देहरादून, 14 अगस्त: देहरादून को एक ऐसे पेड़ से जोड़ने की पहल सामने आई है, जिसे शहर की स्मृतियों और सार्वजनिक जीवन का प्रतीक बनाया जा सके। राजभवन, देहरादून की नक्षत्र वाटिका में छह टेबेबुइया पौधे लगाए गए। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान टेबेबुइया को देहरादून का ‘मेमोरियल ट्री’ या ‘स्मृति वृक्ष’ घोषित करने का प्रस्ताव भी राज्यपाल के समक्ष रखा गया।
यह पहल केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पिछले 15 वर्षों से चल रहा एक अभियान है, जिसके तहत गौरव भारती शिक्षा संस्थान ने वर्ष 2011 से अब तक 1.25 लाख पौधे लगाने का दावा किया है। यह अभियान दिवंगत सरदार गुरचरण सिंह की स्मृति में चलाया जा रहा है, जिन्हें सरदार भगवान सिंह विश्वविद्यालय के संस्थापक-निदेशक के रूप में शिक्षा, पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक सेवा से जोड़ा जाता है।
पौधा लगाने से आगे संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने पौधारोपण अभियान की सराहना करते हुए कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है; उनकी सुरक्षा और देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने अभियान में पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक भागीदारी और जनजागरूकता के पहलुओं को भी रेखांकित किया।
गौरव भारती शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष सुहिर्द पाल सिंह के अनुसार, अभियान का विस्तार केवल संस्थान तक नहीं रहा। इसके तहत दून घाटी के गांवों और बस्तियों के अलावा स्कूलों, सड़कों के किनारे, मंदिर परिसरों और घरों के आंगनों में भी पौधे लगाए गए हैं।
यही लंबा अनुभव अब एक व्यापक शहरी पहल में बदलने की कोशिश के रूप में सामने आया है—देहरादून में स्मृति के लिए लगाए जाने वाले पौधों की एक विशिष्ट प्रजाति तय करना।
टेबेबुइया को क्यों चुना गया?
कार्यक्रम में शिक्षा, कला, खेल, कृषि और सामाजिक जीवन से जुड़े नागरिकों ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें टेबेबुइया को देहरादून का ‘मेमोरियल ट्री’ घोषित करने की मांग की गई।
ज्ञापन में टेबेबुइया की कुछ विशेषताओं को इस प्रस्ताव का आधार बताया गया है। पेड़ की खास पहचान इसकी पत्तियों के झड़ने के बाद भी शाखाओं पर खिलने वाले फूल हैं। प्रस्ताव में इसे शहरी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त, अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता वाला, गैर-आक्रामक और गहरी जड़ों वाला पेड़ बताया गया है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि टेबेबुइया के पौधारोपण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जोड़ा जा सकता है और उत्तराखंड के हरेला पर्व के आसपास बड़े पैमाने पर ऐसे पौधे लगाए जा सकते हैं।
यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो इसकी कल्पना केवल स्मृति-रोपण तक सीमित नहीं होगी। ज्ञापन में शहरी इलाकों, सड़कों के किनारे और संस्थागत परिसरों में टेबेबुइया लगाने तथा भविष्य में देहरादून में फूलों से सजी टेबेबुइया की सड़कों और मार्गों का नेटवर्क विकसित करने की दीर्घकालिक सोच रखी गई है।
स्मृति को पेड़ से जोड़ने की कोशिश
कार्यक्रम का एक भावनात्मक पक्ष भी रहा। कवि अविनाश मलासी ने प्रियजनों की स्मृति में पेड़ लगाने की परंपरा के महत्व पर बात की। उनके अनुसार, किसी की याद में लगाया गया पेड़ एक शांत स्मृति की तरह होता है, जो लगाने वाले व्यक्ति से कहीं अधिक समय तक जीवित रह सकता है।
इसी विचार को प्रतीकात्मक रूप देने के लिए सुहिर्द पाल सिंह और आशु सात्विका गोयल ने राज्यपाल को टेबेबुइया के पेड़ का एक फ्रेम किया हुआ चित्र भेंट किया। यह प्रस्तावित पहल को देहरादून की पहचान, स्मृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रतीक था।
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उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध कराया गया समाचार स्रोत: “Governor plants Tabebuia at Raj Bhawan, backs proposal for Dehradun’s Tree of Remembrance”, दिनांक 14 अगस्त।
प्रस्ताव अब सरकारी फैसले की दिशा में
टेबेबुइया को देहरादून का आधिकारिक ‘स्मृति वृक्ष’ घोषित किया जाना अभी एक प्रस्ताव है। कार्यक्रम में रखे गए ज्ञापन में राज्यपाल से राज्य सरकार और संबंधित नगर निकायों के समक्ष इस सिफारिश को आगे बढ़ाने का आग्रह किया गया है।
इसलिए इस पहल का अगला महत्वपूर्ण चरण यह होगा कि संबंधित सरकारी और स्थानीय निकाय इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेते हैं। यदि इसे स्वीकृति मिलती है, तो पौधारोपण अभियान को शहर की हरियाली और स्मृति-आधारित सार्वजनिक स्थलों से जोड़ने के लिए एक औपचारिक ढांचा विकसित करना पड़ सकता है।
इस पहल में शामिल लोगों के लिए टेबेबुइया केवल एक फूलदार पेड़ नहीं है। इसका उद्देश्य स्मृति को ऐसी सार्वजनिक हरियाली में बदलना है जिसे आने वाली पीढ़ियां भी देख सकें। हालांकि प्रस्ताव का भविष्य सरकारी निर्णय पर निर्भर करेगा, राजभवन में छह पौधों का लगाया जाना इस विचार की शुरुआत के रूप में जरूर सामने आया है।
कार्यक्रम में जोरावर सिंह, आलोक उल्फत, पीके मेहरिशी, कुदरक सिंह, ललित बड़ाकोटी, दीपक उपाध्याय, जसविंदर सिंह सूडान, मानवेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट, कपिल सांघी, अविनाश मलासी, स्वयं सिद्ध महापात्र और देहरादून नगर निगम की पार्षद स्वाति डोभाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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