BJP and SP go all out for 11 MLC seats in Uttar Pradesh; political activity intensifies ahead of the election.

Uttar Pradesh-11 एमएलसी सीटों पर भाजपा और सपा ने झोंकी ताकत, चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की इन सीटों पर जीत हासिल करना दोनों दलों के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में लगातार जनसभाएं कर रहे हैं, वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठकों के जरिए चुनावी रणनीति को धार देने में जुटे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार की कमान संभालते हुए सोमवार को गोरखपुर, मंगलवार को बरेली और बुधवार को वाराणसी में जनसभाएं कीं। इसके बाद मिर्जापुर में भी भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में सभा की। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने भी अपने नेताओं और पदाधिकारियों को अलग-अलग जिलों में सक्रिय कर दिया है। सपा की ओर से अंतिम समय में दो प्रत्याशियों को बदले जाने को भी इस चुनाव की गंभीरता से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक नजरिए से यह चुनाव भले ही केवल 11 सीटों तक सीमित हो, लेकिन इसके नतीजों का असर दोनों दलों के चुनावी दावों और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ सकता है।

लोकसभा चुनाव के बाद मनोवैज्ञानिक बढ़त की लड़ाई

लोकसभा चुनाव में मिले नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी का उत्साह बढ़ा है। पार्टी इस राजनीतिक माहौल को 2027 के विधानसभा चुनाव तक बनाए रखना चाहती है। वहीं, भाजपा की कोशिश विधान परिषद चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर विपक्ष की मनोवैज्ञानिक बढ़त को कम करने की है।

पिछले चुनाव में भाजपा ने 11 में से छह सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार पार्टी की नजर अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने पर है। सपा भी इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के जरिए प्रदेश की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। ऐसे में दोनों दलों के लिए यह चुनाव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन और जनसमर्थन को परखने का अवसर बन गया है।

बैलेट पेपर से मतदान, राजनीतिक बहस भी अहम

इन चुनावों की एक खास बात यह है कि मतदान ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराया जाता है। इसे लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का पहलू भी चर्चा में है। विपक्षी दल पहले ईवीएम की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में बैलेट पेपर से होने वाले चुनाव के नतीजों को लेकर दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक तर्क रख सकते हैं।

हालांकि, इस चुनाव के परिणामों से ईवीएम की विश्वसनीयता पर सीधे तौर पर कोई निर्णायक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि मतदान की प्रक्रिया, मतदाता वर्ग और चुनावी परिस्थितियां अलग हैं।

शिक्षक और स्नातक मतदाताओं पर दोनों दलों की नजर

एमएलसी चुनाव की दूसरी महत्वपूर्ण विशेषता इसका मतदाता वर्ग है। इन सीटों पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। दोनों दलों के लिए इन मतदाताओं का समर्थन हासिल करना अहम है, क्योंकि इससे शिक्षा, रोजगार और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर उनकी राजनीतिक पकड़ का संकेत मिल सकता है।

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय संपर्क, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं से संवाद भी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दोनों दल केवल बड़े नेताओं की सभाओं पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि जिले स्तर पर भी चुनावी गतिविधियां तेज की जा रही हैं।

11 सीटों का दायरा, प्रदेश के कई जिलों तक पहुंच

तीसरा महत्वपूर्ण पहलू इन निर्वाचन क्षेत्रों का भौगोलिक विस्तार है। शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 सीटें प्रदेश के पश्चिमी, मध्य, पूर्वी और बुंदेलखंड क्षेत्रों के अनेक जिलों को कवर करती हैं। इसी वजह से इन चुनावों को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक समर्थन का आकलन करने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

हालांकि, इन सीटों के नतीजों को पूरे प्रदेश के मतदाताओं की पसंद का सटीक सर्वेक्षण नहीं माना जा सकता। इन चुनावों में केवल संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत शिक्षक और स्नातक मतदाता ही मतदान करते हैं, इसलिए इनके नतीजे विधानसभा चुनाव की संभावनाओं का निर्णायक संकेत नहीं होंगे।

इन 11 सीटों पर होगा चुनाव

विधान परिषद की 11 सीटों में पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पांच सीटें:

  • लखनऊ खंड स्नातक
  • वाराणसी खंड स्नातक
  • आगरा खंड स्नातक
  • मेरठ खंड स्नातक
  • इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की छह सीटें:

  • लखनऊ खंड शिक्षक
  • वाराणसी खंड शिक्षक
  • आगरा खंड शिक्षक
  • मेरठ खंड शिक्षक
  • बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक
  • गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शामिल जिले

लखनऊ खंड स्नातक: लखनऊ, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर।

वाराणसी खंड स्नातक: वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया।

आगरा खंड स्नातक: आगरा, अलीगढ़, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, हाथरस, कासगंज, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज और औरैया।

मेरठ खंड स्नातक: मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली।

इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक: प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, झांसी, जालौन और ललितपुर।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शामिल जिले

लखनऊ खंड शिक्षक: लखनऊ, हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर।

वाराणसी खंड शिक्षक: वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया।

आगरा खंड शिक्षक: आगरा, अलीगढ़, एटा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, हाथरस, कासगंज, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज और औरैया।

मेरठ खंड शिक्षक: मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली।

बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक: बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, रामपुर और संभल।

गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक: गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, आजमगढ़, मऊ, अमेठी और सुल्तानपुर के कुछ क्षेत्र।

नतीजों पर रहेंगी राजनीतिक दलों की निगाहें

एमएलसी चुनाव में भाजपा और सपा की सक्रियता से साफ है कि दोनों दल इसे केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित मुकाबला नहीं मान रहे। भाजपा अपनी पिछली सफलता को आगे बढ़ाना चाहेगी, जबकि सपा लोकसभा चुनाव के बाद बने राजनीतिक माहौल को कायम रखने की कोशिश करेगी।

अंततः नतीजे उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, मतदाता संपर्क, संगठनात्मक तैयारी और निर्वाचन क्षेत्र के समीकरणों पर निर्भर करेंगे। इन चुनावों से दोनों दलों को अपने संगठन की सक्रियता का आकलन करने का अवसर जरूर मिलेगा, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव का राजनीतिक परिदृश्य इससे पूरी तरह तय नहीं होगा।

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