नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026 — सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर पर की गई 2022 की टिप्पणियों से जुड़े आपराधिक मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने शुक्रवार को शिकायत और ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन रद्द कर दिए। फैसला मामले में आवश्यक सरकारी मंजूरी के अभाव के आधार पर दिया गया।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नाग की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित अपराध में अदालत द्वारा संज्ञान लेने के लिए जिस मंजूरी की जरूरत थी, उसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
फैसले का आधार राहुल गांधी की टिप्पणी सही थी या गलत, यह तय करना नहीं था। अदालत ने प्रक्रिया से जुड़ी कानूनी कमी के कारण आपराधिक कार्यवाही को समाप्त किया।
मामला 2022 की भारत जोड़ो यात्रा से जुड़ा था
विवाद की शुरुआत 17 नवंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला जिले में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी की एक टिप्पणी से हुई थी। शिकायतकर्ता अधिवक्ता नरेंद्र पांडेय ने आरोप लगाया था कि गांधी ने सावरकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया। शिकायत में उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153A और 505 समेत अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।
पांडेय का आरोप था कि टिप्पणी जानबूझकर की गई थी और इसका उद्देश्य समाज में वैमनस्य पैदा करना तथा सावरकर की छवि को नुकसान पहुंचाना था। ये शिकायतकर्ता के आरोप थे, जिनका सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के आदेश में गुण-दोष के आधार पर अंतिम निर्धारण नहीं किया गया।
निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला
शिकायत को जून 2023 में शुरुआती स्तर पर खारिज कर दिया गया था। शिकायतकर्ता की पुनरीक्षण याचिका के बाद मामला फिर सक्रिय हुआ और लखनऊ की अदालत ने दिसंबर 2024 में राहुल गांधी को समन जारी किया।
राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में समन को चुनौती दी, लेकिन 4 अप्रैल 2025 को हाई कोर्ट ने उनकी याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा था कि उनके पास सत्र अदालत में आपराधिक पुनरीक्षण का वैकल्पिक रास्ता मौजूद है।
इसके बाद गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अप्रैल 2025 में शीर्ष अदालत ने कार्यवाही पर रोक लगाते हुए मामले में नोटिस जारी किया था। जुलाई 2025 में भी सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत जारी रखी और शिकायतकर्ता को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले टिप्पणी पर जताई थी नाराजगी
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की सावरकर संबंधी टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं से स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में टिप्पणी करते समय सावधानी बरतने को कहा था।
उस समय अदालत ने टिप्पणी को “गैर-जिम्मेदाराना” बताया था और आगे ऐसी टिप्पणी दोहराए जाने पर स्वतः संज्ञान लेने की चेतावनी भी दी थी। साथ ही, अदालत ने लंबित आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
यह पहलू शुक्रवार के फैसले को समझने के लिए महत्वपूर्ण है: अदालत की पिछली मौखिक टिप्पणियों के बावजूद अंतिम राहत कानूनी प्रक्रिया में आवश्यक मंजूरी के अभाव के आधार पर दी गई।
फैसले का कानूनी महत्व क्या है?
मामले में जिस धारा के तहत कार्यवाही आगे बढ़ाई जा रही थी, उसके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 196 के तहत राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक थी। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में ऐसी मंजूरी का कोई खुलासा नहीं था। इसी आधार पर शिकायत और मजिस्ट्रेट के आदेशों को रद्द कर दिया गया।
इसका अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने सावरकर पर राहुल गांधी के ऐतिहासिक दावों को सही ठहरा दिया है। अदालत का फैसला मुख्य रूप से इस सवाल पर था कि संबंधित आपराधिक कार्यवाही कानूनी रूप से आवश्यक मंजूरी के बिना शुरू की जा सकती थी या नहीं।
Sources Used :
PTI/ThePrint रिपोर्ट — 14 अगस्त 2026 के सुप्रीम कोर्ट फैसले और मामले के तथ्य।
LiveLaw रिपोर्ट — शिकायत रद्द होने और आवश्यक सरकारी मंजूरी के कानूनी आधार के लिए।
राजनीतिक विवाद खत्म होने की संभावना नहीं
कानूनी कार्यवाही खत्म होने के बावजूद सावरकर को लेकर राहुल गांधी और उनके राजनीतिक विरोधियों के बीच वैचारिक विवाद बना रहने की संभावना है। सावरकर भारतीय राजनीति में एक अत्यंत विवादित ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं और उनके योगदान, विचारधारा तथा स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।
शुक्रवार का फैसला इस व्यापक राजनीतिक बहस पर कोई न्यायिक फैसला नहीं है। यह केवल उस विशेष आपराधिक शिकायत में कार्यवाही की वैधता से जुड़ा निर्णय है।
राहुल गांधी के लिए तत्काल प्रभाव स्पष्ट है: इस मामले में लखनऊ की निचली अदालत द्वारा जारी समन और उसके आधार पर चल रही आपराधिक कार्यवाही अब कायम नहीं रहती।
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