Bihar Assembly Elections 2025 : बिहार में एनडीए की बड़ी जीत हुई है। नीतीश कुमार एक बार फिर जनता की पहली पसंद बने। महागठबंधन और जनसुराज पार्टी असफल रहीं। आइए जानते हैं इस जीत के बड़े कारण क्या है।
नीतीश का नेतृत्व बना सबसे बड़ा मुद्दा
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार और उनके नेतृत्व की हुई। नीतीश 2000 से बिहार की सियासत में हैं। वे नौ बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 2020 के बाद तीन बार शपथ ली। अब दसवीं बार की तैयारी है। सवाल था – क्या नीतीश सत्ता विरोधी लहर रोक पाएंगे? बता दें कि जदयू ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा। बीजेपी ने नीतीश को सीएम चेहरा बताया। इससे जनता का भरोसा बढ़ गया।

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रिकॉर्ड मतदान और जदयू का वोट बढ़ना
- बिहार में दो चरणों में वोटिंग हुई।
- पहला चरण: 6 नवंबर, 121 सीटें, 65.08% वोट।
- दूसरा चरण: 122 सीटें, 69.20% वोट।
- कुल 67.13% मतदान – बिहार के इतिहास में सबसे ज्यादा।
ज्यादा वोटिंग सत्ता पक्ष के पक्ष में गई। बता दें कि जदयू को पिछले चुनाव में 15.39% वोट मिले थे और इस बार 18% से ज्यादा थे । तीन फीसदी का फायदा। सीटें भी 30 से ज्यादा बढ़ीं। जिसके कारण जदयू राजद से आगे निकल गई।
महिलाओं को नीतीश का तोहफा
बिहार में नीतीश की जीत का एक राज महिलाएं हैं। साइकिल योजना से लेकर महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये तक – सबका फायदा जदयू को मिला। चुनाव से पहले डेढ़ करोड़ महिलाओं को पैसे भेजे। ये गेमचेंजर साबित हुआ। वोटिंग में महिलाएं आगे रहीं।
- पहला चरण: महिलाएं पुरुषों से 7.48% ज्यादा।
- दूसरा चरण: 10.15% ज्यादा।
- 37 जिलों में महिलाओं का वोट प्रतिशत ऊंचा।
- किशनगंज में 88.57% महिलाओं ने वोट डाला।
एनडीए की मजबूत रणनीति और महागठबंधन की गलतियां
एनडीए ने सीट शेयरिंग में जल्दी की। बीजेपी और जदयू ने 101-101 सीटें लड़ीं। इसमें कोई मतभेद नहीं नजर नहीं आया। वहीं महागठबंधन में देरी हुई। कई सीटों पर अपने उम्मीदवार आमने-सामने उतार दिए। तेजस्वी को सीएम, मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम बनाया। लेकिन इसमें मुस्लिम-दलित चेहरा नहीं था । जिसको एनडीए ने मुद्दा बनाया। डबल इंजन सरकार का नारा चला। मोदी और नीतीश की जोड़ी मजबूत की। चिराग पासवान ने भी साथ दिया। जंगलराज की वापसी नहीं – यह संदेश जनता तक पहुंचा। जिसका चुनाव परिणाम में साफ नजर आ रहा हैं। राजद ने लालू-राबड़ी की फोटो तक नहीं लगाई। सिर्फ तेजस्वी पर फोकस रहा।

तेजस्वी और प्रशांत किशोर का असर नहीं
तेजस्वी यादव राजद का नया चेहरा हैं। उपमुख्यमंत्री रह चुके। नौकरियां उनका बड़ा मुद्दा रहा। ‘तेजस्वी का प्रण’ चला, लेकिन वोट नहीं बदला। प्रशांत किशोर की जनसुराज पहली बार मैदान में थे। जिन्होंने बुनियादी मुद्दे उठाए। लेकिन दोनों असफल रहे।
इस जीत के बड़े मायने
नीतीश की जीत बिहार में स्थिरता की जीत है। सुशासन पर मुहर लगी है। महिलाओं का NDA पर भरोसा कायम रहा है। नीतीश दसवीं बार सीएम बनेंगे।

