Uttarakhand Culture Department’s efforts gain national recognition; six artists from the state receive the Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar.

उत्तराखंड संस्कृति विभाग के प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान, प्रदेश के छह कलाकारों को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार

संस्कृति सचिव युगल किशोर पंत ने कहा—प्रदेश की लोक विरासत और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के प्रयास ला रहे सकारात्मक परिणाम

देहरादून।
उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और कला परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। वर्ष 2024 और 2025 के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से प्रदेश के छह कलाकारों को सम्मानित किया गया है। संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश की लोककलाओं के संरक्षण, कलाकारों को प्रोत्साहन और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच यह उपलब्धि उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है।

संस्कृति सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, पारंपरिक कलाओं और प्रतिभाशाली कलाकारों को आगे बढ़ाने के लिए संस्कृति विभाग निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ ही कलाकारों को पहचान और मंच उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। राष्ट्रीय स्तर पर छह कलाकारों को मिला यह सम्मान प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और कलाकारों की साधना को रेखांकित करता है।

संस्कृति सचिव ने बताया कि नई दिल्ली में 19 अक्टूबर को आयोजित समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देशभर के 106 युवा कलाकारों को सम्मानित किया। उत्तराखंड से सम्मानित कलाकारों में हेमा नेगी करासी को लोकसंगीत, नम्रता राय को कथक नृत्य, हिमांशु दरमोड़ा को संगीत में समग्र योगदान तथा अनुरागी बंधु—निर्मल कुमार, मुकेश कुमार और अंजलि को लोकसंगीत के क्षेत्र में सम्मान प्रदान किया गया।

प्रदेश के संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने सभी सम्मानित कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विश्वास जताया कि कलाकार अपनी प्रतिभा और साधना से उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएंगे।

संस्कृति विभाग के प्रयासों से प्रदेश की लोककलाओं, लोकगीतों, पारंपरिक नृत्यों और शास्त्रीय कलाओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। ऐसे राष्ट्रीय सम्मान न केवल कलाकारों का उत्साह बढ़ाते हैं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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