जनता की भागीदारी, जरूरत के आधार पर फैसले और जवाबदेही होंगे पार्टी के तीन प्रमुख वचन
दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक सोच को तीन प्रमुख वचनों के रूप में सामने रखा है। इनमें जनता की भागीदारी, जरूरत के आधार पर निर्णय और जनता के प्रति जवाबदेही शामिल हैं। उनका कहना है कि शासन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें नीतियां बनाने से लेकर फैसले लेने तक आम लोगों की भूमिका हो और सरकार के कामकाज का आकलन भी जनता की अपेक्षाओं के आधार पर किया जाए।
लोगों से मिले संदेशों के बाद लिया फैसला
एक वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने बताया कि राजनीति में आने की अपनी योजना का जिक्र करने के बाद उन्होंने लोगों से संपर्क स्थापित करने के लिए एक मोबाइल नंबर साझा किया था। इसके बाद उस नंबर पर बड़ी संख्या में संदेश आने लगे। संदेशों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि व्हाट्सएप ने नंबर को रोक दिया।
उन्होंने कहा कि लोगों की ओर से इतनी व्यापक प्रतिक्रिया मिलने की उन्हें उम्मीद नहीं थी। पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोगों को संपर्क करने में परेशानी हुई, जिसके लिए उन्होंने माफी भी मांगी। उनके अनुसार, लोगों की प्रतिक्रिया ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि बड़ी संख्या में लोग अपनी बात रखने और व्यवस्था में भागीदारी करने के लिए तैयार हैं।
‘सूरज के सामने दिया लेकर खड़ी थी’
दिव्या मित्तल ने लोगों की प्रतिक्रिया का वर्णन करते हुए एक प्रतीकात्मक उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ, जैसे वह सूरज के सामने दिया लेकर खड़ी हों, जबकि उन्हें केवल खिड़की खोलने की जरूरत थी। उनके इस कथन का आशय लोगों की क्षमता और भागीदारी को सामने आने का अवसर देने से था।
उनकी राजनीतिक पहल में जनता से सीधे संवाद और लोगों की समस्याओं को सुनने पर विशेष जोर दिखाई देता है। हालांकि, पार्टी की संगठनात्मक संरचना, उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
तीन वचनों पर आधारित होगी पार्टी की सोच
दिव्या मित्तल ने ‘जननीति भारत’ के तीन प्रमुख वचनों को पार्टी की कार्यशैली का आधार बताया है।
पहला—जनता की भागीदारी: पार्टी के अनुसार, नीतियां बनाने की प्रक्रिया में लोगों की राय और जरूरतों को महत्व दिया जाएगा। उद्देश्य यह है कि फैसले केवल प्रशासनिक स्तर पर न हों, बल्कि उनसे प्रभावित होने वाले लोगों की बात भी सुनी जाए।
दूसरा—जरूरत के आधार पर फैसले: दिव्या मित्तल ने कहा कि निर्णय किसी व्यक्ति की पहचान के बजाय उसकी वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए। इस सोच के तहत सरकारी योजनाओं और संसाधनों का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।
तीसरा—जवाबदेही: पार्टी ने जनता के प्रति जवाबदेही को भी अपना प्रमुख वचन बताया है। इसके तहत कामकाज की समीक्षा, कमियों की पहचान और जरूरत के अनुसार सुधार करने की बात कही गई है।
2027 के विधानसभा चुनाव पर नजर
‘जननीति भारत’ के गठन की घोषणा के साथ दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी आगे की दिशा स्पष्ट कर दी है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरने की उनकी घोषणा के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी प्रदेश में अपना संगठन किस तरह खड़ा करती है और जनता तक अपनी नीतियों को पहुंचाने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
फिलहाल दिव्या मित्तल ने जनता की भागीदारी, जरूरत आधारित निर्णय और जवाबदेही को अपनी राजनीतिक सोच का केंद्र बनाया है। चुनाव में इन वचनों को पार्टी किस तरह ठोस नीतियों और कार्यक्रमों में बदलती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा

