OSM Controversy

OSM Controversy के बीच CBSE का बड़ा फैसला, बोर्ड ने घटाई रीवैल्युएशन फीस

CBSE OSM Controversy : हाल ही में CBSE ने कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम घोषित किया है, जिसमें इस वर्ष 85.20 प्रतिशत छात्र सफल हुए हैं। यह पिछले छह वर्षों का सबसे कम पास प्रतिशत माना जा रहा है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बार बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की, जिसके बाद कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें उम्मीद से 10 से 15 प्रतिशत तक कम अंक मिले हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर की और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बढ़ती चिंताओं को देखते हुए बोर्ड और शिक्षा मंत्रालय दोनों को सामने आकर सफाई देनी पड़ी।

विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर बच्चों और अभिभावकों में जो बेचैनी है, उसे सरकार और बोर्ड अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि OSM कोई नई प्रणाली नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत वर्ष 2014 में ही की गई थी। विदेशों के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में भी इसी तकनीक के माध्यम से मूल्यांकन किया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी छात्र को लगता है कि उसकी कॉपी की जांच ठीक से नहीं हुई है, तो वह CBSE के मौजूदा प्रावधानों के तहत रीवैल्युएशन का सहारा ले सकता है। बोर्ड पूरी पारदर्शिता के साथ कॉपियों की दोबारा जांच करेगा। साथ ही, इस प्रणाली की लगातार समीक्षा की जाती है और भविष्य में कक्षा 10वीं में इसे लागू करना है या नहीं, इस पर भी विचार किया जाएगा।

CBSE का कहना है कि OSM प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें टोटलिंग और अंक जोड़ने में होने वाली मानवीय गलतियां लगभग खत्म हो जाती हैं। साथ ही किसी उत्तर के बिना जांचे छूट जाने की संभावना भी काफी कम हो जाती है। छात्रों की शिकायतों को देखते हुए बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को आसान और सस्ता बना दिया है। अब छात्र अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका केवल 100 रुपये शुल्क देकर देख सकते हैं, जबकि पहले इसके लिए 700 रुपये तक देने पड़ते थे। वहीं, किसी विशेष प्रश्न की दोबारा जांच के लिए सिर्फ 25 रुपये शुल्क तय किया गया है। बोर्ड ने यह भी भरोसा दिलाया है कि यदि पुनर्मूल्यांकन के बाद छात्रों के अंक बढ़ते हैं, तो शुल्क वापस कर दिया जाएगा। CBSE और शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि छात्रों की मानसिक स्थिति और भविष्य को ध्यान में रखते हुए हर शिकायत की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाएगी।

13 हजार कॉपियों की हुई मैनुअल जांच

सुरक्षा और निष्पक्षता के मोर्चे पर बोर्ड ने बताया कि पूरी प्रक्रिया में तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। स्कैनिंग के दौरान अधिकारियों ने पाया कि लगभग 13 हजार कॉपियों में हल्की स्याही या स्कैनिंग से जुड़ी तकनीकी दिक्कतें थीं। किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो, इसलिए बोर्ड ने इन सभी कॉपियों को तुरंत अलग कर उनकी पारंपरिक तरीके से मैनुअल जांच करवाई।

मंत्रालय और बोर्ड दोनों ने संयुक्त रूप से भरोसा दिलाया है की छात्रों का भविष्य और उनका मानसिक स्वास्थ्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बोर्ड का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन पूरी तरह निष्पक्ष और आधुनिक तरीका है, फिर भी छात्रों के लिए शिकायत निवारण और पुनर्मूल्यांकन के सभी विकल्प खुले रखे गए हैं।

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