एयर इंडिया के दो पायलट प्रारंभिक ड्रग टेस्ट में ‘नॉन-नेगेटिव’, जांच पूरी होने तक उड़ान से हटाए गए
एयर इंडिया के दो और पायलटों को प्रारंभिक ड्रग स्क्रीनिंग में ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणाम आने के बाद उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। दोनों के नमूने अब पुष्टि के लिए भेजे गए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों पायलट ड्रग इस्तेमाल के दोषी पाए गए हैं—अंतिम निष्कर्ष पुष्टि परीक्षण और उसके बाद की चिकित्सकीय समीक्षा के आधार पर ही निकलेगा।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब एयर इंडिया समूह ने अपने सभी पायलटों की एकमुश्त अनिवार्य ड्रग स्क्रीनिंग शुरू की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अभियान शुरू होने के बाद अब तक करीब 300 से 400 पायलटों की जांच की जा चुकी है और इन दो मामलों में आगे की जांच की जा रही है।
जांच क्यों बढ़ाई गई?
एयर इंडिया का व्यापक परीक्षण अभियान 4 अगस्त को हुए फुकेत-दिल्ली AI2379 उड़ान हादसे जैसे गंभीर घटनाक्रम के बाद शुरू हुआ। एयरबस A320 विमान ने उड़ान के दौरान अचानक करीब 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी। घटना में यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को चोटें आईं। मामले की जांच Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) कर रहा है। एयरबस और फ्रांस का BEA भी जांच में सहयोग कर रहे हैं।
इस घटना के बाद विमान के कमांडर की ड्रग स्क्रीनिंग में मारिजुआना के लिए सकारात्मक परिणाम आने की रिपोर्ट सामने आई थी। पुष्टि परीक्षण में भी परिणाम सकारात्मक बताया गया। हालांकि, इस ड्रग टेस्ट के परिणाम को विमान के ऊंचाई खोने की घटना का प्रत्यक्ष कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी। AAIB ने भी जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की अपील की है।
जांच में विमान की तकनीकी स्थिति भी अहम है। एयरबस के प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव में अस्थायी समस्या आई थी, जिसके कारण कुछ फ्लाइट-कंट्रोल सतहें करीब चार सेकंड तक काम नहीं कर पाईं। इसलिए पायलट के ड्रग टेस्ट और विमान की तकनीकी खराबी—दोनों पहलुओं को अलग-अलग जांचना जरूरी है।
‘नॉन-नेगेटिव’ का मतलब क्या है?
पायलट ड्रग टेस्ट में ‘नॉन-नेगेटिव’ को सीधे ‘पॉजिटिव’ नहीं माना जाता। प्रारंभिक स्क्रीनिंग में किसी पदार्थ के संकेत मिलने पर नमूने की पुष्टि के लिए अलग परीक्षण किया जाता है।
DGCA के मौजूदा नियमों के अनुसार, प्रारंभिक स्क्रीनिंग नॉन-नेगेटिव आने पर संबंधित कर्मचारी को सुरक्षा-संवेदनशील ड्यूटी से तुरंत हटाया जाता है, जब तक पुष्टि रिपोर्ट नहीं आ जाती। पुष्टि परीक्षण में परिणाम सकारात्मक होने पर मेडिकल रिव्यू ऑफिसर यह भी देख सकता है कि परिणाम किसी वैध चिकित्सकीय उपचार या अन्य स्वीकार्य स्रोत के कारण तो नहीं आया।
नियमों के तहत पहली बार पुष्टि किए गए सकारात्मक मामले में पुनर्वास या डी-एडिक्शन प्रक्रिया लागू हो सकती है। कर्मचारी को दोबारा सुरक्षा-संवेदनशील जिम्मेदारी संभालने से पहले निगेटिव टेस्ट और फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल करना होता है। दूसरी बार पुष्टि किए गए सकारात्मक मामले में लाइसेंस तीन साल के लिए निलंबित किया जा सकता है, जबकि तीसरे सकारात्मक मामले में लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
एयर इंडिया ने शुरू की 100% पायलट स्क्रीनिंग
DGCA की सामान्य व्यवस्था में सुरक्षा-संवेदनशील विमानन कर्मचारियों की एक निश्चित हिस्सेदारी का रैंडम ड्रग टेस्ट किया जाता है। एयर इंडिया ने मौजूदा व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए अपने एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस समूह के लगभग 5,000 पायलटों की एकमुश्त स्क्रीनिंग शुरू की है।
परीक्षण गुरुग्राम स्थित प्रशिक्षण केंद्र, एयर इंडिया के कार्यालयों, फ्लाइट-ब्रीफिंग केंद्रों और संबंधित बेस पर निर्धारित स्थानों पर किया जा रहा है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल मौजूदा मामलों की जांच करना नहीं है। इसका व्यापक असर एयरलाइन के सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी पड़ सकता है, क्योंकि इससे यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि नियमित रैंडम टेस्टिंग के अतिरिक्त व्यापक स्क्रीनिंग से क्या अतिरिक्त जोखिम सामने आते हैं।
Sources Used
- Times of India — दो एयर इंडिया पायलटों के प्रारंभिक ड्रग टेस्ट पर रिपोर्ट
- Reuters — AI2379 में 300 फीट की ऊंचाई गिरने और विमान की तकनीकी जांच पर रिपोर्ट
आगे क्या होगा?
इन दो पायलटों के मामले में सबसे महत्वपूर्ण चरण पुष्टि परीक्षण है। जब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आती, उन्हें ड्रग सेवन का दोषी बताना उचित नहीं होगा।
उधर, AI2379 घटना की तकनीकी और मानवीय दोनों पहलुओं पर जांच जारी है। सरकार ने DGCA से विमानन क्षेत्र में ड्रग टेस्टिंग व्यवस्था की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर परीक्षण का दायरा बढ़ाने पर भी विचार करने को कहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुष्टि परीक्षणों में क्या सामने आता है और AI2379 की जांच में पायलट के ड्रग टेस्ट का घटना से कोई संबंध स्थापित होता है या नहीं। दोनों प्रश्नों के जवाब आधिकारिक जांच और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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