परिसीमन बिल 2026 पर फिर संसद की बैठक

परिसीमन बिल 2026 पर फिर संसद की बैठक? किरेन रिजिजू के बयान से बढ़ी हलचल, जानें NDA के पास कितने वोट

हाँ, परिसीमन बिल 2026 को लेकर संसद की दोबारा बैठक की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 27 अगस्त 2026 को कहा कि मॉनसून सत्र का अभी औपचारिक रूप से सत्रावसान (prorogue) नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार परिसीमन बिल 2026 पर आगे की कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति से संसद की दोबारा बैठक बुलाने का अनुरोध कर सकती है।

इस बयान के बाद सबसे ज्यादा चर्चा परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों को लेकर हो रही है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार ने इन विधेयकों को दोबारा सदन में लाने का अंतिम फैसला कर लिया है।

13 अगस्त को क्या हुआ था?

संसद का 2026 का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चला। 13 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा दोनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (adjourned sine die) कर दिया गया था। लेकिन “adjourned sine die” और “prorogued” एक ही चीज नहीं हैं।

स्थितिइसका मतलब
Adjourned sine dieसदन की बैठक अनिश्चित समय के लिए स्थगित
Prorogationराष्ट्रपति द्वारा संसद के सत्र का औपचारिक समापन
Dissolutionलोकसभा का कार्यकाल समाप्त होना

यही अंतर वर्तमान विवाद का केंद्र है। 13 अगस्त को सदनों की कार्यवाही स्थगित हुई, लेकिन रिजिजू के अनुसार सत्र का औपचारिक सत्रावसान अभी नहीं हुआ था। 

किरेन रिजिजू ने क्या कहा?

किरेन रिजिजू ने क्या कहा?

रिजिजू ने कहा कि संसद को बुलाने का फैसला सरकार करती है और इसके लिए राष्ट्रपति से अनुरोध किया जाता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि सत्र prorogue नहीं हुआ है तो उसी सत्र में संसद की बैठक फिर से हो सकती है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार किसी अन्य बैठक या विशेष सत्र की संभावना खुली रख रही है, तो उन्होंने सीधे हां या ना नहीं कहा। उन्होंने संकेत दिया कि उनके बयान को दोनों तरह से समझा जा सकता है।

इसलिए अभी “परिसीमन बिल पर विशेष सत्र तय हो गया” कहना सही नहीं होगा। फिलहाल उपलब्ध तथ्य केवल यह बताते हैं कि दोबारा बैठक की संवैधानिक/संसदीय संभावना खुली है।

परिसीमन बिल इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

परिसीमन बिल इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

परिसीमन का अर्थ है चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं और राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के आवंटन का पुनर्समायोजन।

भारत में मौजूदा लोकसभा में 543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्र हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार वर्तमान निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन 2001 की जनगणना के आधार पर हुआ था और संविधान संशोधन के कारण अगला व्यापक readjustment पहली 2026 के बाद की जनगणना से जुड़ा हुआ है।

2026 में पेश किए गए संबंधित विधेयकों का उद्देश्य परिसीमन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करना और लोकसभा की अधिकतम संवैधानिक क्षमता बढ़ाना है।

PRS के अनुसार Constitution (131st Amendment) Bill, 2026 लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव करता है। इसके साथ Delimitation Bill, 2026 को जोड़ा गया था, जिसमें प्रकाशित आंकड़ों वाली नवीनतम जनगणना को आधार बनाने का प्रावधान है।

क्या लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो सकती हैं?

प्रस्तावित मॉडल में 543 सीटों की मौजूदा संख्या में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि का उदाहरण दिया गया है, जिससे संख्या करीब 816 बनती है।

सरकार की ओर से अप्रैल में लोकसभा में दिए गए स्पष्टीकरण के अनुसार 50 प्रतिशत वृद्धि वाले मॉडल में लोकसभा की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो सकती है। सरकार ने यह भी कहा था कि दक्षिण भारत के राज्यों की कुल सीटें भी बढ़ेंगी।

हालांकि, यहां 816 और 850 को एक ही संख्या नहीं समझना चाहिए। 850 प्रस्तावित संवैधानिक अधिकतम सीमा से जुड़ा आंकड़ा है, जबकि 816 सरकार द्वारा बताए गए 50 प्रतिशत वृद्धि मॉडल का उदाहरण है। 

NDA के पास कितने सांसद हैं?

