमें दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों से मांसाहारी भोजन से परहेज करने की बात कही गई थी, तो उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को एक सिद्ध और ख्याति प्राप्त संत बताया। उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम एक पूजनीय स्थान है और धीरेंद्र शास्त्री ने जो कहा है, वह उनका अनुभव और उनका विचार है।
संभल : धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर सीधे जवाब से बचे प्रमोद कृष्णम
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने धीरेंद्र शास्त्री के कथित मांसाहार संबंधी बयान पर सीधे हां या ना में जवाब देने के बजाय चर्चा को हिंदुओं की ताकत और बच्चों की परवरिश की ओर मोड़ दिया। उन्होंने कहा कि देश के हिंदुओं और सनातन प्रेमियों को यह तय करना होगा कि वे अपने बच्चों को किस तरह की परवरिश देना चाहते हैं।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदू अपने बच्चों को बैल या गाय बनाना चाहते हैं या शेर बनाना चाहते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने आगे कहा कि यदि बच्चे बैल बनेंगे तो किसी कसाई के हाथों काटे जाएंगे, जबकि शेर बनेंगे तो दहाड़ेंगे।
उनके इस बयान के बाद अब इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
‘बैल बनेंगे तो कसाई के हाथों काटे जाएंगे’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने बयान में बैल और शेर का उदाहरण देते हुए हिंदू समाज के बच्चों की परवरिश को ताकत के सवाल से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यदि हिंदुओं के बच्चे बैल बनेंगे तो किसी कसाई के हाथों काटे जाएंगे और अगर शेर बनेंगे तो दहाड़ेंगे।
इसके बाद उन्होंने कहा कि शेर बनेंगे तो दहाड़कर ‘वंदे मातरम’ गाएंगे। उनके बयान का यह हिस्सा अब चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। हालांकि, उनके बयान का संदर्भ बच्चों की शारीरिक क्षमता के बजाय व्यापक सामाजिक और वैचारिक संदेश से जुड़ा दिखाई देता है।
मांसाहार की बहस से बच्चों की परवरिश तक पहुंचा मुद्दा
धीरेंद्र शास्त्री के कथित बयान को लेकर पूछे गए सवाल का केंद्र दुर्गा पूजा और बंगाली समाज के मांसाहारी भोजन से जुड़ा था। बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में भोजन को लेकर अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं रही हैं। ऐसे में इस तरह के बयान धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक बहस का विषय भी बन सकते हैं।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस सवाल का जवाब देते हुए सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि मांसाहारी भोजन करना चाहिए या नहीं। इसके बजाय उन्होंने हिंदू समाज के सामने बच्चों की परवरिश और उनके व्यक्तित्व को लेकर सवाल रखा।
यही वजह है कि उनका बयान मूल मांसाहार विवाद से आगे बढ़कर हिंदू समाज, बच्चों की परवरिश और ताकत को लेकर चर्चा में आ गया है।
‘शेर बनेंगे तो दहाड़कर वंदे मातरम गाएंगे’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने बयान के अंत में कहा कि अगर हिंदुओं के बच्चे शेर बनेंगे तो वे दहाड़कर वंदे मातरम गाएंगे। उनके इस कथन को हिंदू समाज को मजबूत और जागरूक बनाने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, बयान में इस्तेमाल किए गए ‘बैल’ और ‘शेर’ के उदाहरण को लेकर अलग-अलग अर्थ निकाले जा सकते हैं। ऐसे में पूरे बयान को उसके संदर्भ के साथ देखना महत्वपूर्ण है।
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बयान के बाद बढ़ सकती है राजनीतिक और धार्मिक बहस
आचार्य प्रमोद कृष्णम के इस बयान के बाद अब धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है। एक ओर धीरेंद्र शास्त्री के कथित बयान को लेकर पहले से चर्चा चल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रमोद कृष्णम ने इसे हिंदू समाज के बच्चों की परवरिश और ताकत से जोड़ दिया है।
फिलहाल इस बयान पर अलग-अलग राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। यह भी देखना होगा कि धीरेंद्र शास्त्री या उनके समर्थक इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं।
FAQs
1. आचार्य प्रमोद कृष्णम ने किस मुद्दे पर बयान दिया?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों के मांसाहारी भोजन को लेकर धीरेंद्र शास्त्री के कथित बयान पर प्रतिक्रिया दी।
2. आचार्य प्रमोद कृष्णम ने धीरेंद्र शास्त्री के बारे में क्या कहा?
उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को सिद्ध और ख्याति प्राप्त संत बताया। साथ ही कहा कि उनका बयान उनके अनुभव और विचार पर आधारित है।
3. आचार्य प्रमोद कृष्णम ने हिंदुओं से क्या सवाल किया?
उन्होंने हिंदुओं से सवाल किया कि वे अपने बच्चों को बैल या शेर बनाना चाहते हैं। उनका बयान बच्चों की परवरिश और समाज की ताकत से जुड़ा था।
4. ‘बैल बनेंगे तो कसाई के हाथों काटे जाएंगे’ बयान का क्या मतलब है?
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बैल और शेर का उदाहरण देते हुए हिंदू समाज को मजबूत और जागरूक बनने का संदेश देने की बात कही।
5. आचार्य प्रमोद कृष्णम के बयान के बाद क्या हुआ?
उनके बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में बहस की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, इस पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

