Yogi Government : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक बचत और संसाधनों के सही इस्तेमाल की अपील का असर अब उत्तर प्रदेश में भी दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में खर्च में कटौती और ईंधन बचाने के लिए कई कड़े निर्देश जारी किए हैं। मंगलवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है। सरकार का मुख्य ध्यान ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और फिजूलखर्ची रोकने पर है।
सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’
प्रदेश में ईंधन की खपत और प्रदूषण कम करने के लिए अब सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने की तैयारी की जा रही है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपेक्षा की गई है। इसके साथ ही सरकार कामकाज के आधुनिक तरीकों को बढ़ावा दे रही है, जिसके तहत सरकारी बैठकों और सेमिनारों को ज्यादातर ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया जाएगा। औद्योगिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को भी सप्ताह में दो दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव कम हो सके।
सार्वजनिक परिवहन और बिजली की बचत
मुख्यमंत्री ने आम जनता से मेट्रो, रोडवेज बसों, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। भीड़भाड़ वाले रास्तों पर अतिरिक्त बसें चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि लोगों को निजी वाहनों की जरूरत न पड़े। बिजली संरक्षण के क्षेत्र में भी सरकार ने सख्ती दिखाई है, जहां सरकारी भवनों में अनावश्यक बिजली के उपयोग को रोकने के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों का न्यूनतम इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
विदेशी यात्राओं पर रोक और स्वदेशी को बढ़ावा
आर्थिक बचत के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने अगले छह महीने तक गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं को टालने और विदेशों के बजाय उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों पर डेस्टिनेशन वेडिंग करने का सुझाव दिया है। इसके लिए ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान के माध्यम से राज्य के किलों और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, त्योहारों पर विदेशी वस्तुओं के बजाय स्वदेशी ODOP उत्पादों और हस्तशिल्प को उपहार के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है।
खान-पान और प्राकृतिक खेती में सुधार
स्वास्थ्य और बचत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने खाद्य तेल के कम इस्तेमाल और पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने की योजना बनाई है। इसके लिए होटल और स्ट्रीट फूड यूनियनों से संपर्क कर कम तेल वाले व्यंजनों को बढ़ावा देने को कहा गया है। कृषि के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की तैयारी है, जिसमें प्राकृतिक खेती (नेचुरल फार्मिंग) को प्रोत्साहित करने और गोशालाओं के गोबर का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
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