उत्तराखंड में अगर किसी संवेदनशील ग्लेशियर झील का प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाए, तो कुछ ही समय में बड़ी मात्रा में पानी downstream नदी घाटी की ओर जा सकता है। इसे Glacial Lake Outburst Flood यानी GLOF कहा जाता है। ऐसी बाढ़ केवल पानी तक सीमित नहीं रहती; इसके साथ मलबा, पत्थर और sediment भी बह सकते हैं, जिससे नदी किनारे के infrastructure और बस्तियों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
उत्तराखंड इस जोखिम के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में glacial lakes मौजूद हैं। Indian Institute of Remote Sensing के Uttarakhand Glacial Lake Atlas के अनुसार, satellite observations में राज्य के छह उत्तरी जिलों—उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर—में ग्लेशियर झीलों की पहचान की गई है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इन सभी जिलों को एक समान GLOF खतरा है।
असल जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सी झील अस्थिर है, उसका पानी किस नदी घाटी में जाएगा और downstream इलाके कितनी जल्दी और कितनी मात्रा में flood wave के संपर्क में आएंगे।
GLOF क्या होता है?
GLOF यानी Glacial Lake Outburst Flood वह अचानक आने वाली बाढ़ है जो किसी प्राकृतिक रूप से बनी ग्लेशियर झील का पानी तेजी से बाहर निकलने पर आती है।
ऐसी झीलों के किनारे अक्सर बर्फ, चट्टानों और moraine यानी हिमनदीय मलबे से बने प्राकृतिक बांध होते हैं।
अगर यह बांध कमजोर हो जाए या अचानक टूट जाए, तो झील का पानी नीचे की ओर तेजी से बह सकता है।
C-DAC के अनुसार, glacial lake outburst कई कारणों से trigger हो सकता है, जिनमें ice या rock avalanche, moraine dam का कमजोर होना, piping, earthquake और भारी बारिश से झील में अचानक पानी बढ़ना शामिल हैं। कुछ मामलों में यह केवल flood नहीं बल्कि debris flow के रूप में भी सामने आ सकता है।
उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलें कहां हैं?
उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी हिस्सों में ग्लेशियर झीलें कई नदी घाटियों से जुड़ी हैं।
IIRS के atlas में विशेष रूप से छह उत्तरी जिलों में glacial lakes का distribution दर्ज किया गया है:
- चमोली
- उत्तरकाशी
- पिथौरागढ़
- रुद्रप्रयाग
- टिहरी गढ़वाल
- बागेश्वर
IIRS के प्रकाशित atlas में 2015 के high-resolution satellite observations के आधार पर लगभग 1,353 glacial lakes की पहचान की गई थी, जिनका क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से अधिक था। इनमें चमोली में सबसे अधिक झीलें दर्ज की गई थीं।
ध्यान देने वाली बात है कि यह lake inventory है, खतरे की ranking नहीं।
हर ग्लेशियर झील के फटने की संभावना या downstream impact समान नहीं होता।
उत्तराखंड में ग्लेशियर झील फटने पर क्या होगा?

अगर किसी बड़ी या संवेदनशील glacial lake का natural dam fail होता है, तो सबसे पहले झील का पानी अचानक downstream की ओर बढ़ेगा।
इससे एक flood wave बन सकती है।
स्थिति के आधार पर इसमें शामिल हो सकते हैं:
- तेज बहता पानी
- बर्फ के टुकड़े
- पत्थर
- sediment
- debris
- पेड़ और अन्य सामग्री
यही कारण है कि GLOF सामान्य नदी बाढ़ से अलग हो सकता है।
CWC के अनुसार, glacial lake के natural dam के टूटने से पैदा होने वाला high-peak discharge downstream नदी के लंबे हिस्से में catastrophic effects पैदा कर सकता है।
किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है?
