Uttarakhand News – उत्तराखंड सरकार राज्य में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड संस्कृत आयोग के गठन की तैयारी कर रही है। आयोग को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों और संस्कृत प्रेमियों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। वही भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है, उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी द्वितीय राजभाषा और सभी भाषाओं की जननी है इसके साथ ही राज्य की गढ़वाली, कुमाऊनी, जौनसारी सहित स्थानीय बोलियों में भी संस्कृत के शब्दों का समावेश है।
जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। यह प्रदेश ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और यज्ञशाला की भूमि रहा है। संस्कृत आयोग के गठन से उत्तराखंड की विश्व स्तर पर अलग पहचान बनेगी और यह कदम संस्कृत के संवर्धन में मील का पत्थर साबित होगा जिसके लिए सरकार जल्द ही इस संबंध में प्रस्ताव लाएगी।
वर्तमान व्यवस्था vs संस्कृत आयोग
फिलहाल संस्कृत से जुड़े कार्य अलग-अलग संस्थाओं द्वारा किए जाते हैं। आयोग बनने के बाद इन प्रयासों में बेहतर समन्वय संभव होगा।
| वर्तमान व्यवस्था | संस्कृत आयोग बनने के बाद |
|---|---|
| अलग-अलग संस्थानों द्वारा कार्य | एकीकृत नीति और समन्वय |
| सीमित सुझाव प्रक्रिया | देशभर से विशेषज्ञों की भागीदारी |
| शोध गतिविधियां सीमित | व्यापक शोध और नवाचार |
| डिजिटल उपयोग कम | आधुनिक तकनीक से विस्तार |
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FAQs
Q1. उत्तराखंड संस्कृत आयोग क्या है?
यह प्रस्तावित आयोग संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है।
Q2. सरकार ने सुझाव किनसे मांगे हैं?
संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों और संस्कृत प्रेमियों से।
Q3. मथुरा दत्त जोशी ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और आयोग बनने से उत्तराखंड को वैश्विक पहचान मिलेगी।
Q4. आयोग का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या होगा?
संस्कृत भाषा को आधुनिक शिक्षा, शोध और तकनीक से जोड़ते हुए उसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार को मजबूत करना।
Q5. क्या आयोग के गठन का प्रस्ताव अभी पारित हो गया है?
नहीं। सरकार ने आयोग के गठन की तैयारी शुरू की है और सुझाव लेने के बाद प्रस्ताव लाने की बात कही है।

