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शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन सदन में गूंजा विशेषाधिकार हनन का मुद्दा

विधानसभा चुनाव 2022 की नजदीकी सामने आ रही है, पार्टियों द्वारा अपने- अपने तरीके से चुनावी रणनीति पर जोर दिया जा रहा है, वही शीतकालीन सत्र 9 दिसंबर से शुरु होकर 11 दिसंबर तक चला, विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन यानि 11 दिसंबर के बीते दिन सदन में पार्टियों द्वारा विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठा लिया गया। विपक्ष व सत्ताधारी पक्ष ने एक साथ विशेषाधिकार हनन को लेकर आवाज उठाई, इस मुद्दे को लेकर पूरे तीन घंटे तक सदन में हंगामा होता रहा, यह भी पढ़े-सीडीएस रावत का अंतिम संस्कार कल दिल्ली कैंट में होगा हंगामे के बीच चार बार कार्यवाही को रोकना पड़ा वहीं विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने 10 दिनों के अंदर- अंदर विशेषाधिकार हनन के मुद्दे पर सदन में रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। रिपोर्ट के आधार पर ही विशेषाधिकार हनन के मामलें को विशेषाधिकार समिति को दिया जाएगा।  शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन प्रात: 11 बजे से सदन में कार्यवाही शुरु की गयी थी, जिसमें सबसे पहले विपक्ष द्वारा विशेषाधिकार हनन के मामले को सदन में उठाया गया, जैसे ही विपक्ष द्वारा हनन का मुद्दा रखा गया वैसे ही सत्ताधारी पक्ष के विधायकों ने इस पर बहुत सी बातें बढ़ा चढ़ाकर बोलना शुरु कर दिया। विशेषाधिकार के मुद्दे से पार्टियों ने सदन में खूब हंगामा खड़ा किया, जिसे देख चार बार सदन में कार्यवाही को रोकने की नौबत आन पड़ी। सिमरन बिंजोला

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