Prudent Electoral Trust

Electoral Trust Donations: राजनीतिक चंदे का नया ट्रेंड, चुनावी साल में BJP की फंडिंग मजबूत, विपक्ष को लगा झटका

Electoral Trust Donations: भारतीय राजनीति में चंदे को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चंदा जुटाने के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान पार्टी को कुल ₹6,654.93 करोड़ का चंदा मिला, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 68 प्रतिशत ज्यादा है।

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब देश में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। BJP ने अपनी विस्तृत चंदा रिपोर्ट तय समय से पहले चुनाव आयोग को सौंप दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह चंदा 1 अप्रैल 2024 से 30 मार्च 2025 के बीच मिला।

इसी अवधि में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और दिल्ली में चुनाव कराए गए। चुनावी माहौल में BJP की आर्थिक स्थिति और मजबूत होती दिखी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए मिलने वाला कॉरपोरेट चंदा तेजी से बढ़ा। वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्टोरल ट्रस्टों के जरिए राजनीतिक दलों को कुल ₹3,811 करोड़ का चंदा मिला, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग तीन गुना है।

रिपोर्ट के अनुसार, नौ इलेक्टोरल ट्रस्टों ने मिलकर ₹3,811.37 करोड़ का योगदान दिया। इसमें से BJP को ₹3,112.50 करोड़ मिले, यानी कुल राशि का करीब 82 प्रतिशत। वहीं कांग्रेस को सिर्फ ₹298.77 करोड़ मिले, जो 8% से भी कम है। बाकी रकम अन्य राजनीतिक दलों को मिली।

सबसे बड़ा दानदाता प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट रहा, जिसने BJP को ₹2,180.71 करोड़ दिए। यह ट्रस्ट भारती एंटरप्राइजेज के सहयोग से संचालित है और इसे जिंदल स्टील, मेघा इंजीनियरिंग, भारती एयरटेल, औरोबिंदो फार्मा और टोरेंट फार्मा जैसी कंपनियों से फंड मिला।

इसके अलावा प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट ने लगभग ₹757 करोड़, जबकि न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट ने ₹150 करोड़ का योगदान BJP को दिया। कुल मिलाकर पार्टी के चंदे का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा इलेक्टोरल ट्रस्टों से आया।

कॉरपोरेट सेक्टर की भूमिका भी अहम रही। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ₹100 करोड़, रुंगटा संस ने ₹95 करोड़ और वेदांता ने ₹67 करोड़ का चंदा दिया। लोढ़ा ग्रुप, बजाज ग्रुप, ITC, हीरो ग्रुप, मालाबार गोल्ड और कल्याण ज्वेलर्स भी बड़े दानदाताओं में शामिल रहे। वहीं ज़ेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ ने ₹1.5 करोड़ का व्यक्तिगत दान दिया।

BJP के कुछ नेताओं ने भी निजी स्तर पर सहयोग किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पार्टी को चंदा दिया। जहां BJP की फंडिंग में बड़ा उछाल आया, वहीं विपक्षी दलों को झटका लगा। कांग्रेस को मिला चंदा 43% घट गया, जबकि TMC, BRS, TDP और BJD के चंदे में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि आम आदमी पार्टी के चंदे में मामूली बढ़ोतरी हुई।

यह वित्त वर्ष इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद पहला साल है। यह रिपोर्ट साफ बताती है कि चुनावी राजनीति में पैसा कितनी बड़ी भूमिका निभाता है और फंडिंग का संतुलन राजनीतिक ताकत को कैसे प्रभावित करता है।

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