खसरा संक्रमण: खसरा (Measles) के बढ़ते मामलों ने भारत समेत दुनिया के कई देशों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। अत्यधिक संक्रामक यह वायरल बीमारी मुख्य रूप से खांसने और छींकने से निकलने वाली संक्रमित बूंदों के जरिए फैलती है। बच्चों में इसका खतरा अधिक माना जाता है और गंभीर मामलों में निमोनिया, मस्तिष्क में सूजन, अंधापन और मृत्यु जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, खसरा एक ऐसी बीमारी है जिसे प्रभावी टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है।
भारत में 2026 के शुरुआती छह महीनों में खसरे के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। WHO और CDC के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस अवधि में करीब 26,627 मामले दर्ज हुए, जो पूरे 2025 में दर्ज लगभग 18,794 मामलों से अधिक हैं। यह वृद्धि ऐसे समय हुई है जब भारत ने खसरा और रूबेला को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।

भारत में 2026 की शुरुआत में स्थानीय स्तर पर भी प्रकोप सामने आए। दिल्ली के पूर्वी जिले के कैलाश नगर में फरवरी 2026 में खसरे का प्रकोप सामने आया था। स्वास्थ्य विभाग और WHO समर्थित टीमों ने संदिग्ध मामलों की पहचान, जांच और टीकाकरण के माध्यम से संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए अभियान चलाया।
टीकाकरण बना सबसे महत्वपूर्ण बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खसरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है। भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के तहत बच्चों को Measles-Rubella (MR) वैक्सीन की दो खुराक दी जाती हैं—पहली खुराक सामान्यतः 9 से 12 महीने की उम्र में और दूसरी 16 से 24 महीने के बीच। निजी क्षेत्र में MMR वैक्सीन भी उपलब्ध है।
टीकाकरण कवरेज में हाल के वर्षों में सुधार भी देखने को मिला है। WHO-UNICEF के अनुमान के अनुसार, 2025 में भारत में खसरा वैक्सीन की पहली खुराक की कवरेज करीब 98 प्रतिशत, जबकि दूसरी खुराक की कवरेज 95 प्रतिशत तक पहुंच गई। महामारी के दौरान 2020 और 2021 में पहली खुराक की कवरेज लगभग 89 प्रतिशत तक गिर गई थी, जिससे कई बच्चों में प्रतिरक्षा का अंतर पैदा हुआ था।
दुनिया में भी बढ़ रहे मामले
खसरे का खतरा केवल भारत तक सीमित नहीं है। WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में कई देशों में मामलों और प्रकोपों में वृद्धि के बीच विशेषज्ञों ने प्रतिरक्षा की कमी वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने और निगरानी मजबूत करने की अपील की है।
अमेरिका में भी 2026 में खसरे के मामलों में तेज वृद्धि हुई है। अगस्त के अंत तक वहां हजारों मामले और कई मौतें दर्ज किए गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कम होते टीकाकरण कवरेज और वैक्सीन को लेकर गलत सूचनाओं को चिंता का प्रमुख कारण बताया है।
अभिभावकों के लिए जरूरी संदेश
विशेषज्ञों की सलाह है कि अभिभावक बच्चों के टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच करें और कोई खुराक छूट गई हो तो स्वास्थ्यकर्मी या डॉक्टर से संपर्क करें। तेज बुखार, खांसी, नाक बहना, आंखों में लालिमा और शरीर पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चे को अन्य बच्चों से अलग रखते हुए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
खसरे के खिलाफ लड़ाई में केवल टीका उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च टीकाकरण कवरेज, समय पर पहचान, मजबूत निगरानी और स्थानीय स्तर पर तेजी से प्रतिक्रिया—इन सभी उपायों को साथ लेकर चलना जरूरी है। भारत में मामलों में हालिया वृद्धि इस बात का संकेत है कि टीकाकरण से छूटे बच्चों तक पहुंचना और प्रतिरक्षा के अंतर को जल्द भरना सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।
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