Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर में हुए बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, भरत तिवारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जिसने इस मुठभेड़ को लेकर पुलिस के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद से सूबे की सियासत गरमा गई है और विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, भरत तिवारी को एक-दो नहीं, बल्कि कुल पांच गोलियां लगी थीं। हैरानी की बात यह है कि ये सभी गोलियां उनके शरीर के निचले हिस्से यानी पैरों और जांघों में लगी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, पहली गोली बाएं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने से लगी, जबकि दूसरी गोली बाएं जांघ के मध्य भाग में भीतर की तरफ लगी थी। तीसरी गोली दाहिनी जांघ के बीच वाले हिस्से में अंदर लगी, चौथी गोली दाहिनी जांघ के बाहरी हिस्से से अंदर की ओर गई थी और पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की तरफ से मारी गई थी। गोलियों के इस पैटर्न के सामने आने के बाद से इस कथित मुठभेड़ के फर्जी होने की आशंकाएं और मजबूत हो गई हैं।
सोशल मीडिया एक्टिविस्ट थे भरत तिवारी
भोजपुर के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत तिवारी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थे और लगातार नदी कटाव, भ्रष्टाचार और स्थानीय मुद्दों पर प्रशासन के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। बीते 17 जून 2026 को पुलिस एनकाउंटर में उनकी मौत हो गई थी। जहां एक तरफ पुलिस का दावा है कि भरत हथियारबंद थे और दोनों तरफ से हुई फायरिंग के दौरान मारे गए, वहीं दूसरी तरफ परिवार और गांव वालों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद उन्हें गोली मारी गई। ग्रामीणों का दावा है कि एक फेसबुक लाइव वीडियो में भी इस घटना से जुड़े कुछ तथ्य दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में परिवार की शिकायत पर शाहपुर थाने में एसडीपीओ (SDPO) समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और संबंधित SDPO को पद से हटा दिया गया है।
सीएम सम्राट चौधरी का कड़ा रुख
इस मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कड़ा रुख अपनाया है। पटना में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम के मंच से उन्होंने साफ किया कि भोजपुर की घटना को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग के गठन का फैसला किया है। उन्होंने मंच से आश्वस्त किया कि घटना में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज
न्याय प्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी भी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जनता के किसी भी आवेदन या मामले पर 30 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों द्वारा आदेश जारी नहीं किया जाता है, तो 31वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से उस अधिकारी को सीधे निलंबित (Suspend) करने का आदेश जारी कर दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आम जनता को समय पर न्याय और प्रशासनिक राहत पहुंचाना है, जिसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

