उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में देवशाल-कोठेड़ा ग्रामसभा के निवासियों ने शनिवार को सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि ठोस कार्रवाई न होने पर वे आगामी विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डालेंगे। करीब ढाई किलोमीटर लंबी इस सड़क का काम वन स्वीकृति और विभागों के आपसी तालमेल की कमी के कारण वर्षों से अटका हुआ है|
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले की देवशाल-कोठेड़ा ग्रामसभा के ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित सड़क निर्माण की मांग को लेकर शनिवार को प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। केदारनाथ के निकट गुप्तकाशी हेलीपैड के पास स्थित इस ग्रामसभा के ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और उस वक्त की स्थानीय विधायक (अब दिवंगत) शैलारानी रावत की घोषणा के बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब ढाई किलोमीटर लंबी प्रस्तावित सड़क का मामला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के बीच उलझा हुआ है।
उन्होंने बताया कि सड़क के लिए अब तक 15 से 20 बार सर्वेक्षण किए जा चुके हैं, लेकिन वन संबंधी मंजूरी और विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब समस्याओं का समाधान सरकारी विभागों के स्तर पर होना है, तो आपसी समन्वय से इन्हें दूर क्यों नहीं किया जा रहा है। ग्रामीण अंशुमान देवशाली ने कहा कि सड़क बनने से ग्रामसभा के 150 से 200 परिवारों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण अब केवल घोषणाओं और सर्वेक्षणों के बजाय निर्माण कार्य शुरू होते देखना चाहते हैं। आंदोलन में शामिल ग्राम प्रधान शुभम देवशाली ने बताया कि सड़क पहले पीडब्ल्यूडी के तहत स्वीकृत थी, लेकिन वर्ष 2025 में इसे पीएमजीएसवाई को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने कुछ काम अधूरे छोड़े हैं, जबकि पीडब्ल्यूडी संबंधित कार्यों को पीएमजीएसवाई के दायरे में बता रहा है।
कांग्रेस नेता और केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कि प्रदेश में ऐसी सैकड़ों सड़कों की घोषणाओं और शासनादेशों के बावजूद वन भूमि हस्तांतरण तथा वित्तीय स्वीकृति नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जल्द ही ऐसी घोषणाओं को लेकर अभियान चलाएगी और अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को उठाएगी।

