Bharat Taxi : 1 जनवरी नई दिल्ली, नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही कैब बुकिंग के बाजार में बड़ा बदलाव आने वाला है। केंद्र सरकार की सहकारी सेवा ‘Bharat Taxi’ जनवरी से दिल्ली और गुजरात में शुरू हो रही है। यह सेवा ओला, उबर और रैपिडो जैसी निजी कंपनियों को सीधी चुनौती देगी। खास बात यह है कि यह सहकारी मॉडल पर चलती है, जहां ड्राइवर खुद मालिक होते हैं और यात्रियों को सस्ती सवारी मिलती है।
कब और कहां शुरू होगी सेवा?
भारत टैक्सी का ट्रायल पहले ही दिल्ली और गुजरात के राजकोट में डेढ़ महीने पहले शुरू हो चुका था, जो काफी सफल रहा। अब जनवरी 2026 से यह आधिकारिक तौर पर दिल्ली और गुजरात में लॉन्च होगी। इसके छह महीने बाद मुंबई और पुणे में सेवा शुरू होगी। बाद में इसे अन्य शहरों में भी फैलाया जाएगा। यह ऐप आधारित सेवा है, ठीक ओला-उबर की तरह, लेकिन इसमें कई बड़े फायदे हैं।
https://hnn24x7.com/delhi-crime-branch-3/
ओला-उबर से कितनी सस्ती?
ट्रायल में भारत टैक्सी पीक ऑवर (सुबह 9 बजे, शाम 7 बजे या रात 10 बजे) में निजी कैब्स से 25-30% सस्ती साबित हुई है। जानकारी के मुताबिक पीक टाइम पर किराए में 100 रुपये से ज्यादा का फर्क मिला।
गोविंदपुरी मेट्रो से नई दिल्ली स्टेशन तक:
भारत टैक्सी: 280 रुपये
ओला: 320 रुपये
उबर: 340 रुपये
रैपिडो: 310 रुपये
आईएनएस से दिल्ली एयरपोर्ट तक:
भारत टैक्सी: 411 रुपये
ओला: 522 रुपये
उबर: 491 रुपये
रैपिडो: 427 रुपये
नॉर्मल टाइम में फर्क कम हो जाता है, सिर्फ 5-20 रुपये का। दिल्ली में अभी 2.75 लाख ग्राहक और 1.50 लाख ड्राइवर ऐप से जुड़ चुके हैं।
सहकारी मॉडल के बड़े फायदे
भारत टैक्सी को सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड चलाती है। इसके चेयरमैन अमूल के प्रबंध निदेशक जयंत मेहता हैं। टेक्निकल पार्टनर कर्नाटक की सफल नम्मा टैक्सी वाली कंपनी है।
जीरो कमीशन: ओला-उबर 20-30% कमीशन काटते हैं, लेकिन यहां ड्राइवर को कमाई का पूरा हिस्सा मिलता है। सिर्फ रोजाना 30 रुपये फीस लगती है।
मालिकाना हक: हर ड्राइवर कंपनी का शेयरहोल्डर होता है। एक से पांच शेयर ले सकते हैं और लाभ में हिस्सा मिलता है।
सुरक्षा: ऐप दिल्ली पुलिस से सीधे जुड़ा है, मुश्किल में तुरंत मदद मिलती है। ड्राइवरों का कहना है कि बुकिंग आसान है और कमाई ज्यादा होगी।
https://youtube.com/shorts/GCHqEjo17U0?si=DOyj8O8tkSWi-ZKy
चुनौतियां और आशंकाएं
पूरे देश में लाखों ड्राइवरों को जोड़ना और स्थानीय नियमों का पालन करना मुश्किल।
फंडिंग: 80 करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन अभी सिर्फ 16 करोड़ जुटे हैं। पीछे 8 बड़ी सहकारी संस्थाएं हैं, जैसे अमूल, इफको।
बड़ा बाजार और भविष्य
भारत की कैब बाजार 5 लाख करोड़ रुपये का है। सहकारी मॉडल से ड्राइवरों को निजी ऐप्स के ‘मकड़जाल’ से आजादी मिलेगी। बोर्ड मेंबर किशन पाटनी कहते हैं, यह नया ‘अमूल’ बनाने जैसा प्रयोग है। लक्ष्य है कि गिग इकोनॉमी में सहकारिता की 50% हिस्सेदारी हो। भारत टैक्सी यात्रियों के लिए सस्ती और ड्राइवरों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। अगर यह सफल हुई, तो कैब बाजार में बड़ा बदलाव आएगा।

