नागालैंड कांग्रेस ने विदेशी चंदे से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA) को किसी धार्मिक समुदाय, चर्च, NGO या नागरिक समाज संगठन के खिलाफ राजनीतिक या वैचारिक कार्रवाई का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। पार्टी ने साथ ही यह स्पष्ट किया कि विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र सरकार ने जून 2026 में FCRA के नियमों में बदलाव किए हैं और Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 संसद में विचाराधीन है। विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था।
नागालैंड कांग्रेस की मुख्य आपत्ति क्या है?
नागालैंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (NPCC) ने कहा कि राज्य में चर्च और ईसाई संगठनों ने लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास और जरूरतमंद लोगों के लिए मानवीय सेवाओं में भूमिका निभाई है। पार्टी का तर्क है कि ऐसे संगठनों की विदेशी फंडिंग की जांच कानून के तहत हो सकती है, लेकिन जांच की प्रक्रिया समान और पारदर्शी होनी चाहिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि किसी खास धार्मिक समुदाय या संस्था को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर संदेह की नजर से देखना उचित नहीं होगा। पार्टी ने कहा कि यदि सरकार का उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना है, तो नियम सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
यह आरोप कांग्रेस का राजनीतिक दावा है; इसे केंद्र सरकार की स्थापित नीति या मंशा के तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
FCRA में 2026 में क्या बदला?
FCRA भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले योगदान को नियंत्रित करने वाला केंद्रीय कानून है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य विदेशी धन के स्रोत और इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कानून की मौजूदा व्यवस्था की जड़ें 1976 के कानून में हैं, जबकि 2010 में इसे नए कानून के रूप में बदला गया।
जून में अधिसूचित नए नियमों के तहत FCRA पंजीकरण को पहले की तुलना में अधिक विशिष्ट बनाया गया है। संगठनों को अपने अनुमोदित उद्देश्यों और उन राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों की जानकारी देनी होगी जहां वे काम करेंगे। धार्मिक गतिविधियों की कई श्रेणियां नियमों में स्वीकार्य हैं, लेकिन कुछ धार्मिक श्रेणियों में proselytisation यानी धर्म-प्रचार/धर्मांतरण गतिविधियों को स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य संगठनों के काम, फंड के इस्तेमाल और उनके भौगोलिक दायरे को अधिक स्पष्ट बनाना है। सरकार ने यह भी कहा है कि नियम किसी एक धर्म को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं।
विवाद केवल धार्मिक संस्थानों तक सीमित नहीं
प्रस्तावित FCRA Amendment Bill का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन संस्थाओं की विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ा है जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है, समाप्त हो जाता है या जिसका नवीनीकरण नहीं होता।
PRS Legislative Research के अनुसार, विधेयक एक Designated Authority बनाने का प्रस्ताव करता है, जो ऐसी स्थिति में विदेशी योगदान से जुड़ी संपत्तियों की निगरानी, प्रबंधन और निपटान की प्रक्रिया संभालेगी। धार्मिक स्थल से जुड़ी संपत्ति के मामले में उसके धार्मिक चरित्र को बनाए रखने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
यही प्रावधान आलोचकों के लिए चिंता का एक बड़ा कारण है। उनका सवाल है कि किसी संस्था का FCRA लाइसेंस समाप्त होने के बाद उसकी संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण किस सीमा तक होना चाहिए और इस प्रक्रिया में पर्याप्त न्यायिक सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाएगी।
विधेयक में ऐसे आदेशों के खिलाफ न्यायिक अपील और संशोधन संबंधी प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य मौजूदा व्यवस्था में मौजूद प्रशासनिक कमियों को दूर करना है।
सरकार और आलोचकों के बीच मूल मतभेद
केंद्र सरकार FCRA को मुख्य रूप से विदेशी फंडिंग की निगरानी और जवाबदेही का कानून मानती है। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक पृष्ठभूमि सामग्री में कहा गया है कि विदेशी योगदान शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और निगरानी भी जरूरी है।
दूसरी ओर, आलोचकों की चिंता यह है कि अत्यधिक प्रशासनिक नियंत्रण से वैध NGOs और धार्मिक संस्थानों की नियमित गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। विशेष रूप से ईसाई संगठनों का कहना है कि सामाजिक सेवा और धार्मिक गतिविधियों के बीच अंतर स्पष्ट रखा जाना चाहिए।
इसलिए बहस केवल विदेशी धन के नियमन की नहीं है। असली सवाल यह है कि सरकार पारदर्शिता और राष्ट्रीय हित की निगरानी करते हुए नागरिक समाज और धार्मिक संस्थानों की वैध गतिविधियों के लिए कितनी स्वतंत्र जगह छोड़ती है।
संसद में आगे क्या होगा?
FCRA Amendment Bill, 2026 अभी संसद के विचाराधीन है। सरकार ने विधेयक को पारदर्शिता और विदेशी योगदान के बेहतर प्रबंधन से जोड़कर पेश किया है, जबकि विपक्ष और नागरिक समाज के कुछ हिस्से इसके व्यापक अधिकारों पर सवाल उठा रहे हैं।
नागालैंड कांग्रेस की आपत्ति इस बहस को पूर्वोत्तर के एक महत्वपूर्ण सामाजिक और धार्मिक संदर्भ में ले आती है। आगे की चर्चा में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधेयक के अंतिम स्वरूप में सरकारी निगरानी, संपत्तियों के प्रबंधन और संस्थाओं के न्यायिक अधिकारों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।
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