‘Mann ki baat’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज अपनी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस गीत को भारत की जीवंत और भव्य संस्कृति का प्रतीक बताया और नागरिकों से इसके मूल्यों को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की अपील की। इसके साथ ही, उन्होंने देश भर में पर्यावरण, स्वदेशी पहल और सांस्कृतिक पुनर्जनन से जुड़े प्रेरणादायक प्रयासों को भी रेखांकित किया।
वंदे मातरम: भारत की आत्मा का प्रतीक
वंदे मातरम, जिसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा और रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में पहली बार गाया, भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस गीत के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में देश भर में सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया। यह गीत न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है, बल्कि एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश भी देता है। नागरिकों से इस अवसर को यादगार बनाने की अपील करते हुए मोदी ने युवाओं को इसके मूल्यों से जोड़ने पर जोर दिया।
जन आंदोलन: पर्यावरण और सामुदायिक प्रयास
प्रधानमंत्री ने देश के कई हिस्सों में नागरिकों की अनूठी पहलों की सराहना की। गुजरात में मैंग्रोव रोपण से तटीय संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, तो छत्तीसगढ़ में ‘गार्बेज कैफे’ पहल कचरा प्रबंधन को प्रोत्साहित कर रही है, जहां कचरे के बदले भोजन दिया जाता है। बेंगलुरु में झीलों के पुनर्जनन के प्रयास शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। ये पहल दर्शाती हैं कि स्थानीय स्तर पर शुरू किए गए प्रयास देश की प्रगति और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
स्वदेशी नस्लों का गौरव: सुरक्षा बलों में योगदान
मोदी ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा भारतीय नस्ल के कुत्तों को शामिल करने की प्रशंसा की। रामपुर हाउंड, मुधोल हाउंड, मोंगरेल्स, कोम्बाई और पांडिकोना जैसी नस्लें अब सुरक्षा बलों का हिस्सा हैं। उन्होंने एक मुधोल हाउंड के विदेशी नस्लों को हराकर पुरस्कार जीतने और छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में एक स्वदेशी कुत्ते द्वारा 8 किलोग्राम विस्फोटक का पता लगाने की घटना का जिक्र किया। ये कुत्ते 31 अक्टूबर 2025 को गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित परेड में भी हिस्सा लेंगे।
कॉफी खेती को बढ़ावा देने वाले प्रयासों की सराहना की
प्रधानमंत्री ने ओडिशा के कोरापुट में कॉफी खेती को बढ़ावा देने वाले प्रयासों की सराहना की, जिसने स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने भारत की कॉफी की वैश्विक लोकप्रियता पर प्रकाश डाला, जिसमें कर्नाटक के चिकमंगलुरु, कुर्ग, तमिलनाडु के नीलगिरि, और केरल के वायनाड जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह विविधता न केवल भारत की कृषि क्षमता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।
संस्कृत का पुनर्जनन: सोशल मीडिया की भूमिका
मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से संस्कृत की लोकप्रियता में वृद्धि की प्रशंसा की। युवा कंटेंट क्रिएटर यश सालुंड्के जैसे लोग संस्कृत को रील्स और ऑनलाइन चैनलों के जरिए सिखा रहे हैं। क्रिकेटर और कंटेंट क्रिएटर यश की संस्कृत में क्रिकेट खेलने वाली रील्स को खूब पसंद किया गया है, जो संस्कृत को आधुनिक पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
एकजुट भारत के लिए आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी का मन की बात संबोधन एकता, स्थिरता और सांस्कृतिक गौरव की दृष्टि को दर्शाता है। वंदे मातरम के उत्सव से लेकर स्वदेशी और पर्यावरणीय पहलों तक, उनका संदेश प्रत्येक भारतीय को प्रेरित करता है कि वे एक समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दें।