सबसे अधिक जोखिम सामान्यतः उस झील की downstream river valley को होता है, जिससे flood wave सीधे नीचे की ओर बढ़ती है।
इसलिए पूरे उत्तराखंड को एक साथ “GLOF affected” कहना सही नहीं होगा।
Risk को तीन स्तरों में समझा जा सकता है।
1. झील के तुरंत नीचे का क्षेत्र
यह सबसे संवेदनशील zone हो सकता है।
अगर natural moraine या ice dam अचानक fail होता है, तो शुरुआती flood wave बहुत तेज हो सकती है।
यहां नदी किनारे:
- सड़कें
- पुल
- छोटे settlement
- hydropower infrastructure
- trekking routes
- camps
- अन्य structures
विशेष रूप से vulnerable हो सकते हैं।
2. Downstream नदी घाटी
Flood wave नीचे जाते हुए नदी की मुख्य धारा का अनुसरण कर सकती है।
इस दौरान नदी की चौड़ाई, slope और terrain floodwater की depth तथा velocity को बदलते हैं।
3. नीचे के मैदानी या विस्तृत नदी क्षेत्र
जैसे-जैसे flood wave नीचे जाती है, river valley का आकार बदलता है।
कहीं पानी तेजी से channel में रह सकता है और कहीं floodplain में फैल सकता है।
इसलिए केवल “झील से कितने किलोमीटर दूर” होना risk तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
चमोली में GLOF Risk क्यों महत्वपूर्ण है?
चमोली उत्तराखंड के उन जिलों में है जहां glacial lakes की संख्या उल्लेखनीय है।
IIRS atlas के अनुसार 2015 satellite observations में चमोली में लगभग 713 glacial lakes दर्ज की गई थीं, जो राज्य में inventory किए गए lakes में सबसे अधिक थीं।
चमोली की भौगोलिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिले में कई ऊंची हिमालयी नदी घाटियां हैं।
अलकनंदा और उसकी tributary systems के कारण किसी upstream glacial hazard का downstream impact river corridor के साथ आगे बढ़ सकता है।
हालांकि, 713 lakes का मतलब 713 high-risk lakes नहीं है।
Risk assessment के लिए lake size, location, dam characteristics, water volume, surrounding slopes और downstream exposure जैसे factors अलग से देखने पड़ते हैं।
उत्तरकाशी में GLOF का खतरा क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तरकाशी भी राज्य के प्रमुख glacial-lake districts में शामिल है।
IIRS inventory में यहां 412 glacial lakes दर्ज की गई थीं।
यह क्षेत्र भागीरथी और उससे जुड़े Himalayan drainage systems के कारण disaster-risk planning में महत्वपूर्ण है।
किसी संभावित GLOF का असर मुख्य रूप से उस specific lake की downstream river corridor पर निर्भर करेगा।
इसलिए उत्तरकाशी के लिए भी “पूरा जिला प्रभावित होगा” जैसी भाषा सही नहीं है।
पिथौरागढ़ में GLOF से क्या खतरा हो सकता है?
पिथौरागढ़ पूर्वी उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में स्थित है और राज्य की glacial-lake inventory में शामिल है।
यहां GLOF risk को समझने में काली नदी और उसकी tributary systems महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
लेकिन किसी specific lake से floodwater किस settlement तक पहुंच सकता है, इसका जवाब केवल जिले का नाम देखकर नहीं दिया जा सकता।
इसके लिए lake-specific flood modelling जरूरी है।
क्या रुद्रप्रयाग और बागेश्वर भी प्रभावित हो सकते हैं?
हां, ये दोनों जिले भी Uttarakhand glacial-lake inventory में शामिल हैं।
रुद्रप्रयाग में अलकनंदा-मंदाकिनी river system का महत्व है, जबकि बागेश्वर में हिमालयी tributary systems downstream flood risk को प्रभावित कर सकते हैं।
लेकिन यहां भी एक महत्वपूर्ण distinction है:
जिले में glacial lake होना और जिले के किसी particular शहर या गांव का GLOF से प्रभावित होना दो अलग बातें हैं।
क्या GLOF ऋषिकेश या हरिद्वार तक पहुंच सकता है?
यह सवाल सबसे ज्यादा search किया जा सकता है, लेकिन इसका जवाब scenario-specific है।
किसी upstream glacial lake से निकलने वाली flood wave नदी प्रणाली के साथ downstream जा सकती है।
लेकिन जैसे-जैसे वह नीचे आती है:
- flood wave फैलती है,
- peak discharge बदल सकता है,
- tributaries जुड़ती हैं,
- नदी का channel बदलता है,
- floodplain storage प्रभाव डालता है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि “उत्तराखंड की कोई भी GLOF सीधे ऋषिकेश या हरिद्वार को डुबा देगी।”
किसी specific lake के लिए अलग hydraulic/inundation modelling की जरूरत होगी।
ग्लेशियर झील अचानक क्यों फट सकती है?
GLOF के पीछे कई संभावित triggers हो सकते हैं।
Ice Avalanche
ग्लेशियर या आसपास की बर्फ/चट्टान का बड़ा हिस्सा झील में गिर सकता है।
इससे अचानक wave बन सकती है और natural dam पर दबाव बढ़ सकता है।
Moraine Dam Failure
झील का natural dam कमजोर होने पर उसमें breach बन सकता है।
Heavy Rainfall
अत्यधिक बारिश से lake में water level तेजी से बढ़ सकता है।
Landslide
पहाड़ का बड़ा हिस्सा झील में गिरने पर पानी विस्थापित हो सकता है।
Earthquake
भूकंप से moraine dam या आसपास की slope instability बढ़ सकती है।
इन triggers का उल्लेख सरकारी GLOF technical material में भी किया गया है।
क्या Climate Change से GLOF का खतरा बढ़ रहा है?
Climate change और glacier retreat glacial-lake formation तथा evolution को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन हर नई या बड़ी झील को automatically high-risk GLOF lake नहीं माना जा सकता।
Glaciers के पीछे हटने से कुछ परिस्थितियों में नए lakes विकसित हो सकते हैं और existing lakes का आकार बदल सकता है।
C-DAC glacial lakes को glacier fluctuations और climatic changes से जुड़े landscape features के रूप में समझाता है।
इसीलिए केवल temperature rise देखना पर्याप्त नहीं है।
Scientists को lake का:
- आकार
- depth
- water volume
- dam composition
- surrounding slope
- glacier movement
- downstream exposure
भी देखना पड़ता है।
क्या हर ग्लेशियर झील फटने वाली होती है?
नहीं।
यह सबसे महत्वपूर्ण misconception में से एक है।
किसी पहाड़ पर glacial lake दिखाई देने का अर्थ यह नहीं कि वह जल्द ही टूटने वाली है।
Risk assessment में कई parameters देखे जाते हैं।
इसी वजह से भारत में glacial-lake inventories और satellite monitoring programmes चलाए जाते हैं।
NRSC का Glacial Lake Atlas संभावित critical lakes की पहचान और GLOF risk assessment में disaster-management authorities की मदद के लिए तैयार किया गया है।
उत्तराखंड में GLOF की निगरानी कैसे की जा रही है?
भारत सरकार ने GLOF risk को लेकर monitoring और mitigation को institutional level पर बढ़ाया है।
फरवरी 2025 में केंद्र सरकार ने National Glacial Lake Outburst Flood Risk Mitigation Project को चार राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड—के लिए मंजूरी दी।
इस project में Uttarakhand के लिए ₹30 करोड़ का कुल outlay और ₹27 करोड़ का central share निर्धारित किया गया। इसके components में hazard and risk assessment, monitoring and early warning, mitigation measures और awareness/capacity building शामिल हैं।
इसका मतलब यह है कि GLOF को केवल theoretical Himalayan hazard नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके लिए dedicated risk-reduction programme भी विकसित किया जा रहा है।
उत्तराखंड में Early Warning System क्यों महत्वपूर्ण है?
