PSLV-C62 Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। उसने अपने पीएसएलवी-सी62 रॉकेट के माध्यम से 16 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया, जिससे भारत ने अंतरिक्ष में नई तकनीकी सीमाओं को पार किया। इस मिशन के साथ, भारत सैटेलाइट रिफ्यूलिंग तकनीक को हासिल करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन गया, इसके पहले यह तकनीक केवल चीन के पास थी।
इस प्रक्षेपण ने ISRO के 2026 के अंतरिक्ष कैलेंडर की शानदार शुरुआत की और भारत को वैश्विक स्मॉल-सैटेलाइट लॉन्च बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर दिया। पीएसएलवी-सी62, जिसे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया, 64वीं उड़ान थी और इसमें प्रमुख पेलोड के रूप में ‘ईओएस-एन1’ (अन्वेषा) उपग्रह था, जो DRDO द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट है।
इस मिशन की खासियत इसका प्रमुख उपग्रह ‘EOS-N1’ था, जिसे हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक से लैस किया गया है। यह उपग्रह फसल स्वास्थ्य, मिट्टी की नमी, खनिज संसाधन, और पर्यावरणीय बदलावों की सटीक जानकारी प्रदान करने में सक्षम होगा।
मिशन का एक और महत्वपूर्ण पहलू था आयुलसैट, भारत का पहला ऑन-ऑर्बिट सैटेलाइट रिफ्यूलिंग तकनीक का परीक्षण करने वाला उपग्रह। यह उपग्रह माइक्रोग्रैविटी में डॉकिंग और ईंधन ट्रांसफर सिस्टम का परीक्षण करेगा, जिससे भविष्य में सैटेलाइट की उम्र बढ़ाई जा सकेगी और स्पेस डेब्रिस की समस्या को कम किया जा सकेगा।
इसके अलावा, MOI-1 उपग्रह को भी प्रक्षेपित किया गया, जो भारत की पहली ऑर्बिटल एआई-इमेज लैब है। यह उपग्रह सैटेलाइट पर ही डेटा प्रोसेसिंग करेगा और रियल-टाइम एनालिसिस की सुविधा प्रदान करेगा। इसे ‘स्पेस साइबरकैफे’ भी कहा जा रहा है, जहां उपयोगकर्ता सिर्फ $2 प्रति मिनट में प्रोसेसर का समय किराए पर ले सकेंगे।
इस मिशन में दुनिया के विभिन्न देशों के उपग्रह भी शामिल थे, जिनमें नेपाल, ब्राजील और स्पेन के उपग्रह प्रमुख हैं। यह मिशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती स्पेस कैपेबिलिटी का प्रतीक बन चुका है, जो अब केवल एक लॉन्च पैड के रूप में नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय स्पेस लॉन्च हब के रूप में उभर रहा है।
ISRO की यह सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जो भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पल के रूप में दर्ज हो गया है।
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