Uttarakhand Cyber Awareness – उत्तराखंड में 1.75 लाख छात्रों को साइबर सुरक्षा का पाठ देहरादून। डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर उत्तराखंड पुलिस ने स्कूली छात्रों को जागरूक करने की पहल शुरू की है। गुरुवार को आयोजित राज्यव्यापी वर्चुअल साइबर जागरूकता कार्यक्रम में प्रदेश के 1100 से अधिक राजकीय स्कूलों के करीब 1.75 लाख छात्र-छात्राएं जुड़े। पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर साइबर अपराध, सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सही उपयोग से जुड़े जरूरी टिप्स दिए। कार्यक्रम राजकीय नवोदय विद्यालय तपोवन और नालापानी स्थित आईसीटी वर्चुअल क्लासरूम स्टूडियो से आयोजित किया गया। डीजीपी ने छात्रों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि साइबर अपराधों से बचाव केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। बच्चों और युवाओं को भी डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूक और सतर्क रहना होगा।
मोबाइल फोन और इंटरनेट अब स्कूली बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ऑनलाइन क्लास से लेकर project तैयार करने, दोस्तों से बातचीत करने और सोशल मीडिया चलाने तक, छात्र हर दिन कई digital platforms का इस्तेमाल कर रहे हैं। इंटरनेट ने उनके लिए सीखने के नए रास्ते जरूर खोले हैं, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, निजी जानकारी की चोरी और cyberbullying जैसी परेशानियां भी बढ़ी हैं। कई बार बच्चे किसी लुभावने offer, free reward या अनजान link पर भरोसा कर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा कर देते हैं। बाद में यही छोटी-सी लापरवाही उनके और परिवार के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। इसी को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने प्रदेश के स्कूली विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है। गुरुवार को आयोजित राज्यव्यापी वर्चुअल साइबर जागरूकता कार्यक्रम में 1100 से अधिक राजकीय स्कूलों के करीब 1.75 लाख छात्र-छात्राएं जुड़े। कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उनके सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने आसान भाषा में बताया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का सही और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई। यह कार्यक्रम राजकीय नवोदय विद्यालय तपोवन और नालापानी स्थित ICT Virtual Classroom Studio से संचालित किया गया। डीजीपी ने छात्रों से कहा कि साइबर अपराध रोकना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति को अपनी digital safety को लेकर सतर्क रहना होगा। खासकर बच्चों और युवाओं को यह समझना जरूरी है कि ऑनलाइन दुनिया में हर profile, message, video या offer असली नहीं होता। समय रहते सही जानकारी मिल जाए तो छात्र न केवल खुद को, बल्कि अपने परिवार और दोस्तों को भी साइबर अपराधों से बचाने में मदद कर सकते हैं। https://cybercrime.gov.in.
Uttarakhand Cyber Awareness Program में क्या बताया गया?
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया के खतरों को पहचानने और समझदारी के साथ इंटरनेट इस्तेमाल करने योग्य बनाना था। छात्रों को बताया गया कि किसी भी संदिग्ध संदेश, लिंक, कॉल या सोशल मीडिया अकाउंट पर बिना जांच किए भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है।
- अनजान लिंक और फाइल पर क्लिक न करें।
- OTP, password और बैंक विवरण किसी को न बताएं।
- सोशल मीडिया अकाउंट पर strong password लगाएं।
- निजी फोटो और location सार्वजनिक रूप से शेयर न करें।
- संदिग्ध activity की जानकारी तुरंत अभिभावक या शिक्षक को दें।
Why स्कूली बच्चों के लिए Cyber Safety जरूरी है?
