Ujjain News: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल का धाम अब पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और पारदर्शिता के लिए यहाँ ऑनलाइन भुगतान और क्यूआर कोड तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू किया गया है। अब परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को जगह-जगह क्यूआर कोड दिखाई देते हैं, जिन्हें स्कैन करके सीधे डिजिटल माध्यम से दान दिया जा सकता है। इसके अलावा, भस्म आरती, संध्या आरती और ₹250 का वीआईपी दर्शन शुल्क भी अब केवल ऑनलाइन ही स्वीकार किया जाता है। इस सुदृढ़ व्यवस्था के कारण वित्तीय वर्ष 2025 में मंदिर को रिकॉर्ड 168 करोड़ रुपए की आय प्राप्त हुई है।
भस्म आरती के नियमों में बड़ा बदलाव
इस डिजिटल क्रांति के बीच, महाकाल मंदिर प्रबंधन ने भस्म आरती की बुकिंग के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत, अब कोई भी श्रद्धालु एक मोबाइल नंबर से 3 महीने में सिर्फ एक बार ही भस्म आरती की बुकिंग कर सकेगा। मंदिर प्रशासक के अनुसार, यह कड़ा नियम आम भक्तों के साथ-साथ प्रोटोकॉल कोटे से आने वाले वीआईपी लोगों पर भी समान रूप से लागू होगा, ताकि सभी को दर्शन का उचित अवसर मिल सके।
ई-गवर्नेंस विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
हालांकि, इस नए नियम ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। ई-गवर्नेंस से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में एक ही व्यक्ति के पास कई मोबाइल नंबर हो सकते हैं, जिससे इस नियम का गलत फायदा उठाया जा सकता है। एक्सपर्ट्स ने प्रशासन पर सवाल उठाया है कि ब्लैक मार्केटिंग और हेरफेर को पूरी तरह रोकने के लिए मोबाइल नंबर के साथ किसी मजबूत सरकारी पहचान पत्र (जैसे आधार आदि) के वेरिफिकेशन को रजिस्ट्रेशन में अनिवार्य क्यों नहीं किया गया? बहरहाल, प्रतिदिन औसतन एक लाख और त्योहारों पर 5 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने के लिए महाकाल मंदिर का यह डिजिटल प्रबंधन एक बेहतरीन मिसाल बन गया है।
Read more:- Delhi-NCR Weather: दिल्ली-एनसीआर में अचानक आई तेज आंधी से थमी रफ्तार, मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट

