Uttarakhand Geothermal Energy – जियो थर्मल एनर्जी की ओर बढ़ता उत्तराखंड अब पानी और सूरज के बाद धरती के भीतर छिपी गर्मी से भी बिजली बनाने जा रहा है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने जियो थर्मल एनर्जी नीति के जरिए बिजली उत्पादन की शुरुआत की है। चमोली के तपोवन और उत्तरकाशी के गंगनानी में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। देखिए ये रिपोर्ट।
उत्तराखंड में स्वच्छ ऊर्जा के नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। राज्य अब नदियों के बाद जमीन के नीचे मौजूद ऊर्जा स्रोतों का भी इस्तेमाल करेगा। चमोली के तपोवन क्षेत्र में गर्म पानी के स्रोतों से बिजली बनाने की संभावनाओं पर काम शुरू हो गया है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड ने इसके लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई है और ड्रिलिंग से पहले क्षेत्र का अध्ययन किया जा रहा है। वहीं उत्तरकाशी के गंगनानी में प्रदेश की पहली प्रस्तावित जियोथर्मल विद्युत परियोजना शुरुआती चरण पार कर चुकी है। आइसलैंड की कंपनी वर्किस ने UJVNL को इनीशियल प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंप दी है। दोनों प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
खास बात ये है कि भारत सरकार का गैर पारंपरिक ऊर्जा मंत्रालय अभी तक जियोथर्मल ऊर्जा नीति नहीं ला पाया है, लेकिन उत्तराखंड इस दिशा में सबसे आगे है। राज्य सरकार ने ड्रिलिंग और DPR के लिए 3 करोड़ रुपये भी आवंटित किए जाएंगे।
प्रदेश भर में जियोथर्मल ऊर्जा के लिए 90 से अधिक क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं। आने वाले समय में इन पर भी काम किया जाएगा। शुरुआती तौर पर तपोवन में 3 मेगावाट और गंगनानी में 10 मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावना है।
जियोथर्मल ऊर्जा को लेकर उत्तराखंड की कवायद नई नहीं है। UJVNL आइसलैंड की कंपनी के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को पूरा करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में जियोथर्मल एनर्जी ऊर्जा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।
Uttarakhand Geothermal Energy Project में क्या हो रहा है?
उत्तराखंड में geothermal power generation को फिलहाल pilot level पर आगे बढ़ाया जा रहा है। तपोवन और गंगनानी में जमीन के नीचे मौजूद गर्म पानी और steam resources की क्षमता का technical assessment किया जा रहा है। परियोजनाओं की वास्तविक generation capacity drilling और detailed studies के बाद अधिक स्पष्ट होगी।
- तपोवन में करीब 3 MW क्षमता की संभावना
- गंगनानी में करीब 10 MW generation का शुरुआती अनुमान
- UJVNL परियोजनाओं पर काम कर रहा है
- Iceland की Verkis से technical support
- राज्य में 90 से अधिक geothermal zones चिन्हित
Tapovan vs Gangnani Project: कितनी हो सकती है Capacity?
दोनों प्रस्तावित projects अभी development और assessment के शुरुआती चरणों में हैं। उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गंगनानी project की संभावित capacity तपोवन से अधिक आंकी जा रही है।
| Project Location | जिला | अनुमानित क्षमता | Current Stage |
|---|---|---|---|
| Tapovan Geothermal Project | चमोली | लगभग 3 MW | Survey और pre-drilling study |
| Gangnani Geothermal Project | उत्तरकाशी | लगभग 10 MW | Initial project assessment आगे बढ़ा |
| दोनों Projects | उत्तराखंड | लगभग 13 MW | Pilot development stage |
| अन्य संभावित क्षेत्र | प्रदेश के अलग-अलग हिस्से | Assessment बाकी | 90+ locations चिन्हित |
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FAQs – Uttarakhand Geothermal Energy
1. उत्तराखंड में Geothermal Energy Project कहां बन रहा है?
शुरुआती projects चमोली के तपोवन और उत्तरकाशी के गंगनानी क्षेत्रों में विकसित किए जाने की दिशा में काम चल रहा है।
2. Tapovan Geothermal Project से कितनी बिजली बन सकती है?
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार तपोवन में लगभग 3 MW बिजली उत्पादन की संभावना देखी जा रही है।
3. Gangnani Geothermal Project की capacity कितनी हो सकती है?
गंगनानी में शुरुआती स्तर पर करीब 10 MW generation potential का आकलन किया गया है।
4. Geothermal Energy क्या होती है?
धरती के अंदर मौजूद प्राकृतिक heat, hot water या steam का इस्तेमाल करके पैदा की गई energy को Geothermal Energy कहा जाता है।
5. उत्तराखंड में कितने geothermal areas चिन्हित किए गए हैं?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य में 90 से अधिक संभावित geothermal locations चिन्हित किए गए हैं।

