ऑपरेशन सिंदूर की गुप्त कार्रवाई से जुड़ी खबर, जिसमें पाकिस्तान के झंडे से ढके ताबूतों और ‘चिट मत खोलना, कमांडर को देना’ संदेश के जरिए मिशन की गोपनीयता को दर्शाया गया है।

‘चिट मत खोलना, कमांडर को देना’: ऑपरेशन सिंदूर की रात की अंदरूनी कहानी

भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सामने आई नई जानकारियां बताती हैं कि 7 मई 2025 की तड़के हुई सैन्य कार्रवाई की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ हथियार और लक्ष्य नहीं, बल्कि अभूतपूर्व गोपनीयता और समयबद्ध समन्वय भी था। ऑपरेशन से जुड़े वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, हमले की सटीक तारीख और समय को आखिरी क्षण तक सीमित लोगों के बीच रखा गया था।

15 अगस्त 2026 को प्रसारित Discovery की दो-भाग वाली डॉक्यूमेंट्री ‘Declassified: Operation Sindoor’ में तत्कालीन सैन्य नेतृत्व और ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों ने इस मिशन की तैयारी और उसके क्रियान्वयन से जुड़े कई अनुभव साझा किए। इनमें तत्कालीन नॉर्दर्न कमांड के GOC-in-C लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा का वह विवरण भी शामिल है, जिसमें एक वरिष्ठ अधिकारी को सीलबंद चिट देकर उसे सीधे आर्मी कमांडर तक पहुंचाने की बात सामने आती है।

हमले का समय कुछ घंटे पहले ही तय हुआ

ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को करीब 1:05 बजे रात शुरू हुआ। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई से पहले लक्ष्य और समय को बेहद सीमित दायरे में रखा गया था।

तत्कालीन DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने डॉक्यूमेंट्री में बताया कि उन्हें 6 मई की सुबह यह स्पष्ट हुआ कि उसी रात लक्ष्य पर कार्रवाई की जानी है। उनके मुताबिक, 01:05 बजे का समय इसलिए चुना गया क्योंकि इससे आश्चर्य का तत्व अधिकतम बनाए रखने में मदद मिल सकती थी।

गोपनीयता का स्तर इतना ऊंचा था कि सैन्य ऑपरेशंस डायरेक्टरेट के भीतर भी अंतिम समय तक सीमित लोगों को ही पूरी जानकारी थी। घई के अनुसार, हमले की रात के बारे में एक समय पर सिर्फ उन्हें पता था कि अब कार्रवाई शुरू होने वाली है।

‘चिट’ वाला संदेश क्यों अहम था?

लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा के अनुसार, उन्हें फोन पर हमले की तारीख नहीं बताई गई थी। एक ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी को दिल्ली भेजा गया और उसके हाथ में चीफ की लिखी हुई एक चिट थी। निर्देश था कि वह चिट खोली न जाए और सीधे आर्मी कमांडर को दी जाए।

यह विवरण ऑपरेशन की उस रणनीति को सामने लाता है जिसमें जानकारी को जरूरत के मुताबिक छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया था। इसका उद्देश्य था कि किसी एक स्तर पर अनावश्यक जानकारी जमा न हो और कार्रवाई की भनक समय से पहले बाहर न जाए।

तीनों सेनाओं के शीर्ष अधिकारी अलग-अलग रास्तों से पहुंचे

ऑपरेशन से पहले सैन्य नेतृत्व की गतिविधियां भी सामान्य दिनचर्या जैसी दिखाई दें, इसका विशेष ध्यान रखा गया।

एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने बताया कि उन्होंने ऐसा माहौल बनाया कि लोगों को लगा कि वह दिल्ली से बाहर, बड़ौदा जा रहे हैं। उन्होंने विमान में उड़ान भरी, लेकिन वह बड़ौदा नहीं गया और बाद में वह वापस लौट आए। उनके अनुसार, किसी को पता नहीं था कि वह वापस आ चुके हैं।

तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने भी बताया कि उन्होंने परिवार को सिर्फ इतना कहा था कि उन्हें कुछ काम है और उनका इंतजार न किया जाए।

तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने आधी रात से पहले अपने ADC से निजी कार निकालने को कहा और ऐसे पिछले दरवाजे से निकले जिसका इस्तेमाल वह सामान्य तौर पर नहीं करते थे। पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान के अनुसार, तीनों सेनाओं के प्रमुख अलग-अलग रास्तों से संयुक्त ऑपरेशन रूम पहुंचे, जहां कार्रवाई को लाइव मॉनिटर किया जा रहा था।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुई थी तैयारी

ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ा था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारतीय सुरक्षा और सैन्य तंत्र में जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू हुई।

सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ और इसमें पाकिस्तान तथा पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ढांचे से जुड़े नौ ठिकानों को निशाना बनाया गया। सरकार ने इसे खुफिया जानकारी पर आधारित लक्षित कार्रवाई बताया था।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था और कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को लक्ष्य नहीं बनाया गया।

टारगेट की जानकारी पायलटों को भी अंतिम चरण में मिली

डॉक्यूमेंट्री में ऑपरेशन में शामिल एक महिला फाइटर पायलट के हवाले से बताया गया है कि उन्हें कार्रवाई वाले दिन दोपहर में कमांडिंग ऑफिसर और फ्लाइट कमांडर ने बुलाया। उसी समय उन्हें लक्ष्य और फॉर्मेशन के बारे में जानकारी दी गई तथा आगे की तैयारी शुरू करने को कहा गया।

इससे यह संकेत मिलता है कि गोपनीयता केवल शीर्ष सैन्य नेतृत्व तक सीमित नहीं थी, बल्कि मिशन के अलग-अलग स्तरों पर भी जानकारी को आवश्यकता के मुताबिक साझा किया गया।

ऑपरेशन से पहले वॉर रूम में बढ़ा तनाव

रात करीब 11:30 बजे तक तीनों सेनाओं के प्रमुख ऑपरेशन रूम में पहुंच चुके थे। वहां लाइव फीड और लक्ष्यों से जुड़ी जानकारी की निगरानी की जा रही थी।

राजीव घई ने डॉक्यूमेंट्री में उस समय की चिंता का जिक्र करते हुए बताया कि उनके मन में यह सवाल था कि अगर मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंची या निगरानी से जुड़ी तस्वीरों में कोई तकनीकी समस्या आई तो क्या होगा। लेकिन इसके बाद कार्रवाई योजना के मुताबिक आगे बढ़ी।

रात 1:05 बजे भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई शुरू की। सरकारी विवरण के अनुसार, यह अभियान खुफिया जानकारी और लक्षित योजना पर आधारित था।

ऑपरेशन सिंदूर की कहानी अब सार्वजनिक क्यों हो रही है?

ऑपरेशन के दौरान कई परिचालन विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए थे। अब ‘Declassified: Operation Sindoor’ जैसी डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से सैन्य नेतृत्व के व्यक्तिगत अनुभव सामने आ रहे हैं।

डॉक्यूमेंट्री में सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, ग्राउंड ऑपरेटिव्स, रक्षा विशेषज्ञों और पत्रकारों के अनुभव शामिल हैं। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का भी विस्तृत साक्षात्कार शामिल है।

इससे ऑपरेशन को केवल मिसाइल स्ट्राइक के रूप में देखने के बजाय उसकी प्लानिंग, गोपनीयता, संयुक्त सैन्य समन्वय और निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलता है।

Sources Used

ThePrint की Discovery डॉक्यूमेंट्री रिपोर्ट — ‘Declassified: Operation Sindoor’ के प्रसारण और डॉक्यूमेंट्री के स्वरूप के संदर्भ के लिए।

Aaj Tak की रिपोर्ट: ‘चीफ ने एक चिट दी…’ — डॉक्यूमेंट्री में सैन्य अधिकारियों के बयानों और 6–7 मई 2025 की घटनाओं के विवरण के लिए।

Press Information Bureau: Operation SINDOOR — Forging One Force — ऑपरेशन की आधिकारिक तारीख, उद्देश्य और नौ लक्ष्यों संबंधी जानकारी के लिए।

Akashvani की Operation Sindoor प्रेस ब्रीफिंग रिपोर्ट — 7 मई 2025 की कार्रवाई के समय और आधिकारिक ब्रीफिंग के विवरण के लिए।

आगे क्या देखना अहम होगा?

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े और विवरण सामने आने के साथ सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहेगा कि अलग-अलग सैन्य शाखाओं के बीच वास्तविक समय में सूचना का आदान-प्रदान कैसे हुआ, लक्ष्य चयन में किस तरह की खुफिया जानकारी इस्तेमाल की गई और अभियान के दौरान राजनीतिक तथा सैन्य नेतृत्व के बीच समन्वय किस तरह काम किया।

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और डॉक्यूमेंट्री में दिए गए सैन्य अधिकारियों के विवरण से इतना स्पष्ट है कि 7 मई की कार्रवाई से पहले अंतिम क्षण तक आश्चर्य और गोपनीयता बनाए रखना ऑपरेशन की योजना का अहम हिस्सा था।

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