Moradabad Power Crisis – सुबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साफ-साफ आदेश है कि शहरी इलाकों में 24 घंटे और ग्रामीण इलाकों में लगभग 24 घंटे में से 18 घंटे लाइट दी जाय और कोई खराबी या ट्रांसपावर में कोई दिक्कत आय तो उसे तत्काल प्रभाव से सही करवाने के अधिकारियों को आदेश दिए थे मगर मुरादाबाद के कुछ अधिकारियों को अपनी कुर्सी का इतना घमंड हो गया है। कि उन्हें ग्रामीणों की परेशानियां नहीं दिख रही जी हां हम बात कर रहे हैं।
यूपी के मुरादाबाद के पंचायत काफियाबाद आवबकपूर की जहां पिछले एक महीने से लाइट गुल है। ग्रामीण लाइट की दिक्कत की वजह से कई किलोमीटर दूर पानी लेकर आने को मजबूर है और दूसरी तरफ जो छोटे-छोटे स्कूल के बच्चे हैं उनको भी पढ़ाई में दिक्कत आ रही है। जिनको रात में बैठकर मोमबत्ती जलाकर पढ़ाई करने को मजबूर है ग्रामीणों ने बताया कि जहां बच्चों के हाथ में कलम और कंधे पर स्कूल का बाग होना चाहिए था।
वही मुरादाबाद के यह बिजली विभाग के अधिकारी उनके हाथों में परियों और रात के अंधेरे में हाथ में मोमबत्ती देने को मजबूर कर दिया है इन अधिकारियों को अपनी कुर्सी का इतना घमंड है कि एक महीने से इस इलाके की बिजली गुल है ना तो एक बार भी देखने के लिए आए ना ही किसी जय हो यहां का निरीक्षण करने के लिए भेजा आपको बता दे इस इलाके का ट्रांसफार्मर लगभग एक महीने पहले खराब हो गया था।
उनके कान पर हल्की सी जो भी नहीं रहेगी और ग्रामीणों को नजर अंदाज करते रहे इसके बाद ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की जिसके बाद ग्रामीणों के गांव में 25 कवि का ट्रांसपोंडर भेज दिया गया जिसको लगवाने के लिए ग्रामीणों ने मना कर दिया ग्रामीणों का कहना है। यह ट्रांसपोंडर यहां के लोड से फिर खराब हो जाएगा फिर हमें महीना तक के लिए लाइट के लिए इधर-उधर भागना पड़ेगा इसलिए एक ही बार हमारे इलाके में 62 कवि का ट्रांसफार्मर लगवाया जाए और कहा।
जब से ट्रांसफार्मर खराब हुआ है अगर किसी लाइनमैन को बुलाया जाता है कि इसको देख लो तो बार-बार ₹1500 की रिश्वत लेकर जाता है और कहता है कि जो जो तुमसे हो बिगाड़ दो तुमसे मेरा कुछ नहीं होगा अब ऐसे में यह अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों के धज्जियां उड़ाते हुए नजर आ रहे हैं आखिर मुख्यमंत्री के साथ आदेश है। कि तत्काल प्रभाव से ग्रामीण या शहरी इलाकों की लाइट ज्यादा से ज्यादा दी जाए और कोई बिजली आपूर्ति होती है तो उसको जल्दी निस्तारण कर उसको सही किया जाए क्या यह अधिकारी अपने आप को इतना उच्च समझने लगे हैं कि इनको ग्रामीणों की दिक्कत नहीं समझ आ रही।
Why बिजली संकट बना बड़ा मुद्दा?
लगातार बिजली आपूर्ति बाधित रहने से गांव के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल बिजली की नहीं बल्कि शिक्षा, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी जुड़ी हुई है।
वर्तमान स्थिति vs ग्रामीणों की मांग
| मुद्दा | वर्तमान स्थिति | ग्रामीणों की मांग |
|---|---|---|
| ट्रांसफार्मर | खराब होने का दावा | 62 KVA नया ट्रांसफार्मर |
| बिजली आपूर्ति | लगभग एक महीने से बाधित | नियमित बिजली आपूर्ति |
| शिकायतें | समाधान न मिलने का आरोप | त्वरित कार्रवाई |
| पानी व पढ़ाई | प्रभावित | सामान्य व्यवस्था बहाल |
लखनऊ में SC-ST किसानों की जमीन पर कब्जे और बैंक घोटाले के आरोप, CM योगी से जांच की मांग
CM योगी का बाँदा दौरा: 710 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, बुंदेलखंड के विकास को मिली नई रफ्तार
योगी सरकार का बड़ा तोहफा, अब पोस्टपेड की तरह काम करेंगे Smart Prepaid Meter
FAQs
Q1. मुरादाबाद के किस गांव में बिजली संकट का मामला सामने आया है?
यह मामला मुरादाबाद जिले के पंचायत काफियाबाद आवबकपुर गांव से जुड़ा है।
Q2. ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
ग्रामीण गांव में 62 KVA क्षमता का नया ट्रांसफार्मर लगाने और नियमित बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
Q3. बिजली आपूर्ति कितने समय से प्रभावित बताई जा रही है?
ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगभग एक महीने से बिजली आपूर्ति बाधित है।
Q4. ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर क्या आरोप लगाए हैं?
ग्रामीणों ने अधिकारियों पर शिकायतों की अनदेखी और कुछ कर्मचारियों पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
Q5. इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
यदि विभाग तकनीकी जांच कर उचित क्षमता का ट्रांसफार्मर स्थापित करता है और शिकायतों की जांच करता है, तो बिजली संकट का समाधान संभव हो सकता है।

