Ahmedabad Airport: सोने की तस्करी के नए-नए और अजीबो-गरीब तरीके अक्सर सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ाते रहते हैं। लेकिन इस बार तस्करों ने चालाकी की सारी हदें पार कर दीं। दुबई से अहमदाबाद आए एक विमान के टॉयलेट में लगे साधारण से दिखने वाले स्पीकर बॉक्स से कस्टम विभाग ने करीब 4.3 करोड़ रुपये का सोना बरामद किया है। बाहर से बेहद सामान्य दिखने वाला यह स्पीकर अचानक जांच एजेंसियों के लिए करोड़ों के काले राज का जरिया बन गया।
टॉयलेट के स्पीकर बॉक्स में छिपा था खजाना
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, तस्करों ने इस बार सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए किसी बैग, सीट या यात्री के कपड़ों का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय, सोने को विमान के अगले हिस्से में स्थित टॉयलेट (फ्रंट लैवेटरी) के स्पीकर बॉक्स के अंदर बेहद शातिर तरीके से छिपाया गया था। विमान के तकनीकी हिस्से में इस तरह सोना छिपाए जाने के बाद अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या इस रैकेट में कोई बड़ा और संगठित नेटवर्क शामिल है? क्योंकि किसी भी आम यात्री के लिए विमान के ऐसे हिस्सों तक पहुंचना मुमकिन नहीं माना जाता।
रम्मेजिंग ऑपरेशन के दौरान खुला राज
कस्टम विभाग के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई 12 जून को दुबई से अहमदाबाद पहुंचे एक विमान में की गई। कस्टम अधिकारी जब नियमित रम्मेजिंग (सघन तलाशी) अभियान चला रहे थे, तभी उन्हें फ्रंट टॉयलेट के स्पीकर बॉक्स को देखकर कुछ शक हुआ। इसके बाद तुरंत एयरक्राफ्ट इंजीनियरों की मदद ली गई और जब स्पीकर बॉक्स को खोला गया, तो अधिकारी भी दंग रह गए। बॉक्स के भीतर काले प्लास्टिक टेप से लिपटे दो संदिग्ध पैकेट मिले।
जब इन पैकेट्स को खोला गया, तो उनके अंदर से विदेशी मूल के 24 चमचमाते गोल्ड बिस्किट बरामद हुए। जांच में सामने आया कि ये सभी बिस्किट 24 कैरेट शुद्धता के हैं, जिनका कुल वजन 2,799.3 ग्राम (लगभग 2.8 किलोग्राम) है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत तकरीबन ₹4.3 करोड़ आंकी गई है।
सोना घोषित हुआ ‘अनक्लेम्ड’
कस्टम अधिकारियों का कहना है कि जिस सुनियोजित ढंग से सोने को कंसील (छिपाया) किया गया था, उससे साफ है कि इसे भारत में अवैध रूप से खपाने की बड़ी साजिश थी। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि बरामद किए गए इस भारी-भरकम सोने पर न तो किसी यात्री ने और न ही क्रू मेंबर ने अपना दावा जताया। इसके बाद कस्टम विभाग ने सीमा शुल्क अधिनियम (कस्टम एक्ट) 1962 के तहत इसे ‘लावारिस’ (अनक्लेम्ड) मानकर जब्त कर लिया।
अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि दुबई में यह सोना विमान के भीतर किसने प्लांट किया था और अहमदाबाद पहुंचने पर इसे बाहर निकालने की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई थी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद अब एयरपोर्ट और एयरक्राफ्ट के तकनीकी हिस्सों की सुरक्षा जांच को और ज्यादा कड़ा किया जा सकता है।
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