यही इस पूरे मामले का सबसे अहम राजनीतिक नंबर गेम है।

मौजूदा रिपोर्टिंग के अनुसार NDA और उसके साथ जुड़े समूहों की लोकसभा में संख्या लगभग 318 बताई गई है। 540 सदस्यीय प्रभावी सदन में संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई का आंकड़ा 360 माना जा रहा है। इसका मतलब है कि केवल 318 के आंकड़े के आधार पर सरकार के पास अभी 360 का समर्थन नहीं है। 

आंकड़ासंख्या
लोकसभा की संवैधानिक कुल सीटें543
वर्तमान प्रभावी सदस्य संख्या540
रिपोर्ट किया गया NDA आंकड़ालगभग 318
540 की effective strength का 2/3360
अंतरलगभग 42

लेकिन यहां एक जरूरी कानूनी बारीकी है।

संविधान संशोधन के लिए 2/3 बहुमत कैसे गिना जाता है?

संविधान संशोधन विधेयक के लिए Article 368 के तहत विशेष बहुमत की जरूरत होती है।

सामान्य तौर पर दो शर्तें महत्वपूर्ण हैं:

  1. सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत।
  2. उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई समर्थन।

इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि NDA के पास 318 सांसद हैं या विपक्ष के पास कितने। मतदान के समय कितने सदस्य उपस्थित हैं और कितने वास्तव में वोट करते हैं, इससे भी परिणाम प्रभावित हो सकता है। 

यही वजह है कि “NDA को हर हाल में 360 सांसद चाहिए” कहना अधूरा विश्लेषण हो सकता है। 360 का आंकड़ा 540 की effective House strength का दो-तिहाई है, लेकिन Article 368 में present-and-voting वाली शर्त भी लागू होती है।

क्या DMK का समर्थन NDA को 2/3 बहुमत तक पहुंचा देगा?

यह भी फिलहाल राजनीतिक अटकल है, पक्का फैसला नहीं।

कुछ रिपोर्टों में 22 DMK सांसदों के समर्थन को संभावित नंबर गेम के रूप में देखा गया है। 318 में 22 जोड़ने पर संख्या 340 होती है, जो 360 से अभी भी कम है। इसलिए सिर्फ DMK के समर्थन से 360 का आंकड़ा अपने आप पूरा नहीं होता।

इसके अलावा किसी भी सांसद या पार्टी के समर्थन को तब तक निश्चित नहीं माना जाना चाहिए जब तक संबंधित राजनीतिक दल या सांसद आधिकारिक रूप से अपना रुख स्पष्ट न करें।

अप्रैल में परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन क्यों अटक गया था?

अप्रैल 2026 के विशेष सत्र में सरकार ने परिसीमन से जुड़े तीन विधायी प्रस्ताव सामने रखे थे:

Constitution (131st Amendment) Bill, 2026

Delimitation Bill, 2026

Union Territories Laws (Amendment) Bill, 2026

PRS के अनुसार इन विधेयकों को 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था।

Constitution (131st Amendment) Bill को आवश्यक विशेष बहुमत नहीं मिला। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वोटिंग में 298 सांसदों ने समर्थन किया और 230 ने विरोध किया, जिसके बाद इससे जुड़े अन्य विधेयक भी आगे नहीं बढ़ सके। 

यही अप्रैल का घटनाक्रम अब अगस्त में फिर चर्चा में है।

महिला आरक्षण से इसका क्या संबंध है?

परिसीमन और महिला आरक्षण की बहस आपस में इसलिए जुड़ी है क्योंकि 2023 के 106वें संविधान संशोधन ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीट आरक्षण का प्रावधान किया था, जिसका प्रभाव परिसीमन और संबंधित जनगणना प्रक्रिया से जुड़ा है।

2026 के संविधान संशोधन प्रस्ताव में इस व्यवस्था को जल्द लागू करने की दिशा में बदलाव सुझाए गए थे। PRS के विश्लेषण के अनुसार प्रस्तावित संशोधन महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन की नई व्यवस्था से जोड़ने वाले मौजूदा ढांचे में बदलाव करता है।

क्या 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन हो जाएगा?

इसे अभी निश्चित नहीं माना जा सकता।

PRS के विश्लेषण के अनुसार अगली जनगणना का संदर्भ 1 मार्च 2027 है और सामान्य परिसीमन प्रक्रिया में समय लग सकता है। इसलिए मौजूदा कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को देखते हुए 2029 के चुनाव से पहले नई परिसीमन व्यवस्था लागू होगी या नहीं, यह स्पष्ट रूप से कहना अभी संभव नहीं है। 

सरकार ने अप्रैल में भी कहा था कि 2029 तक होने वाले चुनाव मौजूदा सीटों और व्यवस्था के तहत होंगे। 

दक्षिण भारत को लेकर विवाद क्यों है?

