MLFF Toll System: राजधानी दिल्ली की सड़कों पर सफर करने वालों के लिए एक राहत की खबर है। लंबे ट्रैफिक जाम और टोल प्लाजा की लंबी लाइनों में रुकने का झंझट अब खत्म होने जा रहा है। आज से देश में एक हाईटेक टोल सिस्टम शुरू किया गया है, जिसमें गाड़ियों को टोल देने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। क्या है यह मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम, आइए समझते हैं:-
क्या है मल्टी-लेन फ्री फ्लो तकनीक?
इस नई व्यवस्था को तकनीकी भाषा में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब टोल प्लाजा पर लोहे के बैरियर नहीं होंगे, जिसके कारण गाड़ियों को पैसे देने या स्कैनिंग के लिए रुकना नहीं पड़ेगा। हाईवे पर लगे आधुनिक सेंसर और हाई-स्पीड कैमरे 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरते वाहनों के FASTag और नंबर प्लेट को पहचान लेंगे और सीधे बैंक खाते से टोल की रकम काट ली जाएगी।
आम जनता के लिए राहत भरा फैसला
सरकार का मानना है कि इस हाईटेक सिस्टम का सीधा लाभ आम लोगों की जेब और समय पर पड़ेगा। अभी तक टोल बूथ पर FASTag स्कैन न होने या नेटवर्क की समस्या के कारण गाड़ियों की लंबी लाइनें लग जाती थीं, जिससे कीमती ईंधन और समय दोनों की बर्बादी होती थी। अब बैरियर हटने से गाड़ियां बिना अपनी गति कम किए निकल सकेंगी, जिससे यात्रा सुगम होगी, प्रदूषण कम होगा और ईंधन की भारी बचत होगी।
गुजरात के बाद दिल्ली में सफल कदम
दिल्ली में इस तकनीक को लागू करने से पहले इसका सफल परीक्षण गुजरात के सूरत-भरूच सेक्शन (चोर्यासी टोल प्लाजा) पर किया जा चुका है। वहां मिले सकारात्मक परिणामों और यात्रियों के फीडबैक के आधार पर ही अब इसे राजधानी दिल्ली में शुरू किया गया है। मुंडका-बक्करवाला अब देश का ऐसा दूसरा टोल प्लाजा बन गया है, जहां कोई भी गाड़ी बिना रुके टैक्स का भुगतान कर सकती है।
2026 तक पूरे देश में बदलेगी तस्वीर
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अर्बन एक्सटेंशन रोड-द्वितीय (UER-2) पर मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) अवरोधक-रहित टोलिंग प्रणाली का सोमवार को उद्घाटन कर दिया है।
नितिन गडकरी ने इस अवसर पर भविष्य की योजना साझा करते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य साल 2026 के अंत तक देश के अधिकांश टोल प्लाजा को डिजिटल और बैरियर-फ्री बनाना है। NHAI ने योजना बनाई है कि सितंबर 2026 तक नौ राज्यों के 17 प्रमुख टोल प्लाजा को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसके बाद मार्च 2027 तक दूसरे चरण में 108 से अधिक टोल प्लाजा इस आधुनिक प्रणाली का हिस्सा बन जाएंगे, जिससे पूरे भारत का हाईवे नेटवर्क स्मार्ट और तेज हो जाएगा।
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