Digital Arrest : देश में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही ऑनलाइन ठगी तेजी से बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इन मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जा सकती है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की बेंच ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे मामलों में दर्ज FIR की जानकारी मांगी है। कोर्ट का कहना है कि ये अपराध पूरे देश में फैले हुए हैं और विदेशी नेटवर्क से जुड़े हैं। इससे जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा डगमगा रहा है। सुप्रीम कोर्ट अब CBI की जांच पर नजर रखेगा।
Drug factory : पालघर में ड्रग फैक्ट्री का पर्दाफाश, करोड़ों की एमडी जब्त

डिजिटल अरेस्ट क्या है? कैसे हो रही ठगी?
डिजिटल अरेस्ट एक चालाकी भरा साइबर घोटाला है। ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या कोर्ट के अधिकारी बताते हैं। वे वीडियो कॉल या मैसेज से कहते हैं कि आप मनी लॉन्ड्रिंग या साइबर क्राइम के आरोपी हैं। फिर फर्जी कोर्ट ऑर्डर, अरेस्ट वारंट दिखाकर ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का डराते हैं। पीड़ित को घर में बंद रहने को कहते हैं और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं। 2024 में ऐसे 92,000 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जिनमें 2,140 करोड़ रुपये की ठगी हुई। ठग अक्सर म्यांमार और थाईलैंड जैसे देशों से ऑपरेट करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2024 को खुद इस मुद्दे पर सुना। हरियाणा के अंबाला में एक बुजुर्ग दंपति को 1.05 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। ठगों ने फर्जी सुप्रीम कोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट और ED के ऑर्डर दिखाए। कोर्ट ने कहा, ‘ये अपराध न्याय व्यवस्था की जड़ हिला देते हैं।’ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि ये घोटाले विदेशी ठिकानों से चलते हैं। कोर्ट ने केंद्र, CBI और हरियाणा पुलिस को नोटिस जारी किए। अब 3 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।
CBI को क्यों सौंपी जा सकती है जांच?
कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया कि वह इन मामलों की जांच के लिए एक मजबूत प्लान बनाए। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राज्य पुलिस के लिए ये केस ट्रेस करना मुश्किल है, क्योंकि नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय है। कोर्ट ने पूछा कि क्या CBI को ज्यादा संसाधन या साइबर विशेषज्ञ चाहिए? कोर्ट बोला, ‘हम जांच की प्रगति पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर और निर्देश देंगे।’ इससे सभी राज्यों में एकसमान जांच होगी। 2022 से 2024 तक ऐसे घोटालों की संख्या तीन गुना बढ़ी, और ठगी की रकम 21 गुना हो गई।
ये ठगियां आम लोगों को बर्बाद कर रही हैं। एक 82 साल के उद्योगपति को 7 करोड़ गंवाने पड़े। एक प्रोफेसर को 3.75 लाख का नुकसान हुआ। पीएम मोदी ने भी ‘मन की बात’ में लोगों को सावधान किया। बचाव के लिए: अज्ञात कॉल पर पैसे न दें, वेरिफाई करें, और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

