जियाउर्रहमान बर्क: साम्यवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों को लेकर प्रांतीय सरकार की कड़ी आलोचना की है।जियाउर्रहमान बर्क ने सरकार को मस्जिदों,मदरसों और दफनाने के स्थलों से जुड़े मामलों को ज़्यादा अहमियत देने का दोषी ठहराया है जबकि बेरोज़गारी,शिक्षा,स्वास्थ्य सेवा और मुद्रास्फीति जैसे आम नागरिकों से जुड़े अन्य मूलभूत मामलों को नज़रअंदाज़ कर रही है।
मुरादाबाद में मस्जिदों के सर्वेक्षण और आदेशों के संबंध में सांसद ने सरकार के कामकाज की आलोचना की है।बर्क ने कहा कि सरकार को युवाओं को रोज़गार देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए,बच्चों को शिक्षित करना चाहिए,गरीबों को सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए,स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करना चाहिए और मुद्रास्फीति दर को नियंत्रित करना चाहिए।
मस्जिद-मदरसा के मुद्दे पर जियाउर्रहमान बर्क ने क्या कहा?
जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि सरकार का कथित “वन पॉइंट प्रोग्राम” मस्जिद, मदरसा और कब्रिस्तान तक सीमित दिखाई देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों पर कार्रवाई करने से आम जनता को रोजगार, बेहतर शिक्षा या स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं किस तरह मिलेंगी।
सांसद के मुताबिक सरकार को ऐसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए जिनका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। उन्होंने युवाओं के रोजगार, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और महंगाई को लेकर सरकार से अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करने की मांग की।
Saharanpur Mosque Case पर बर्क का बयान
सहारनपुर में एक पुरानी मस्जिद को गिराए जाने के मामले का जिक्र करते हुए जियाउर्रहमान बर्क ने नाराजगी जताई। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद करीब 119 साल पुरानी थी और उससे जुड़े दस्तावेज भी मौजूद थे। सांसद ने सवाल किया कि अधिकारी कब से न्यायपालिका की भूमिका निभाने लगे।
बुर्के के अनुसार कुछ लोग धार्मिक संस्थानों के बारे में शिकायत कर रहे थे केवल इसलिए कि पुलिस और प्रशासन बहुत जल्दी वहां पहुंच गया था बुर्के यह तर्क दे रहे थे की चाहे जो भी हुआ हो लेकिन उसे संविधान और कानूनों के दायरे में ही कार्यवाही करनी चाहिए।
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संभल और मुरादाबाद के नोटिस पर भी सवाल
संभल और मुरादाबाद में धार्मिक स्थलों को लेकर जारी नोटिस के सवाल पर भी सांसद ने अपनी नाराजगी जाहिर की। जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि अधिकारियों को संविधान और कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी अधिकारी द्वारा लिया गया कोई भी कार्य अवैध पाया जाता है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी। बर्क ने ऐसे मामलों को अदालतों में मजबूती से ले जाने का अपना विचार व्यक्त किया और उन्होंने न्याय पाने तक अपना अभियान जारी रखने का संकल्प जताया।
जब 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सहारा,मुरादाबाद, सहारनपुर और मेरठ में धार्मिक स्थलों के मामलों को लेकर सवाल उठे तो बर्क ने फिर से सरकार से उनकी प्राथमिकताओं के बारे में पूछा।
उन्होंने कहा कि अगर किसी मस्जिद को विकास का नाम पर ध्वस्त किया जाता है तो इसके साथ ही यह भी बताना चाहिए कि इस कार्रवाई से कितने लोगों को रोजगार मिलेगा कितने स्कूल या कॉलेज स्थापित होंगे और कितने अस्पताल बनेंगे। बर्क के अनुसार सरकार को ऐसी कार्रवाई से आम आदमी को होने वाले फायदे के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
रोजगार और शिक्षा पर सरकार को घेरा
जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि प्रदेश के युवाओं के सामने रोजगार एक बड़ा मुद्दा है। उन्होंने सरकार से रोजगार के अवसर बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की।
उसने कहा कि बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा,युवाओं के लिए रोज़गार,गरीबों के लिए सुविधाएँ और लोगों के लिए स्वस्थ सेवाएँ विकास प्रक्रिया के मुख्य घटक हैं। बर्क इस बात को लेकर महसूस करते हैं कि ऐसे मुद्दों पर अधिक बहस और प्रयासों की ज़रूरत है। इसके अलावा उन्होंने धार्मिक पूजा स्थलों से जुड़े किए गए कार्यों के बारे में अपनी असहमति जताई और कहा कि वह ऐसे कार्यों की निंदा करते हैं। बर्क का मानना है कि कई धर्मनिरपेक्ष लोग और मुसलमान ऐसे घटनाक्रमों से नाखुश हैं।
निष्कर्ष
संभल से SP सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने मस्जिद, मदरसा और धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान धार्मिक विवादों पर ज्यादा है, जबकि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे मुद्दों पर पर्याप्त फोकस नहीं किया जा रहा।
बर्क ने सहारनपुर की पुरानी मस्जिद, संभल और मुरादाबाद से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को संविधान और कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए और किसी भी विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी कार्रवाई को लेकर कानूनी विवाद होता है तो वह न्यायालय का रुख करेंगे। अब जियाउर्रहमान बर्क के इन बयानों पर प्रदेश सरकार या संबंधित प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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