Five days of judicial custody given to CJP leaders Sourav Das and Ashutosh Ranka after being arrested during the Jantar Mantar protest.

CJP नेताओं ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली दिल्ली हाईकोर्ट की याचिका वापस ली

नई दिल्ली: (21 अक्टूबर) कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रंका ने बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी वह याचिका वापस ले ली, जिसमें उन्होंने एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने को चुनौती दी थी।

जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने CJP के सह-संयोजकों के वकील से कहा कि वे SEM के सामने आज होने वाली सुनवाई के नतीजे का इंतजार करें, और अगर उनकी शिकायत बनी रहती है, तो वे अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

दास और रंका को अपना मामला वापस लेने की अनुमति देते हुए, जज ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

सुनवाई के दौरान, अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करना सही उपाय नहीं है।

अदालत ने इस मामले पर तब सुनवाई की, जब CJP नेताओं ने हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की। बता दें कि दशहरा की छुट्टियों के कारण अभी हाई कोर्ट बंद है।

दास और रंका ने हाई कोर्ट में SEM के 19 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

उन्हें 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि वे जंतर-मंतर में घुसने के लिए एक बंद गेट के ऊपर से चढ़ गए थे। जंतर-मंतर को पहले ही विरोध-प्रदर्शन की निर्धारित जगह के रूप में हटा दिया गया था। उस समय उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

सोमवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में तैनात एक नए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किए जाने के बाद, उन्होंने 21 अक्टूबर तक उनकी न्यायिक हिरासत का आदेश दिया था।

13 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने से पहले, दास और रंका ने CJP के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया था और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए थे। इसके बाद उन्हें एहतियातन गिरफ्तार कर लिया गया था।

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