Taliban Smartphone Ban: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने देश में एक और बेहद सख्त और हैरान करने वाला फैसला लागू किया है। तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा के आदेश के बाद अब अफगानिस्तान में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
नए आदेश के मुताबिक, अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी दफ्तर में स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया, तो उसका फोन मौके पर ही तोड़ दिया जाएगा। इसके साथ ही नियम तोड़ने वाले के खिलाफ कानूनी और शरिया के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें नौकरी से निकालने और कुछ प्रांतों में छह महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है।
अदालती आदेश के बाद कर्मचारियों ने बंद किए फोन
यह कड़ा आदेश तालिबान की सैन्य अदालतों और सुप्रीम कोर्ट के प्रतीक चिन्ह वाले एक आधिकारिक पत्र के जरिए जारी किया गया है। इसमें साफ कहा गया है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों से लेकर सामान्य कर्मचारियों और मुजाहिदीन तक, किसी को भी स्मार्टफोन रखने की अनुमति नहीं होगी। यह आदेश 17 जून से पूरे देश में प्रभावी हो गया है, जिसके बाद डर के मारे कर्मचारियों ने अपने स्मार्टफोन बंद करना शुरू कर दिया है।
सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें तालिबान अधिकारी इस आदेश को पढ़ते और नियमों का उल्लंघन करने वालों के मोबाइल फोन तोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस आदेश से केवल उन्हीं लोगों को छूट मिल सकती है, जिनके पास तालिबान के सुप्रीम लीडर की लिखित मंजूरी होगी।
काम ठप होने से कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
इस फैसले ने अफगानिस्तान के सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों की मुश्किलें बेहद बढ़ा दी हैं। आज के डिजिटल दौर में उनका ज्यादातर आधिकारिक काम व्हाट्सऐप, ईमेल और एआई (AI) टूल्स के जरिए होता था, जो अब पूरी तरह ठप हो गया है।
सुदूर इलाके बदख्शान के प्रांतीय सूचना विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि स्मार्टफोन के बिना रोजमर्रा का काम करना और सूचनाएं भेजना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। हालांकि, यह प्रतिबंध पूरे देश में एक समान तरीके से लागू नहीं है; कुछ इलाकों में यह सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित है, तो कुछ प्रांतों में इसका असर महिलाओं, छात्रों और डॉक्टरों पर भी देखने को मिल रहा है।
जानकारी लीक होने और विरोध प्रदर्शनों का डर
विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि स्मार्टफोन पर इस पूर्ण प्रतिबंध के पीछे तालिबान की कई बड़ी चिंताएं हैं। हाल ही में हेरात शहर में महिलाओं और लड़कियों की गिरफ्तारी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जिससे तालिबान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
इसके अलावा, तालिबान को यह भी डर है कि सरकारी अधिकारी मोबाइल फोन के जरिए गोपनीय दस्तावेज और बैठकों की महत्वपूर्ण जानकारियां आधिकारिक घोषणा से पहले ही लीक कर रहे हैं। साथ ही, तालिबान का यह भी मानना है कि कर्मचारी दफ्तरों में काम करने के बजाय घंटों मोबाइल पर समय बर्बाद करते हैं, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है।
दुनिया से और कटेगा अफगानिस्तान
यह पहली बार नहीं है जब तालिबान ने तकनीक पर प्रहार किया है। इससे पहले पिछले साल सितंबर में भी ‘अनैतिक सामग्री रोकने’ के नाम पर पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं, जिसे बैंकिंग, हवाई और आपातकालीन सेवाएं ठप होने के बाद मजबूरी में बहाल करना पड़ा था।’
जानकारों का कहना है कि तालिबान फिलहाल इस फैसले पर जनता और कर्मचारियों की प्रतिक्रिया देख रहा है, और आने वाले समय में वह पूरे देश की आम जनता के लिए भी स्मार्टफोन बैन कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम अफगानिस्तान को आधुनिक दुनिया और तकनीक से पूरी तरह काट देगा और देश को और अधिक अलग-थलग कर देगा।
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