लखनऊ मॉडिफाइड साइलेंसर: लखनऊ की ट्रैफिक पुलिस ने अब शहर की सड़कों पर बाइकों द्वारा निर्मित ऊंची आवाज़ के खिलाफ़ एक अत्यंत कड़ा नीति अपना लिया है। जिन बाइकों में कंपनी द्वारा दिए गए मूल एक्साउस्ट निकाल कर उनकी जगह मॉडिफाई किए गए एक्साउस्ट लगाए गए हैं वे सामान्य बाइकों से ज़्यादा शोर करती हैं।मॉडिफिकेशन इस तरह किया जा सकता है ताकि बाइक का लुक बदला जा सके या बस इसलिए कि ज़्यादा शोर करने की लालसा है। इस तरह का मॉडिफिकेशन अब बाइक के मालिकों के लिए समस्या बन जाएगा।हाल ही में ट्रैफिक पुलिस ने शहर के महत्वपूर्ण चौराहों और मार्गों पर वाहनों की जांच की है।एसीपी ट्रैफिक रविना त्यागी के नेतृत्व में यह जांच दो पहिया वाहनों और यहां तक कि बुलेट बाइकों के एक्साउस्ट के लिए की जा रही है। कई जगहों पर डेसिबेल मीटर की मदद से शोर का स्तर मापा जा रहा है।
लेकिन इस अभियान की मांग केवल यातायात नियमों तक ही सीमित नहीं है। एक शोर मचाने वाली और तेज़ आवाज़ वाली बाइक का अचानक आना सड़कों पर यात्रा करने वाले दूसरों के लिए विचलित करने वाला होता है। ऐसे शोर अधिक प्रभावशाली होते हैं निवासी स्थानों, अस्पतालों, स्कूलों और भीड़भाड़ वाली जगहों में। यही कारण है कि यातायात पुलिस विभाग इसे शोर प्रदूषण और यातायात अनुशासन के दृष्टिकोण से देख रहा है।
हालिया गतिविधियों से पता चलता है कि अब पुलिस केवल उन लोगों को दंडित करने का इरादा नहीं रखती जो यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं बल्कि इन प्रकार के शोर रोधकों को वाहनों से हटाना भी चाहती है। कुछ मामलों में पुलिस ने ऐसे मैकेनिक्स के साथ काम किया है जो बाइक पर इन शोर रोधकों को उसी जगह से हटा सकते हैं।
इस बीच की जानकारी के अनुसार एक विशेष अभियान ने 865 वाहनों की जांच,140 जुर्माना टिकट,8 वाहनों को जब्त करने और 100 अवैध शांतिकारकों को पुलिस लाइन को सौंपने का नतीजा दिखाया है। 9 सितंबर को एक रिपोर्ट के अनुसार 1000 से ज्यादा वाहनों की जांच करते हुए 300 से ज्यादा प्रतिबंधित शांतिकारकों को जब्त किया गया है।
Action Plan: ट्रैफिक पुलिस कैसे कर रही है कार्रवाई?
लखनऊ ट्रैफिक पुलिस का अभियान अचानक की गई एक-दो दिन की कार्रवाई नहीं दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग स्थानों पर चेकिंग बढ़ाई गई है और विशेष रूप से ऐसे दोपहिया वाहनों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनसे असामान्य रूप से तेज आवाज निकलती है।
अभियान के दौरान पुलिस वाहनों को रोककर साइलेंसर की स्थिति देख रही है। जरूरत पड़ने पर आवाज की जांच भी की जा रही है। नियमों के विपरीत साइलेंसर मिलने पर चालान, साइलेंसर हटाने और गंभीर मामलों में वाहन सीज करने जैसी कार्रवाई की जा रही है।
अभियान में मुख्य तौर पर:
- मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइक की जांच
- तेज और कर्कश आवाज की पहचान
- डेसिबल मीटर से आवाज की जांच
- नियम तोड़ने वालों के चालान
- जरूरत पड़ने पर वाहन सीज करना
8 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 425 वाहनों की जांच में 61 चालान किए गए, दो वाहन सीज हुए और 55 बाइकों से मॉडिफाइड साइलेंसर उतरवाए गए।
इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में भी ऐसे वाहन पुलिस की निगरानी में रह सकते हैं। बाइक मालिकों के लिए बेहतर विकल्प यही है कि वे वाहन में कंपनी द्वारा निर्धारित और नियमों के अनुरूप साइलेंसर का इस्तेमाल करें।
Modified Silencer vs Standard Silencer: क्या फर्क है?
मॉडिफाइड साइलेंसर और वाहन के मूल या मानक साइलेंसर में सबसे बड़ा अंतर उनके डिजाइन और आवाज को नियंत्रित करने की क्षमता का है। Central Motor Vehicles Rules के Rule 120 में वाहन के साइलेंसर से निकलने वाले शोर को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने की बात कही गई है।
| तुलना | Standard Silencer | Modified Silencer |
|---|---|---|
| डिजाइन | निर्माता द्वारा निर्धारित | अक्सर बदला हुआ |
| आवाज | नियंत्रित | काफी तेज हो सकती है |
| नियमों से अनुरूपता | निर्धारित मानकों के अनुसार | बदलाव के आधार पर उल्लंघन हो सकता है |
| पुलिस जांच | सामान्य जांच | विशेष जांच का लक्ष्य |
| जोखिम | कम | चालान/अन्य कार्रवाई का जोखिम |
क्यों जरूरी है Noise Control?