परिसीमन की बहस का एक बड़ा मुद्दा यह है कि अगर राज्यों को उनकी आबादी के अनुपात में ज्यादा सीटें मिलती हैं, तो अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी बढ़ सकती है।

दक्षिणी राज्यों की ओर से चिंता यह रही है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें इसके कारण राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होना चाहिए।

सरकार ने इसके विपरीत तर्क दिया है कि प्रस्तावित 50 प्रतिशत वृद्धि मॉडल में दक्षिणी राज्यों की सीटों की संख्या भी बढ़ेगी और कुल लोकसभा में उनका प्रतिशत लगभग समान रहेगा। उदाहरण के लिए सरकार ने दक्षिण भारत की मौजूदा 129 सीटों के बढ़कर 195 होने का अनुमान दिया है। 

इसलिए इस मुद्दे को केवल “उत्तर बनाम दक्षिण” के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं देता; असली बहस जनसंख्या, प्रतिनिधित्व, संघीय संतुलन और राजनीतिक सीटों के पुनर्वितरण के बीच है।

अब आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल तीन संभावनाएं प्रमुख हैं:

  1. सरकार मौजूदा सत्र को दोबारा बुलाए और लंबित विधेयकों पर आगे बढ़े।
  2. सरकार बाद में नया सत्र बुलाए और परिसीमन/महिला आरक्षण पर फिर से रणनीति बनाए।
  3. राजनीतिक सहमति बनने तक विधेयक को टाला जाए, खासकर तब जब आवश्यक समर्थन संख्या स्पष्ट न हो।

रिजिजू के बयान ने पहली संभावना पर चर्चा जरूर तेज कर दी है, लेकिन अभी किसी विशेष तारीख या विशेष सत्र की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

निष्कर्ष

संभावना को फिलहाल नकारा नहीं गया है, लेकिन परिसीमन बिल को दोबारा संसद में लाने का अंतिम निर्णय अभी सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं हुआ है।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 13 अगस्त को संसद का मॉनसून सत्र sine die स्थगित हुआ था, जबकि 27 अगस्त को किरेन रिजिजू ने कहा कि सत्र अभी prorogue नहीं हुआ है। इससे सरकार के लिए उसी सत्र में संसद की दोबारा बैठक बुलाने की संभावना तकनीकी रूप से खुली रहती है।

दूसरी ओर, NDA के लगभग 318 सांसदों का मौजूदा आंकड़ा 540 की effective House strength के 360 वाले दो-तिहाई आंकड़े से कम है। इसलिए परिसीमन बिल की वापसी से ज्यादा बड़ा सवाल उसके लिए पर्याप्त राजनीतिक समर्थन जुटाना होगा। 

FAQ

परिसीमन बिल क्या है?

परिसीमन बिल लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्समायोजन तथा सीटों के आवंटन से संबंधित विधायी प्रस्ताव है।

परिसीमन बिल 2026 कब पेश हुआ?

Delimitation Bill, 2026 और Constitution (131st Amendment) Bill, 2026 को 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था।

NDA के पास कितने सांसद हैं?

वर्तमान राजनीतिक गणित में NDA और उससे जुड़े समूहों की संख्या लगभग 318 बताई गई है। यह आंकड़ा राजनीतिक/संसदीय स्थिति के अनुसार बदल सकता है।

दो-तिहाई बहुमत के लिए कितने वोट चाहिए?

540 की effective Lok Sabha strength के आधार पर दो-तिहाई आंकड़ा 360 है। हालांकि संविधान संशोधन में Article 368 की “total membership” और “present and voting” दोनों शर्तों को समझना जरूरी है।

क्या संसद 13 अगस्त के बाद फिर बैठ सकती है?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार, चूंकि सत्र अभी prorogue नहीं हुआ है, सरकार संसद को दोबारा बुलाने का अनुरोध कर सकती है।

क्या परिसीमन बिल पास होना तय है?

नहीं। अभी इसके लिए पर्याप्त राजनीतिक समर्थन सुनिश्चित नहीं है और दोबारा बैठक बुलाने का अंतिम निर्णय भी सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं हुआ है।

क्या 2029 चुनाव से पहले नई सीटें लागू होंगी?

अभी यह निश्चित नहीं है। जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया में समय लगता है; 2029 से पहले इसका पूरा होना अभी स्पष्ट नहीं है।

लोकसभा की सीटें कितनी हो सकती हैं?

प्रस्तावित संवैधानिक बदलाव में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। सरकार ने 50 प्रतिशत वृद्धि वाले मॉडल में 816 सीटों का उदाहरण दिया है।

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