Mumbai Train Murder: मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन के फर्स्ट क्लास कोच में मंगलवार रात एक ऐसी खौफनाक वारदात हुई, जिसने पूरी मुंबई को झकझोर कर रख दिया है। जोगेश्वरी और मलाड स्टेशनों के बीच, महज़ बारिश का पानी अंदर आने और ट्रेन का दरवाज़ा बंद करने को लेकर हुए मामूली विवाद में एक 22 वर्षीय बेगुनाह नौजवान, मयंक लोहार की चाकू घोंपकर बेरहमी से हत्या कर दी गई।
गंभीरता को देखते हुए रेलवे पुलिस की 7 टीमों ने मुस्तैदी दिखाई और 400 से अधिक CCTV कैमरों को खंगालने के बाद महज़ 24 घंटे के भीतर आरोपी रोशन सुवर्णा (30) को नवी मुंबई के पनवेल से गिरफ्तार कर लिया।
कैसे हुई आरोपी की पहचान
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी रोशन सुवर्णा बोरीवली स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 पर चलती ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था। पुलिस के पास उसकी कोई पहचान नहीं थी। बोरीवली रेलवे पुलिस (GRP) और क्राइम ब्रांच ने चर्चगेट से नालासोपारा तक के स्टेशनों पर सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
जांच के दौरान जब पुलिस ने लगभग 400 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली, तो एक फुटेज में आरोपी की टी-शर्ट पर उसकी कंपनी का ‘लोगो’ साफ दिखाई दे गया। पुलिस तुरंत अंधेरी एयरपोर्ट के पास स्थित उस कार्गो हैंडलिंग कंपनी में पहुंची, जहाँ से आरोपी की पहचान मीरा रोड (ईस्ट), ठाणे निवासी रोशन सुवर्णा के रूप में हुई। रोशन वहां बारकोड मेकर का काम करता था।
मीरा रोड से पनवेल तक फिल्मी अंदाज में पीछा
टेक्निकल सर्विलांस के जरिए पुलिस को पता चला कि रोशन वारदात के बाद सीधे मीरा रोड स्थित अपने घर गया, वहां कपड़े बदले और परिवार से जल्द लौटने की बात कहकर निकल गया। उसने पनवेल पहुंचकर अपने गृह राज्य मंगलूरु (कर्नाटक) भागने के लिए दोपहर 3 बजे की बस का टिकट भी लिया था। लेकिन, दोपहर ठीक 2 बजे पुलिस ने उसे पनवेल रेलवे स्टेशन से धर दबोचा।
बता दें कि पुलिस पूछताछ में सामने आया कि 23 जून की रात करीब 10:50 बजे रोशन ने ड्यूटी के बाद शराब पी रखी थी। भारी बारिश के कारण कैब न मिलने पर उसने अंधेरी से चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल पकड़ी। उसी डिब्बे में विरार निवासी मयंक लोहार भी था, जो अंधेरी की एक प्राइवेट कंपनी में सेल्समैन था और काम खत्म कर घर लौट रहा था।
तेज बारिश के कारण पानी डिब्बे के अंदर आ रहा था। मयंक ने रोशन से दरवाजा बंद करने को कहा, जिसपर दोनों में बहस हो गई। इस बीच डिब्बे के कुछ अन्य यात्रियों ने भी रोशन के साथ हाथापाई कर दी। शराब के नशे में धुत रोशन इसे अपना अपमान समझ बैठा और उसने गुस्से में अपने बैग से चाकू निकालकर मयंक के पेट और छाती पर ताबड़तोड़ 3-4 वार कर दिए। मयंक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
पुलिस के अनुसार, रोशन का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उसने यह चाकू कुछ दिन पहले अपने एक दोस्त से लिया था और तब से यह उसके बैग में ही था। पुलिस अब इसके पीछे की वजह तलाश रही है।
बहन का फूटा गुस्सा
इस घटना ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। मयंक अपने परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य था, जिसने कम उम्र में ही माता-पिता, भाई और छोटी बहन की ज़िम्मेदारी उठा ली थी। मयंक की मां का रो-रोकर बुरा हाल है, वह बिलखते हुए बस यही कह रही हैं, ‘मैंने अपना कमाने वाला बेटा खो दिया, हमारा सहारा चला गया।’ वहीं, पिता रमेश लोहार ने आंसू रोकते हुए प्रशासन से हत्यारे को सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा देने की मांग की है।
इस घटना ने मुंबईकरों की संवेदनशीलता पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। घटना के समय फर्स्ट क्लास कोच में करीब 30 यात्री मौजूद थे। मयंक की छोटी बहन ने गुस्से में पूछा- ‘जब मेरे भाई को बार-बार चाकू मारा जा रहा था, तब डिब्बे में मौजूद बाकी लोग क्या कर रहे थे? उसे बचाने के लिए एक भी इंसान आगे क्यों नहीं आया?’
बोरीवली रेलवे पुलिस ने आरोपी रोशन सुवर्णा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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