बाइक की तेज आवाज को कई लोग सिर्फ style या performance से जोड़ते हैं, लेकिन सड़क पर इसका असर दूसरे लोगों पर भी पड़ता है। अचानक आने वाली तेज आवाज राहगीरों, दूसरे वाहन चालकों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। इसी वजह से ट्रैफिक पुलिस modified silencers को केवल बाइक modification के तौर पर नहीं, बल्कि noise pollution और traffic discipline के मुद्दे के रूप में देख रही है।
Central Motor Vehicles Rules के Rule 120 के अनुसार मोटर वाहन में ऐसा साइलेंसर होना चाहिए जो exhaust gases से होने वाले शोर को जहां तक व्यावहारिक हो कम करे। नियम वाहन को निर्धारित noise standards के अनुरूप बनाए रखने की बात भी करता है।
बाइक मालिकों को इसलिए सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि साइलेंसर उनकी बाइक पर फिट हो रहा है या नहीं। यह भी देखना जरूरी है कि उसका इस्तेमाल वाहन के लागू नियमों और निर्धारित noise standards के अनुरूप है या नहीं।
बाइक मालिकों के लिए जरूरी बातें:
- कंपनी वाला या मानक साइलेंसर इस्तेमाल करें।
- अत्यधिक तेज आवाज वाले exhaust से बचें।
- modification कराने से पहले नियमों की जानकारी लें।
- ट्रैफिक पुलिस की जांच में सहयोग करें।
Lucknow Traffic Police की कार्रवाई का असर क्या होगा?
लखनऊ में चल रहे अभियान से ऐसा लगता है की सिलेंसर में बदलाव करने वाले वाहन मालिकों को एक संदेश मिला है की अगर वे सौंदर्य या ध्वनि प्रभाव के लिए सिलेंसर में बदलाव करेंगे तो वे परेशानी में पड़ जाएंगे । हाल ही में कई अभियानों में कई वाहनों को पाया गया है और उनके सिलेंसर को बदलकर उनके जुर्माना किया गया है और सिलेंसर जब्त किए गए हैं।
इस अभियान का दूसरा पक्ष लोगों को इसके बारे में जागरूक करना है । यातायात पुलिस वाहन चालकों को शोर करने वाले सिलेंसर के कारण होने वाली परेशानी से दूर रहने के लिए शिक्षित कर रही है । यह अभियान केवल कार्रवाई करने के लिए नहीं है बल्कि लोगों को वाहन चलाते समय निर्धारित मानकों का पालन करने के बारे में भी जानकारी देने के लिए है ।
अगले दिनों अगर जांच अभियान जारी रहता है तो बाइक चालकों के लिए सबसे अच्छा दृष्टिकोण यह होगा की वे अपने वाहनों में कोई भी बदलाव करने से पहले पूर्व अनुमति ले और सड़क पर दूसरों का ध्यान भी रखें ।
निष्कर्ष: बाइक का Style रखें, लेकिन Rules के साथ
लखनऊ में मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस का अभियान अब लगातार सख्त होता दिखाई दे रहा है। हालिया कार्रवाई में सैकड़ों वाहनों की जांच, चालान, वाहन सीज करने और मॉडिफाइड साइलेंसर हटाने जैसी कार्रवाई सामने आई है।
बाइक में बदलाव कराने से पहले वाहन मालिकों को यह समझना जरूरी है कि हर modification सड़क पर इस्तेमाल के लिए वैध नहीं होता। खासकर ऐसा बदलाव जिससे वाहन निर्धारित noise standards का पालन न करे, वह ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई का कारण बन सकता है। Central Motor Vehicles Rules में साइलेंसर और vehicle noise को लेकर स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं।
इसलिए अगर आपकी बाइक में modified silencer लगा है, तो उसे हटाकर निर्धारित मानकों के अनुरूप साइलेंसर लगाना ज्यादा समझदारी होगी। इससे चालान या वाहन सीज होने की संभावना से बचने के साथ-साथ सड़क पर noise pollution कम करने में भी मदद मिलेगी।
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FAQs
लखनऊ में मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ अभियान क्यों चल रहा है?
तेज और कर्कश आवाज से होने वाले ध्वनि प्रदूषण तथा नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
क्या ट्रैफिक पुलिस साइलेंसर की आवाज जांच रही है?
हां। अभियान के दौरान कुछ स्थानों पर डेसिबल मीटर से आवाज की जांच की जा रही है।
क्या मॉडिफाइड साइलेंसर मिलने पर चालान हो सकता है?
हां, नियमों के विपरीत साइलेंसर पाए जाने पर चालान और परिस्थितियों के अनुसार अन्य कार्रवाई हो सकती है।
क्या बाइक का साइलेंसर बदलना हमेशा गैरकानूनी है?
हर replacement अपने-आप में गैरकानूनी नहीं माना जा सकता; लेकिन वाहन को लागू construction, equipment और noise standards का पालन करना होता है।
बाइक मालिकों को क्या करना चाहिए?
निर्माता द्वारा निर्धारित या लागू मानकों के अनुरूप साइलेंसर का इस्तेमाल करना और अनधिकृत modification से बचना बेहतर है।

