Gorakhpur Betting Racket – ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़,म्यूल खातों से हर दिन लाखों का लेनदेन, 23 मोबाइल समेत भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद गोरखपुर।ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी का नेटवर्क चलाकर संदिग्ध बैंक खातों के जरिए लाखों रुपये का रोजाना लेनदेन करने वाले गिरोह का शाहपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है।थाना अध्यक्ष अंजय कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम और साइबर कमांडो उपेंद्र कुमार सिंह की तकनीकी निगरानी में हुई कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है।पुलिस के अनुसार गिरोह के तीन अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें लगाई गई हैं।पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से तीन लैपटॉप, 23 मोबाइल फोन, एक मिनी लैपटॉप, तीन टैबलेट,11 एटीएम कार्ड और 16 बैंक पासबुक समेत अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की है।
पुलिस का दावा है कि बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में ऑनलाइन गेमिंग पोर्टल,बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस गिरोह के नेटवर्क और उसके आर्थिक लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।पुलिस लाइन में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसपी सिटी निमिष पाटिल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ऑनलाइन गेमिंग पोर्टल के माध्यम से सट्टेबाजी का संचालन करते थे। इसके लिए दूसरे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल कथित तौर पर म्यूल खातों के रूप में किया जाता था।इन खातों में सट्टेबाजी से संबंधित रकम मंगाई और भेजी जाती थी।प्रतिदिन लाखों रुपये के लेनदेन के बाद इससे मिलने वाली रकम को गिरोह के सदस्य आपस में बांटते थे।पुलिस के मुताबिक,गिरफ्तार आरोपियों में कथित मुख्य सरगना नीतीश सिंह एलएलबी फाइनल ईयर का छात्र बताया गया है।उसके साथ गिरफ्तार अभय कुमार सिंह,वाजिद चौधरी, साहिल चौधरी और मुन्ना कुमार स्नातक स्तर के छात्र बताए गए हैं।
पढ़ाई करने वाले युवाओं के इस तरह के नेटवर्क में शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह में और कितने युवा जुड़े हुए हैं तथा उन्हें किस स्तर पर नेटवर्क से जोड़ा गया था।पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को कथित तौर पर बताया कि उन्होंने ‘रेडी अन्ना’ नामक ऑनलाइन पोर्टल का पैनल खरीदा था।इसके बाद उसकी ब्रांच के रूप में कार्यालय संचालित कर ऑनलाइन सट्टेबाजी का काम किया जा रहा था। आरोपियों पर आरोप है कि वे लोगों को अलग-अलग तरह के प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों के एटीएम कार्ड और बैंकिंग संबंधी दस्तावेज अपने पास रखकर उनमें सट्टेबाजी की रकम का लेनदेन किया जाता था।
जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि बैंक खातों के संचालन के लिए एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया जा रहा था।बरामद 11 एटीएम कार्ड और 16 बैंक पासबुक को पुलिस ने जांच के लिए महत्वपूर्ण माना है। पुलिस इन खातों में हुए लेनदेन की पड़ताल कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अब तक कितने रुपये का कारोबार किया गया और रकम किन-किन खातों में भेजी गई।इसके तार दूसरे जिलों और राज्यों तक जुड़े हैं।बैंक खातों के लेनदेन की जांच के बाद गिरोह के आर्थिक नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों के संबंध में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
Police Action में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस का कहना है कि बरामद devices और banking documents की forensic जांच से portal access, login details, payment trail और जुड़े खातों की जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल पांच गिरफ्तारियां हुई हैं और तीन कथित सदस्यों की तलाश जारी है। जांच के बाद रकम और network का वास्तविक आकार स्पष्ट होगा।
- पांच आरोपी गिरफ्तार, तीन की तलाश जारी
- 23 मोबाइल और तीन लैपटॉप बरामद
- एक मिनी लैपटॉप और तीन टैबलेट जब्त
- 11 ATM कार्ड और 16 बैंक पासबुक मिलीं
- Digital transactions की forensic जांच जारी
Legal Gaming vs Illegal Betting: Difference समझें
हर online game को अपने आप सट्टेबाजी नहीं कहा जा सकता। वास्तविक फर्क platform के operation, पैसे लगाने की व्यवस्था, outcome, applicable law और financial trail से तय होता है। इस केस में portal की वास्तविक प्रकृति और आरोपियों की भूमिका जांच के बाद स्पष्ट होगी। सामान्य अंतर नीचे समझा जा सकता है।
| आधार | सामान्य Online Gaming | संदिग्ध/अवैध Betting Network |
|---|---|---|
| Platform identity | कंपनी और operator की जानकारी स्पष्ट | छिपी identity या informal panel |
| Payment method | अधिकृत payment channel | निजी या mule accounts में रकम |
| Account control | यूजर अपना account नियंत्रित करता है | ATM, SIM या passbook दूसरे के पास |
| Transparency | नियम, charges और grievance system स्पष्ट | Odds, withdrawal और records अस्पष्ट |
| प्रमुख Risk Signal | सामान्य KYC और transaction receipt | Commission पर खाते किराये पर लेना |
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FAQs :Gorakhpur Betting Racket
1. गोरखपुर मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस briefing के अनुसार पांच आरोपी गिरफ्तार हुए हैं और तीन कथित सदस्य फरार हैं।
2. पुलिस ने कितने मोबाइल बरामद किए?
आरोपियों के कब्जे से 23 मोबाइल फोन बरामद करने का दावा किया गया है।
3. Mule account क्या होता है?
ऐसा bank account, जिसका इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति की संदिग्ध रकम प्राप्त करने और आगे transfer करने में किया जाता है।
4. क्या गिरफ्तार आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं?
नहीं। मामला जांच के अधीन है और दोष या निर्दोषता का अंतिम निर्णय अदालत करती है।
5. संदिग्ध online transaction की शिकायत कहां करें?
तुरंत अपने bank को सूचित करें और 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

