Bangladesh Violence : पड़ोसी देश बांग्लादेश इन दिनों गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा है। अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश में हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद शांति की उम्मीद थी, लेकिन इसके उलट अब हिंसा, हत्या और भीड़ के हमले आम होते जा रहे हैं।

बीते कुछ दिनों में दो दर्दनाक घटनाओं ने पूरे बांग्लादेश को हिला कर दिया है। पहली घटना 18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले के भालुका इलाके में हुई, जहां मजदूर दीपू चंद्र दास की भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर जान ले ली। दूसरी घटना 19 दिसंबर को लक्ष्मीपुर से सामने आई, जहां BNP नेता बेलाल हुसैन के घर में आग लगा दी गई। इस आगजनी में उनकी 7 साल की मासूम बेटी आइशा की मौत हो गई। इन घटनाओं ने देश में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विरोध प्रदर्शन: छात्र संगठन का सख्त विरोध
इन बढ़ती घटनाओं के विरोध में ढाका यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन JCD ने रविवार को देशभर में विरोध मार्च निकाला। यह प्रदर्शन ढाका यूनिवर्सिटी के टीचर-स्टूडेंट सेंटर से शुरू हुआ। छात्रों की भीड़ ने हिंसा और हत्याओं के खिलाफ आवाज उठाई और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग भी की।
JCD के नेताओं का कहना है कि कुछ ताकतें धर्म का सहारा लेकर लोगों को उकसा रहीं हैं। साथ आरोप लगाया कि यह गतिविधियां बांग्लादेश की संप्रभुता और सामाजिक सौहार्द के लिए बड़ा खतरा बन चुकी हैं। JCD प्रमुख राकिब ने कहा कि 5 अगस्त के बाद एक खास समूह सोशल मीडिया पर ‘बॉट आर्मी’ के जरिए झूठी खबरें और नफरत फैलाकर हिंसा को बढ़ावा दे रहा है।
राकिब ने साफ चेतावनी दी कि JDC ऐसे तत्वों का कड़ा विरोध करेगी, जो विदेश से ऑनलाइन प्रचार के जरिए देश में अराजकता फैलाने का काम कर रहे हैं। हालांकि छात्र संगठनों का कहना है कि मॉब कल्चर के नाम पर हो रही हिंसा के खिलाफ खड़ा होना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।

राजनीतिक तनाव और हादी की हत्या
इतना ही नहीं छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या ने भी राजनीतिक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। 32 साल के हादी शेख हसीना विरोधी आंदोलन के दौरान एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभर रहे थे। वे शेख हसीना विरोधी मंच ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता थे और अगले साल होने वाले आम चुनाव में ढाका से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में प्रचार कर रहे थे।
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हादी की हत्या के बाद उनके सहयोगी अब्दुल्ल अल जबेर ने यूनुस सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार सार्वजनिक रूप से बताए कि हत्या के पीछे कौन जिम्मेदार है और अब तक दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
आम चुनाव की ओर बढ़ते कदम और बढ़ती चुनौतियां
दरअसल बांग्लादेश में फरवरी में आम चुनाव होने हैं, लेकिन मौजूदा हालात चुनाव के लिए अनुकूल नहीं दिखाई दे रहे। शेख हसीना की पार्टी पहले ही सत्ता से बाहर है और विपक्षी नेता खालिदा जिया गंभीर रूप से बीमार हैं। साथ ही यूनुस सरकार कमजोर नजर आ रही है। ऐसे में राजनीतिक शून्य और बढ़ती हिंसा के कारण यह आशंका बढ़ गई है कि असामाजिक और उपद्रवी ताकतें हालात का फायदा उठा सकती हैं।
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कुल मिलाकर कहा ये जा सकता है कि बांग्लादेश इस समय एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है, जहां शांति, न्याय और लोकतंत्र को बचाने के लिए सरकार और समाज दोनों को सख्त और ईमानदार कदम उठाने की जरूरत है।

