Delhi Crime Branch: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बहुत बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े हथियार तस्करी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनके पास से 10 महंगी विदेशी पिस्तौलें और 92 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। बता दे कि ये हथियार तुर्की और चीन में बनते थे, पाकिस्तान के रास्ते भारत लाए जाते थे और फिर दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों के गैंगस्टरों तक पहुंचाए जाते थे।

रोहिणी में बिछाया गया जाल
क्राइम ब्रांच को खुफिया सूचना मिली थी कि कुछ लोग रोहिणी में हथियारों की बड़ी खेप डिलीवर करने वाले हैं। पुलिस ने सेक्टर-28 के पास घेराबंदी कर दी। तभी एक सफेद स्विफ्ट डिज़ायर कार आई। पुलिस ने कार रोकी और तलाशी ली तो स्पीकर बॉक्स के अंदर छिपे डफ़ल बैग में 8 हाई-क्वालिटी विदेशी पिस्तौलें और 84 कारतूस मिले। कार में सवार दोनों आरोपी मंदीप सिंह और दलविंदर कुमार को मौके से ही धर दबोचा गया। पूछताछ में दोनों ने कबूल किया कि वे विदेशी हैंडलर के लिए काम करते हैं और पूरे देश में गैंगस्टरों को हथियार सप्लाई करते हैं।

दो और बड़े बिचौलिए गिरफ्तार
मंदीप और दलविंदर की निशानदेही पर पुलिस ने गिरोह के दो मुख्य सरगनाओं रोहन तोमर और अजय उर्फ मोनू को भी पकड़ लिया। इनके पास से 2 और विदेशी पिस्तौलें व 8 कारतूस बरामद हुए। अब तक कुल 10 पिस्तौल और 92 कारतूस जब्त हो चुके हैं।

ISI का जुड़ा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार ये पूरा नेटवर्क पाकिस्तान की ISI से जुड़ा हुआ था। हथियार पहले तुर्की-चीन से पाकिस्तान भेजे जाते थे। वहा से पंजाब बॉर्डर के रास्ते भारत में तस्करी की जाती थी। फिर दिल्ली पहुचकर ये हथियार हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बड़े-बड़े गैंगस्टरों तक पहुचाए जाते थे।
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एक पिस्तौल की कीमत 10-15 लाख तक
छापेमारी के दौरान जप्त किए हथियार कोई साधारण देसी कट्टे नहीं थे। ये हाई-एंड सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौलें थीं, जिनकी ब्लैक मार्केट में कीमत 10 से 15 लाख रुपये तक होती है।
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ज्वाइंट सीपी क्राइम ब्रांच सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इस कामयाबी से दिल्ली-NCR में अपराधियों की कमर टूटेगी। आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारिया होंगी और पूरा नेटवर्क खत्म कर दिया जाएगा। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से एक बार फिर साबित हो गया कि राजधानी में अपराध और आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम हो रहा है।

