फ़िरोज़ाबाद में 1 वर्ष पहले फर्जी एफडीआर मामले में डिबार की गयी फर्मो के नाम मे टेंडर के मामला बना निगम में चर्चा का विषय
फिरोजाबाद नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। फर्जी एफडीआर मामले में पहले डिबार की गई तीन फर्मों को बाद में करोड़ों रुपये के टेंडर मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि नगर निगम प्रशासन का कहना है कि डिबार की अवधि समाप्त होने के बाद कानून के तहत संबंधित फर्मों को ई-टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से नहीं रोका जा सकता। देखिए यह रिपोर्ट।
फिरोजाबाद नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामला ठेकेदार महेश गोला से जुड़ी तीन फर्मों—मैसर्स जय अम्बे ट्रेडर्स, मैसर्स सुनीता देवी ट्रेडर्स और मैसर्स बजरंग ट्रेडर्स—का है। इन फर्मों को फर्जी एफडीआर मामले में छह माह के लिए डिबार किया गया था। अब डिबार अवधि पूरी होने के बाद इन्हें करोड़ों रुपये के टेंडर मिलने पर चर्चा शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, तत्कालीन नगर आयुक्त ऋषि राज ने फर्जी एफडीआर प्रकरण में संबंधित ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि डिबार अवधि समाप्त होने के बाद इन्हीं फर्मों को मिले टेंडरों की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार हुई या नहीं।
इधर पूरे मामले पर नगर आयुक्त प्रशांत नागर का कहना है कि संबंधित फर्मों को केवल छह माह के लिए डिबार किया गया था और वह अवधि पूरी हो चुकी है। उनका कहना है कि कानूनी रूप से किसी ठेकेदार को डिबार अवधि समाप्त होने के बाद ई-टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि नए टेंडरों में प्राप्त सभी दस्तावेजों की जांच की जाती है और पूरी ई-टेंडर प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई जा रही है।
फिलहाल नगर निगम प्रशासन अपने स्तर पर पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और पारदर्शी बता रहा है, जबकि टेंडर आवंटन को लेकर उठे सवालों पर चर्चा जारी है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे कोई जांच या अन्य कार्रवाई होती है या नहीं।
बाईट प्रशान्त नागर नगर आयुक्त नगर निगम फ़िरोज़ाबाद
मामले की प्रमुख जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | फिरोजाबाद नगर निगम |
| विवाद | फर्जी एफडीआर मामला |
| डिबार फर्में | 3 |
| डिबार अवधि | 6 माह |
| संबंधित प्रक्रिया | ई-टेंडर |
| प्रशासन का पक्ष | नियमों के तहत टेंडर आवंटन |
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FAQs
1. फिरोजाबाद नगर निगम में विवाद किस बात को लेकर है?
विवाद पहले डिबार की गई तीन फर्मों को दोबारा करोड़ों रुपये के टेंडर मिलने को लेकर है।
2. फर्मों को क्यों डिबार किया गया था?
फर्जी एफडीआर मामले में इन फर्मों को छह महीने के लिए डिबार किया गया था।
3. नगर निगम का इस मामले में क्या कहना है?
नगर निगम का कहना है कि डिबार अवधि समाप्त होने के बाद फर्मों को ई-टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से कानूनी रूप से नहीं रोका जा सकता।
4. क्या टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी बताई गई है?
हां, नगर निगम के अनुसार सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ई-टेंडर प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाती है।
5. क्या इस मामले में आगे जांच हो सकती है?
यदि संबंधित स्तर पर शिकायत या जांच की आवश्यकता महसूस होती है, तो आगे प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

