नई दिल्ली। गणपति उत्सव को लेकर राजधानी दिल्ली में तैयारियां जोरों पर हैं। जगह-जगह भगवान गणेश की मूर्तियों की बिक्री शुरू हो गई है और श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। दिल्ली के प्रसिद्ध मदनगीर मार्केट में भी गणपति बप्पा की एक से बढ़कर एक भव्य और आकर्षक मूर्तियां सजकर तैयार हैं। अलग-अलग रंगों और आकारों में तैयार की गई गणपति की मूर्तियां लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं।
मदनगीर मार्केट में मूर्तियों की दुकानें गणपति बप्पा की प्रतिमाओं से सजी हुई हैं। बाजार में आने वाले श्रद्धालु अपनी पसंद और घर में उपलब्ध स्थान के अनुसार भगवान गणेश की मूर्तियां खरीद रहे हैं। मूर्तिकारों ने भी इस बार अलग-अलग डिजाइन और आकार की मूर्तियां तैयार की हैं, ताकि ग्राहकों को अधिक विकल्प मिल सकें।
मिट्टी से बनी गणपति की मूर्तियां लोगों की पहली पसंद
मदनगीर मार्केट के मूर्तिकारों के मुताबिक, इस बार लोग पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से बनी गणपति की मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि वे कई वर्षों से मूर्ति बनाने और बेचने के काम से जुड़े हुए हैं और मुख्य रूप से ईको-फ्रेंडली मूर्तियां तैयार करते हैं।
मिट्टी से बनी मूर्तियों को लेकर लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है। श्रद्धालु ऐसी मूर्तियां खरीदना पसंद कर रहे हैं, जिनका विसर्जन करने के बाद पर्यावरण पर कम प्रभाव पड़े। मूर्तिकारों का कहना है कि मिट्टी की मूर्तियां पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प मानी जाती हैं।
अलग-अलग राज्यों से भी आती हैं गणपति की मूर्तियां
मदनगीर मार्केट में केवल स्थानीय स्तर पर तैयार की गई मूर्तियां ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से भी गणपति बप्पा की प्रतिमाएं बिक्री के लिए पहुंचती हैं। इनमें अलग-अलग आकार, डिजाइन और सजावट वाली मूर्तियां शामिल हैं।
बाजार में छोटी मूर्तियों से लेकर बड़ी और भव्य प्रतिमाएं तक उपलब्ध हैं। कई मूर्तियों को आकर्षक रंगों और पारंपरिक सजावट के साथ तैयार किया गया है। श्रद्धालु बाजार में पहुंचकर मूर्तियों को देखते हैं और अपनी पसंद के अनुसार गणपति बप्पा की प्रतिमा खरीद रहे हैं।
बारिश से मूर्तिकारों की बढ़ी परेशानी
हाल के दिनों में हुई बारिश ने मूर्तिकारों और दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। बारिश से मूर्तियों को बचाने के लिए उन्हें तिरपाल और पन्नियों से ढककर रखना पड़ रहा है। मिट्टी से बनी मूर्तियों को नमी और बारिश से बचाना जरूरी होता है, इसलिए दुकानदार लगातार उनकी सुरक्षा में जुटे हुए हैं।
मूर्तिकारों का कहना है कि बारिश के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है और पिछले साल की तुलना में बिक्री में कुछ कमी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का बाजार में आना जारी है और लोग अपनी पसंद की गणपति प्रतिमाएं खरीद रहे हैं।
बिक्री में कमी के बावजूद उत्साह बरकरार
मूर्तिकारों के अनुसार, इस बार बिक्री में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन गणपति उत्सव को लेकर लोगों के उत्साह में कमी नहीं आई है। बाजार में आने वाले ग्राहक मूर्तियों की डिजाइन और कारीगरी की तारीफ भी कर रहे हैं।
मूर्तिकारों का कहना है कि कई दिनों और हफ्तों की मेहनत के बाद जब उनकी बनाई हुई मूर्तियां लोगों को पसंद आती हैं तो उन्हें खुशी होती है। उनके लिए ग्राहकों की ओर से मूर्तियों की तारीफ उनकी मेहनत का सबसे बड़ा इनाम है।
14 सितंबर को होगा गणपति बप्पा का आगमन
अब श्रद्धालुओं को 14 सितंबर का बेसब्री से इंतजार है। गणपति उत्सव के दौरान घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। ढोल-नगाड़ों और भक्तिमय माहौल के बीच श्रद्धालु गणपति बप्पा का स्वागत करेंगे।
मदनगीर मार्केट में भी गणपति उत्सव से पहले खरीदारी को लेकर रौनक बढ़ने की उम्मीद है। श्रद्धालु अपनी पसंद की मूर्तियां खरीदकर घर ले जाने की तैयारी में हैं। ईको-फ्रेंडली मूर्तियों की ओर लोगों का बढ़ता रुझान इस बार बाजार की खास बात बनकर सामने आ रहा है।
निष्कर्ष
मदनगीर मार्केट में गणपति बप्पा की भव्य मूर्तियों की खरीदारी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दे रहा है। बाजार में अलग-अलग आकार और डिजाइन की प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। मूर्तिकारों के मुताबिक, लोग पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से बनी ईको-फ्रेंडली मूर्तियों को अधिक पसंद कर रहे हैं। बारिश के कारण मूर्तियों को सुरक्षित रखने में दुकानदारों को परेशानी जरूर हो रही है और बिक्री में कुछ कमी की बात कही जा रही है, लेकिन गणपति उत्सव को लेकर बाजार में उत्साह बना हुआ है।
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FAQs
1. मदनगीर मार्केट में गणपति की मूर्तियां क्यों चर्चा में हैं?
मदनगीर मार्केट में गणपति बप्पा की अलग-अलग आकार और डिजाइन वाली भव्य मूर्तियां बिक्री के लिए सजाई गई हैं।
2. लोग किस तरह की गणपति मूर्तियां ज्यादा पसंद कर रहे हैं?
मूर्तिकारों के अनुसार, पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए लोग मिट्टी से बनी ईको-फ्रेंडली मूर्तियों को पसंद कर रहे हैं।
3. बारिश का मूर्तियों की बिक्री पर क्या असर पड़ा है?
बारिश के कारण मूर्तियों को तिरपाल और पन्नियों से ढककर रखना पड़ रहा है। दुकानदारों के अनुसार, बिक्री में कुछ कमी भी आई है।
4. मदनगीर मार्केट में मूर्तियां कहां-कहां से आती हैं?
मूर्तिकारों के अनुसार, स्थानीय स्तर के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से भी गणपति की मूर्तियां बिक्री के लिए आती हैं।
5. गणपति बप्पा का आगमन कब होगा?
दिए गए विवरण के अनुसार, श्रद्धालुओं को 14 सितंबर को गणपति बप्पा के आगमन का इंतजार है।

