पिथौरागढ़ के राजकीय इंटर कॉलेज बांसबगड़ में एक साथ चार शिक्षकों के तबादले के बाद पैदा हुई कमी को भरने के लिए शिक्षा विभाग को प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक की वैकल्पिक तैनाती करनी पड़ी। गणित के एलटी स्तर के शिक्षक का पद खाली होने के बाद यह व्यवस्था की गई है। मामला सामने आने के साथ ही स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि तबादलों के दौरान किसी स्कूल में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता का आकलन कितना प्रभावी ढंग से किया गया।
मुख्य शिक्षा अधिकारी तरुण पंत के अनुसार बांसबगड़ इंटर कॉलेज से चार शिक्षकों का तबादला हुआ था। गणित शिक्षक की कमी को देखते हुए छात्रहित में राजकीय प्राथमिक विद्यालय रुमीडोला, मुनस्यारी के सहायक अध्यापक कमलेश जोशी को शिक्षण कार्य के लिए जीआईसी बांसबगड़ में तैनात किया गया है।
यह कदम स्थायी नियुक्ति नहीं, बल्कि मौजूदा शैक्षणिक व्यवस्था संभालने के लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्था है। उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि इंटर कॉलेज में नियमित गणित शिक्षक की नियुक्ति कब तक होगी।
एक स्कूल से चार तबादले, फिर व्यवस्था पर दबाव
शिक्षा विभाग में हाल में 1,500 से अधिक शिक्षकों के तबादले हुए हैं। इन्हीं तबादलों के बाद बांसबगड़ का मामला सामने आया है। खंड शिक्षा अधिकारी मुनस्यारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार कॉलेज के विभिन्न विषयों के शिक्षकों के स्थानांतरण हुए हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विद्यालय प्रबंधन समिति ने इस पर नाराजगी जताई है। समिति का कहना है कि स्कूल में जल्द शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
यहां विवाद का मुख्य बिंदु सिर्फ चार शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं है। असली सवाल यह है कि किसी विद्यालय से शिक्षकों को हटाने के बाद वहां विषयवार पढ़ाई पर क्या असर पड़ेगा और उस कमी को भरने की योजना पहले से तैयार थी या नहीं।
प्राथमिक स्कूल के शिक्षक की तैनाती क्यों हुई?
गणित के एलटी स्तर पर शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण विभाग ने प्राथमिक विद्यालय से शिक्षक को वैकल्पिक रूप से भेजा है। यह व्यवस्था तत्काल शिक्षण जरूरत पूरी करने के लिए की गई है।
हालांकि, प्राथमिक और इंटर स्तर की कक्षाओं की शैक्षणिक जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए यह व्यवस्था लंबे समय का समाधान नहीं मानी जा सकती। स्थायी समाधान के लिए संबंधित स्तर और विषय के स्वीकृत पद पर नियमित शिक्षक की उपलब्धता जरूरी होगी।
यही कारण है कि बांसबगड़ का मामला शिक्षक तबादला नीति से आगे बढ़कर स्कूलों में वास्तविक विषयवार मानव संसाधन की योजना का सवाल भी खड़ा करता है।
एक और तबादला आदेश हुआ रद्द
इसी बीच पिथौरागढ़ में शिक्षक तबादलों से जुड़ा एक दूसरा मामला भी सामने आया है। जीआईसी चहज की सहायक अध्यापिका हेमलता खाती का तबादला राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गंगोलीहाट किया गया था।
अपर निदेशक कुमाऊं मंडल गजेंद्र सिंह सौन के आदेश में कहा गया कि शिक्षिका को एलटी सहायक अध्यापक के पद पर अभी दो वर्ष पूरे नहीं हुए थे और उनका परिवीक्षाकाल भी पूरा नहीं हुआ था। इसके बाद उनका तबादला रद्द कर दिया गया।
इस घटनाक्रम से यह साफ होता है कि तबादला प्रक्रिया में पात्रता और सेवा अवधि की शर्तें भी महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, उपलब्ध सामग्री से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि दोनों मामलों के पीछे एक ही तरह की प्रशासनिक गलती थी।
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सबसे बड़ा सवाल: दुर्गम स्कूलों में शिक्षक कब पहुंचेंगे?
इस पूरे विवाद का एक बड़ा पहलू दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों में लंबे समय से तैनात शिक्षकों की स्थिति है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें इन क्षेत्रों में 20 से 25 साल तक हो चुके हैं और वे सुगम क्षेत्रों में तबादले का इंतजार कर रहे हैं।
ऐसे में तबादला प्रक्रिया को लेकर असंतोष केवल किसी एक विद्यालय तक सीमित नहीं रह जाता। शिक्षकों के लिए स्थानांतरण एक प्रशासनिक आदेश भर नहीं है; इसका सीधा असर उनके कामकाजी जीवन और परिवार पर पड़ता है। दूसरी तरफ, स्कूलों के लिए किसी शिक्षक का जाना सिर्फ एक पद खाली होना नहीं, बल्कि किसी खास विषय की पढ़ाई प्रभावित होना भी हो सकता है।
बांसबगड़ में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की अस्थायी तैनाती इसी समस्या का तत्काल उदाहरण है। विभाग के सामने अब दो स्तर की चुनौती है—एक तरफ प्रभावित इंटर कॉलेजों में विषयवार शिक्षकों की कमी दूर करना और दूसरी तरफ ऐसी तबादला व्यवस्था बनाना जिसमें दुर्गम क्षेत्रों के लंबे समय से तैनात शिक्षकों के हित और स्कूलों की जरूरत, दोनों का संतुलन बना रहे।
फिलहाल बांसबगड़ में वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है। लेकिन इस मामले का स्थायी समाधान तभी माना जाएगा जब इंटर कॉलेज में जरूरी विषयों के नियमित शिक्षक उपलब्ध हों और तबादलों के बाद स्कूलों की शैक्षणिक जरूरतों का आकलन प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बने।