GLOF में सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक है समय पर warning।
अगर upstream lake में असामान्य बदलाव detect हो जाए और downstream communities को समय रहते सूचना मिल जाए, तो evacuation और emergency response के लिए precious time मिल सकता है।
Uttarakhand State Disaster Management Authority ने 2026 में automated weather stations, Doppler radars, GIS-based emergency resource mapping और local emergency operation centres को मजबूत करने की जानकारी दी है।
यह wider disaster-warning network है; किसी particular glacial lake की warning का मतलब lake-specific monitoring से अलग हो सकता है।
अगर GLOF आता है तो किन चीजों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है?
GLOF में केवल घरों को खतरा नहीं होता।
Downstream flood wave इन चीजों को प्रभावित कर सकती है:
- पुल
- सड़कें
- hydropower projects
- नदी किनारे के गांव
- बिजली infrastructure
- पानी की supply infrastructure
- trekking routes
- tourism facilities
- agricultural land
- communication networks
पहाड़ी इलाकों में समस्या और गंभीर हो सकती है क्योंकि कई महत्वपूर्ण roads और settlements संकरी river valleys के आसपास विकसित हुए हैं।
GLOF और सामान्य Flash Flood में क्या अंतर है?
दोनों अचानक और खतरनाक हो सकते हैं, लेकिन कारण अलग हो सकता है।
Flash Flood:
आमतौर पर अत्यधिक बारिश, cloudburst या अचानक runoff से पैदा हो सकती है।
GLOF:
Glacial lake से अचानक पानी निकलने के कारण होती है।
कई बार GLOF के साथ debris और sediment भी बहता है, जिससे उसका destructive potential बढ़ सकता है।
अगर आप GLOF की basic science और इसके formation को अलग से समझना चाहते हैं, तो HNN24x7 की detailed guide Glacial Lake Outburst Flood क्या है? पढ़ सकते हैं।
अगर ग्लेशियर झील फटने की चेतावनी मिले तो क्या करें?
अगर प्रशासन या disaster-management authority किसी वास्तविक GLOF warning या evacuation order की घोषणा करती है, तो तुरंत official instructions follow करें।
क्या करें?
- नदी और नालों से दूर जाएं।
- ऊंचे और सुरक्षित स्थान की ओर जाएं।
- evacuation order को ignore न करें।
- official alerts और local administration की जानकारी देखें।
- जरूरी documents और medicines साथ रखें।
- बच्चों और बुजुर्गों को पहले सुरक्षित स्थान पर ले जाएं।
- पुल पार करने या flood देखने के लिए नदी की ओर न जाएं।
क्या न करें?
- Viral WhatsApp message को official warning न मानें।
- Floodwater में वाहन चलाने की कोशिश न करें।
- नदी किनारे खड़े होकर video न बनाएं।
- बिना पुष्टि के “फलां शहर डूबने वाला है” जैसी अफवाह न फैलाएं।
क्या उत्तराखंड में GLOF का मतलब पूरे राज्य में बाढ़ है?
नहीं।
GLOF आमतौर पर एक specific glacial lake और उसके downstream drainage system से शुरू होता है।
इसलिए इसका impact geography-dependent होता है।
एक lake की flood wave का रास्ता दूसरी lake से अलग हो सकता है।
इसीलिए GLOF उत्तराखंड को statewide flood event की तरह नहीं बल्कि lake-specific और river-basin-specific hazard की तरह समझना ज्यादा सही है।
सबसे ज्यादा जोखिम किसे हो सकता है?