बच्चे पढ़ाई के साथ gaming apps, social media और video platforms पर भी काफी समय बिताते हैं। साइबर अपराधी अक्सर free gift, gaming reward, scholarship या online contest का लालच देकर उन्हें निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। अनुभव कम होने के कारण बच्चे कई बार असली और फर्जी message के बीच अंतर नहीं कर पाते।
एक बड़ी समस्या यह भी है कि बच्चे सोशल मीडिया पर अपनी फोटो, स्कूल का नाम, मोबाइल नंबर या location जैसी जानकारी आसानी से साझा कर देते हैं। इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए Cyber Safety की जानकारी केवल computer subject तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्कूल और घर, दोनों जगह बच्चों से इस विषय पर खुलकर बातचीत होना जरूरी है।
- अनजान friend request स्वीकार करने से पहले profile जांचें।
- कोई ऐप डाउनलोड करते समय उसकी permissions पढ़ें।
- Cyberbullying होने पर चुप रहने के बजाय शिकायत करें।
- सार्वजनिक Wi-Fi पर जरूरी account login करने से बचें।
- AI से मिली जानकारी को बिना जांचे सही न मानें।
Safe और Unsafe Digital Habits में क्या अंतर है?
छात्रों को सुरक्षित रखने के लिए केवल खतरे बताना पर्याप्त नहीं है। उन्हें रोजमर्रा की गलत और सही digital habits के बीच अंतर भी समझाना जरूरी है। नीचे दी गई तुलना सामान्य ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
| Digital Activity | Unsafe Habit | Safe Habit |
|---|---|---|
| Password बनाना | नाम या जन्मतिथि रखना | मजबूत और अलग password बनाना |
| Social Media | हर request स्वीकार करना | पहचान verify करने के बाद स्वीकार करना |
| Online Link | बिना जांच क्लिक करना | Sender और URL की जांच करना |
| AI का इस्तेमाल | हर जानकारी को सही मानना | Facts को reliable source से verify करना |
| Personal Data | Location और नंबर सार्वजनिक रखना | Privacy settings का उपयोग करना |
AI और Social Media का सही इस्तेमाल कैसे करें?
AI tools पढ़ाई, भाषा सीखने, ideas खोजने और projects तैयार करने में छात्रों की मदद कर सकते हैं। हालांकि AI से मिलने वाला हर जवाब पूरी तरह सही हो, यह जरूरी नहीं है। किसी महत्वपूर्ण जानकारी का इस्तेमाल करने से पहले उसे शिक्षक, किताब या विश्वसनीय वेबसाइट से जरूर जांचना चाहिए। छात्रों को AI platforms पर अपना मोबाइल नंबर, password, पहचान पत्र या निजी फोटो upload करने से भी बचना चाहिए।
Social media पर किसी अनजान व्यक्ति से बात करते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति निजी फोटो मांगे, धमकी दे या पैसे भेजने का दबाव बनाए तो बातचीत आगे नहीं बढ़ानी चाहिए। संबंधित account को block करने के साथ screenshots सुरक्षित रखने चाहिए और तुरंत परिवार, शिक्षक या पुलिस को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
- Deepfake फोटो या वीडियो को जांचे बिना आगे न भेजें।
- AI का इस्तेमाल सीखने के लिए करें, नकल के लिए नहीं।
- Social media accounts पर two-factor authentication लगाएं।
- परेशान करने वाले account को तुरंत block और report करें।
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FAQs:Uttarakhand Cyber Awareness
1. उत्तराखंड साइबर जागरूकता कार्यक्रम में कितने छात्र जुड़े?
कार्यक्रम में प्रदेश के करीब 1.75 लाख छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
2. कार्यक्रम से कितने सरकारी स्कूल जुड़े थे?
उत्तराखंड के 1100 से अधिक राजकीय स्कूल इस वर्चुअल कार्यक्रम से जुड़े।
3. विद्यार्थियों से किसने संवाद किया?
पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने विद्यार्थियों से सीधे बातचीत की और उनके सवालों के जवाब दिए।
4. कार्यक्रम कहां से आयोजित किया गया?
यह कार्यक्रम राजकीय नवोदय विद्यालय तपोवन और नालापानी स्थित ICT Virtual Classroom Studio से आयोजित हुआ।
5. छात्रों को ऑनलाइन सुरक्षित रहने के लिए क्या करना चाहिए?
उन्हें मजबूत password इस्तेमाल करना चाहिए, निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए और संदिग्ध links एवं profiles से सावधान रहना चाहिए।

