Indore Contaminated Water: इंदौर, 1 जनवरी 2026 : देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पेयजल ने बड़ा संकट पैदा कर दिया है। भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा पानी की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज से सीवर का गंदा पानी मिल गया, जिससे उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला जिससे अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक 5 महीने का बच्चा और बुजुर्ग शामिल हैं। 150 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 1100 से ज्यादा का इलाज हो चुका है।

मौतों का सिलसिला जारी
मंगलवार तक 8 मौतें हुई थीं, जिनमें नंदलाल पाल (75), उर्मिला यादव (69), उमा कोरी (31), मंजुला (74), सीमा प्रजापत (50), गोमती रावत (50) जैसे नाम शामिल हैं। बुधवार को 5 महीने के अव्यान साहू और एक बुजुर्ग की मौत ने इलाके में मातम फैला दिया। अव्यान की मां ने कहा, ‘बाहरी दूध में पानी मिलाकर पिलाया, लेकिन सरकार बच्चों की मौत क्यों छिपाती है?’ स्थानीय लोग कहते हैं कि मौतें दूषित पानी से ही हुई हैं, जबकि प्रशासन कुछ को प्राकृतिक बता रहा है।

सीएम मोहन यादव ने अस्पतालों का दौरा किया
मामले की गंभीरता देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम इंदौर पहुंचे। उन्होंने एमवाई अस्पताल और अन्य जगहों पर भर्ती मरीजों से मुलाकात की और हाल जाना। सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया और जांच कमेटी बनाई गई।
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हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने सरकार से 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट मांगते हुए सभी मरीजों का मुफ्त इलाज करने के निर्देश दिए। याचिका में दोषी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
मामले की गंभीरता देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम इंदौर पहुंचे। उन्होंने एमवाई अस्पताल और अन्य जगहों पर भर्ती मरीजों से मुलाकात की और हाल जाना। सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया और जांच कमेटी बनाई गई।

मंत्री विजयवर्गीय का बयान और मीडिया पर गुस्सा
वहीं नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि गंदे पानी का स्रोत मिल गया है और उसे ठीक किया जा रहा है। मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज होगा। 50 टैंकरों से नर्मदा का साफ पानी सप्लाई हो रहा है, एम्बुलेंस तैनात हैं और क्लोरीन बांटी गई है।
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हालांकि, मीडिया के सवालों पर मंत्री भड़क गए। जब निजी अस्पतालों के बिल और पानी की व्यवस्था पर सवाल हुआ तो उन्होंने कहा, ‘छोड़ो यार, फोकट के प्रश्न मत पूछो।’ इस पर विवाद हुआ और बाद में उन्होंने माफी मांगी।
राहत के उपाय और आगे की योजना
प्रशासन ने पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। लोग नलों का पानी नहीं पी रहे, टैंकरों पर निर्भर हैं। स्वास्थ्य टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि पानी उबालकर पीएं और साफ-सफाई रखें।
यह घटना इंदौर की स्वच्छता की छवि पर सवाल उठा रही है। उम्मीद है कि जल्द स्थिति नियंत्रण में आएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

