बिजनौर में गुलदार का आतंक: जिले में बिजनौर में गुलदार का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नजीबाबाद वन क्षेत्र के आलोपुर इलाके में गुलदार ने एक युवती को अपना शिकार बना लिया। बताया जा रहा है कि गुलदार ने पशुशाला में युवती पर हमला किया और उसे खींचकर ईंख के खेत में ले गया। घटना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।
पशुशाला में गुलदार ने किया हमला
जानकारी के अनुसार, युवती पशुशाला में मौजूद थी, तभी गुलदार ने उस पर हमला कर दिया। हमले के बाद गुलदार युवती को खींचकर पास के ईंख के खेत में ले गया। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।
बिजनौर में गुलदार का आतंक अब ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। गन्ने के खेतों और आबादी के आसपास गुलदार की मौजूदगी के कारण लोगों को अपने रोजमर्रा के काम करने में भी डर लग रहा है।
गुलदार के हमलों से ग्रामीणों में दहशत
ग्रामीण लोगों के अनुसार इस क्षेत्र में लगातार चीता हमले हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार आज तक चीते के हमलों में लगभग तीन दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। फिर भी यह महत्वपूर्ण है की इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग से की जाए।
लगातार हमलों ने गाँववालों को चिंतित कर दिया है। गाँववालों के अनुसार अब उन्हें रात में गाँव के आस-पास जाना खतरनाक लग रहा है।
चारा लाने के लिए खेतों में जाने से डर रहे किसान
बिजनौर में गुलदार का आतंक किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर रहा है। पशुओं के लिए हरा चारा लाने के लिए किसानों को खेतों में जाना पड़ता है, लेकिन गन्ने के खेतों में गुलदार के छिपे होने की आशंका के कारण लोग अकेले खेतों में जाने से बच रहे हैं।
किसानों का कहना है कि खेती और पशुपालन से जुड़े जरूरी काम रोकना संभव नहीं है। ऐसे में वन विभाग से मांग की जा रही है कि संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
वन विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
क्योंकि जैकाल लगातार उनपर हमला कर रहे हैं इसलिए लोग वन विभाग के खिलाफ बराबर गुस्से में हैं। लोगों के अनुसार भले ही जैकालों की आबादी बढ़ रही है और उनकी गतिविधियाँ जारी हैं लेकिन इसी के लिए कोई समाधान नहीं दिया गया है। गाँववालों ने मांग की है कि वन विभाग की टीम के सदस्य बड़ी संख्या में जैकालों वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी करें। ऐसी जगहों पर कैमरे और अन्य निगरानी मशीनें होनी चाहिए ताकि उनकी गतिविधियों की निगरानी की जा सके।
बढ़ती गुलदार आबादी बनी चुनौती
बिजनौर का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र और गन्ने की खेती से जुड़ा है। जंगल, खेत और आबादी के बीच नजदीकी होने के कारण वन्यजीव कई बार इंसानी बस्तियों तक पहुंच जाते हैं। गन्ने के खेत गुलदारों को छिपने के लिए अनुकूल जगह उपलब्ध कराते हैं।
बिजनौर में गुलदार का आतंक केवल एक गांव तक सीमित रहने के बजाय आसपास के इलाकों के ग्रामीणों के लिए भी चिंता का कारण बन रहा है। लोगों को डर है कि खेतों में काम करने या पशुओं के लिए चारा लेने के दौरान उनका सामना गुलदार से हो सकता है।
ग्रामीणों ने की सुरक्षा बढ़ाने की मांग
पिछले दिनों अलोपुर क्षेत्र में हुए हमले के बाद स्थानीय किसान प्रशासन और वन विभाग से ठोस कदमों की मांग कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पैट्रोलिंग गतिविधियों को बढ़ाना होगा और लोगों को उन विशेष क्षेत्रों में तेंदुओं की मौजूदगी के बारे में चेतावनी दी जानी चाहिए।
किसानों की मुख्य समस्या यह है कि उन्हें अपने पशुधन की देखभाल करने और खेतों को उगाने के लिए खेतों का दौरा करना पड़ता है। इसलिए वे ऐसी सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जो उन्हें खेतों में सुरक्षा प्रदान करे और उनके जानवरों के लिए आश्रय प्रदान करे।
निष्कर्ष
आलोपुर में हुई घटना ने एक बार फिर बिजनौर में गुलदार का आतंक और मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को सामने ला दिया है। अब ग्रामीणों की नजर वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर है। लोगों को उम्मीद है कि गुलदारों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी के साथ ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
Read More..
FAQs: बिजनौर में गुलदार का हमला
1. बिजनौर में गुलदार ने किस पर हमला किया?
नजीबाबाद वन क्षेत्र के आलोपुर इलाके में एक युवती पर गुलदार के हमले की बात सामने आई है। बताया गया कि हमला पशुशाला में हुआ।
2. गुलदार युवती को कहां ले गया?
जानकारी के अनुसार, हमला करने के बाद गुलदार युवती को खींचकर ईंख के खेत में ले गया।
3. घटना किस इलाके की है?
यह मामला बिजनौर जिले के नजीबाबाद वन क्षेत्र के आलोपुर इलाके का बताया जा रहा है।
4. गुलदार के आतंक से ग्रामीण क्यों परेशान हैं?
गुलदार की लगातार गतिविधियों और हमलों की खबरों के कारण ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर डर है। किसानों को खेतों में जाने और पशुओं के लिए चारा लाने में भी परेशानी हो रही है।
5. क्या गुलदार के हमलों में कई लोगों की मौत हुई है?
स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि गुलदार के हमलों में करीब तीन दर्जन लोगों की जान जा चुकी है। इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग से की जानी चाहिए।