सामान्य रूप से सबसे vulnerable वे स्थान हो सकते हैं जो:
- किसी संभावित hazardous glacial lake के downstream हों,
- नदी के बहुत करीब बसे हों,
- संकरी घाटी में स्थित हों,
- bridges या roads जैसे critical infrastructure पर निर्भर हों,
- evacuation routes सीमित हों।
यानी केवल lake से दूरी नहीं, बल्कि elevation + river path + terrain + infrastructure + population exposure मिलकर वास्तविक risk तय करते हैं।
उत्तराखंड में GLOF Risk को लेकर सबसे जरूरी बात
उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की बड़ी संख्या होना अपने आप में किसी आसन्न आपदा का संकेत नहीं है।
IIRS और अन्य सरकारी संस्थाएं satellite-based inventories और monitoring के माध्यम से glacial lakes की स्थिति को समझने का प्रयास कर रही हैं।
साथ ही, केंद्र और राज्य स्तर पर GLOF risk assessment तथा early-warning infrastructure को मजबूत किया जा रहा है।
इसलिए सबसे सही approach है:
Risk को समझें, लेकिन बिना official warning के panic न करें।
FAQ
उत्तराखंड में ग्लेशियर झील फटने पर क्या होगा?
ग्लेशियर झील का natural dam टूटने पर बड़ी मात्रा में पानी अचानक downstream नदी घाटी की ओर जा सकता है। इससे तेज flood wave और debris flow बन सकता है।
GLOF क्या होता है?
GLOF यानी Glacial Lake Outburst Flood वह बाढ़ है जो किसी naturally dammed glacial lake का पानी अचानक बाहर निकलने से पैदा होती है।
उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलें कहां हैं?
IIRS के atlas के अनुसार उत्तराखंड में glacial lakes मुख्य रूप से उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जैसे उत्तरी जिलों में दर्ज की गई हैं।
GLOF उत्तराखंड में किन इलाकों को प्रभावित कर सकता है?
मुख्य जोखिम उस specific glacial lake के downstream river corridor में होता है। वास्तविक प्रभावित क्षेत्र lake-specific flood modelling से निर्धारित किया जाता है।
क्या चमोली में GLOF का खतरा ज्यादा है?
चमोली में glacial lakes की संख्या inventory में सबसे अधिक दर्ज की गई थी, लेकिन lakes की संख्या को सीधे high-risk lakes की संख्या नहीं माना जा सकता। प्रत्येक lake का अलग risk assessment जरूरी है।
क्या GLOF ऋषिकेश या हरिद्वार तक पहुंच सकता है?
यह specific lake, river basin और flood-wave modelling पर निर्भर करता है। बिना lake-specific hydraulic model के यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि किसी GLOF का पानी इन शहरों तक पहुंचेगा।
क्या Climate Change से GLOF का खतरा बढ़ता है?
Glacier retreat और changing climate conditions glacial lakes के निर्माण और आकार को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन हर glacial lake को automatically high-risk नहीं माना जा सकता।
क्या उत्तराखंड में GLOF की monitoring होती है?
हां। भारत में satellite-based glacial-lake inventories, monitoring और GLOF risk-reduction programmes चलाए जा रहे हैं। 2025 में उत्तराखंड National GLOF Risk Mitigation Project में शामिल किया गया था।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में ग्लेशियर झील फटने पर क्या होगा? इसका सबसे सीधा जवाब है—अगर किसी संवेदनशील glacial lake का natural dam अचानक fail होता है, तो तेज flood wave downstream नदी घाटी में पहुंच सकती है और उसके साथ पानी, मलबा और sediment भी बह सकता है।
राज्य के चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और बागेश्वर जैसे उत्तरी जिलों में glacial lakes की पहचान की गई है।
लेकिन इनमें से हर क्षेत्र का risk समान नहीं है।
सबसे ज्यादा असर उस specific lake की downstream river corridor पर पड़ने की संभावना होती है, और वास्तविक flood extent का पता lake-specific hazard modelling और inundation maps से ही लगाया जा सकता है।
इसीलिए “कौन सा शहर डूबेगा?” से ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल है:
कौन-सी झील high-risk है, उसका flood path क्या है और downstream communities को कितनी जल्दी warning मिल सकती है?
यही कारण है कि Uttarakhand में GLOF monitoring, early-warning systems, satellite observation और community preparedness को लगातार मजबूत करना महत्वपूर्ण है।

