Pandit Chhannulal Mishra Death

Pandit Chhannulal Mishra Death: पद्म विभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र का 91 साल की उम्र में निधन, वाराणसी में होगा अंतिम संस्कार

Pandit Chhannulal Mishra Death: भारत के मशहूर शास्त्रीय गायक और पद्म विभूषण सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार सुबह लगभग 4 बजे मिर्जापुर स्थित अपने घर पर उनका निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कई महीनों से अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे थे।

कुछ समय पहले उन्हें वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनके सीने में संक्रमण और खून की कमी पाई गई थी। हालत सुधारने पर उन्हें छुट्टी मिल गई थी, लेकिन धीरे-धीरे उनकी तबीयत और बिगड़ गई।

शाम को वाराणसी में अंतिम संस्कार

परिवार के मुताबिक मिर्जापुर से उनका पार्थिव शरीर11 बजे तक वाराणसी लाया जाएगा। दोपहर में लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे और शाम सात बजे वाराणसी में गंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पीएम मोदी से गहरा जुड़ाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया है। और x पर एक पोस्ट को भी साझा किया गया है. पंडित जी का मोदी से खास संबंध था। 2014 लोकसभा चुनाव में जब मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ने आए थे, तब पंडित जी ने उनके नामांकन में प्रस्तावक की भूमिका निभाई थी।

कौन थे पंडित छन्नूलाल मिश्र?

पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को आज़मगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में हुआ था। उनका परिवार पहले से ही संगीत से जुड़ा हुआ था। उनके दादा गुदई महाराज तबला बजाते थे और पिता बद्री प्रसाद मिश्र भी गायक थे। इसी माहौल में पंडित जी ने बचपन से ही संगीत सीखना शुरू किया।

सिर्फ़ नौ साल की उम्र में उन्होंने अपने पहले गुरु उस्ताद गनी अली साहब से खयाल की शिक्षा ली। बाद में किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खान और ठाकुर जयदेव सिंह से भी उन्हें तालीम मिली।

बनारस की ठुमरी के प्रतीक

पंडित जी की पहचान खयाल और ठुमरी गायन से बनी। वह खयाल, ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती और भजन गाने के लिए पहचाने जाते थे। उनके मशहूर गीतों में ‘सेजिया से सैयाँ रूठ गए’, ‘सांस अलबेली’, ‘लागे तोसे नैन’, ‘सोहर’ और कई भजन शामिल हैं, जिन्हें आज भी लोग सुनना पसंद करते हैं।

सम्मान और पुरस्कार

भारतीय संगीत में योगदान के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले।

  • 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
  • 2010 में पद्मभूषण
  • 2020 में पद्म विभूषण
  • साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने भी उन्हें यश भारती से सम्मानित किया था।

लंबे समय से बीमार थे

बीते कुछ महीनों से पंडित जी की तबीयत लगातार खराब चल रही थी। कभी दिल की समस्या, तो कभी खून की कमी और संक्रमण के कारण उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डॉक्टरों की पूरी टीम उनकी देखरेख कर रही थी। हालत बिगड़ने पर कुछ समय पहले उन्हें बीएचयू के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। लेकिन वहां से छुट्टी मिलने के बाद परिवार उन्हें वापस मिर्जापुर ले गया था।

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