Rampur District Hospital -रामपुर के जिला अस्पताल से एक वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ था। वायरल मोबाइल की टॉर्च में मरीज के लगाए जा रहे थे। टांके, रामपुर सीएमएस ने इस खबर को लेकर दी जानकारी सीएमएस ने कहा अस्पताल की छवि धूमिल करने का किया गया है प्रयास जिन डॉक्टरों ने लगाए टांके सीएमएस ने उनकी की प्रशंसा रामपुर के जिला अस्पताल में ये प्रकरण 9 तारीख का है।
इसमें जो टांके लगाए जा रहे थे उस समय लाइट आ रही थी। टांके लगाते समय ही अचानक से जब लाइट गई है, तुरंत अपने कर्मचारी को जेनरेटर स्टार्ट करने के लिए भेज दिया गया और इमरजेंसी लाइट उस समय उपलब्ध थी जो कि वहाँ जल रही थी। तो इसलिए ये कहना कि इमरजेंसी लाइट की व्यवस्था नहीं थी, इमरजेंसी लाइट लगी हुई है, आप खुद जाकर देख सकते हैं और चार-साढ़े चार मिनट में ही जेनरेटर की लाइट आ गई है।
लेकिन इस बीच में जो टांके लगाने की प्रक्रिया चल रही थी, एक बच्चे को उसको लगाने के लिए कंटिन्यू प्रयास जारी रहा और उसके लिए मोबाइल की टॉर्च लाइट का भी सहयोग लिया गया। तो क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया जाता तो ब्लीडिंग ज्यादा होने की संभावना थी, अतः मरीज के हित में यह कार्य किया गया है और लगातार टांके लगाने से उसकी ब्लीडिंग नहीं हुई।
और इस तरह से जो प्रचार किया जा रहा है, जो गलत प्रचार किया जा रहा है, मैं इसकी भर्त्सना करता हूँ, मैं इसका खंडन करता हूँ वो केवल अस्पताल को, जिला अस्पताल को बदनाम करने के प्रयास किए जा रहे हैं और इस तरह की न्यूज़ नहीं चलनी चाहिए।
चार-साढ़े चार मिनट का समय जेनरेटर चलाने के लिए कोई गलत समय नहीं है।तत्काल जेनरेटर की व्यवस्था कर दी गई थी और चार मिनट में जेनरेटर चल जाना और प्लस मरीज के हित में जो कार्य किए गए हैं, मैं उस अधिकारी और कर्मचारी को, जिसके द्वारा टांके लगाए जा रहे थे, मैं उसकी प्रशंसा करता हूँ कि उनके द्वारा मरीज के हित में निर्णय लिया गया।

Rampur District Hospital में क्या हुआ? जानिए पूरा मामला
रामपुर जिला अस्पताल में 9 अगस्त को एक मरीज के टांके लगाए जा रहे थे। CMS के अनुसार प्रक्रिया के दौरान अचानक बिजली चली गई, जिसके बाद generator शुरू कराया गया। इस बीच bleeding रोकने के लिए टांके लगाने की प्रक्रिया जारी रखी गई और मोबाइल टॉर्च का सहयोग लिया गया।
- घटना 9 अगस्त की बताई गई
- टांके लगाते समय बिजली चली गई
- Generator तुरंत शुरू कराने के निर्देश दिए गए
- Emergency Light उपलब्ध होने का दावा
- मरीज के हित में procedure जारी रखा गया

Viral Video vs CMS की सफाई: क्या है अंतर?
वायरल वीडियो से अस्पताल में रोशनी की व्यवस्था पर सवाल उठे, जबकि CMS का कहना है कि Emergency Light और generator backup दोनों मौजूद थे। उनके अनुसार मोबाइल टॉर्च का इस्तेमाल केवल बिजली जाने के दौरान treatment जारी रखने के लिए किया गया।
| मुद्दा | वायरल वीडियो से सामने आया | CMS का पक्ष |
|---|---|---|
| रोशनी | मोबाइल टॉर्च में टांके | Emergency Light उपलब्ध थी |
| बिजली | बिजली जाने की स्थिति | अचानक बिजली गई थी |
| Backup | सवाल उठे | Generator मौजूद था |
| Generator | तत्काल रोशनी नहीं दिखी | 4-4.5 मिनट में चालू हुआ |
| Treatment | मोबाइल की रोशनी में जारी | मरीज की bleeding रोकने के लिए जारी रखा |
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FAQs
Q1. रामपुर जिला अस्पताल का वायरल वीडियो किस मामले से जुड़ा है?
वीडियो में एक मरीज के टांके मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में लगाए जाते दिखाई दिए थे।
Q2. घटना कब की बताई गई है?
CMS के अनुसार यह प्रकरण 9 अगस्त का है।
Q3. CMS ने मोबाइल टॉर्च के इस्तेमाल पर क्या कहा?
CMS के मुताबिक अचानक बिजली जाने के दौरान मरीज की bleeding रोकने के लिए treatment जारी रखा गया और मोबाइल टॉर्च का सहयोग लिया गया।
Q4. क्या अस्पताल में Emergency Light मौजूद थी?
CMS ने कहा कि अस्पताल में Emergency Light उपलब्ध थी और घटना के समय वह जल रही थी।
Q5. Generator कितने समय में चालू हुआ?
CMS के अनुसार करीब चार से साढ़े चार मिनट में generator की बिजली आ गई थी।

