Uttarakhand Kranti Dal – उत्तराखंड की राजनीति में उत्तराखंड क्रांति दल यानी UKD एक बार फिर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। करीब दो दशक पहले 2007 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी जिस राजनीतिक जोश और सक्रियता के साथ नजर आई थी, उसी तरह अब फिर प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक UKD लगातार उत्तराखंड के सवालों को सामने रख रहा है। पार्टी की बढ़ती सक्रियता के बीच कई लोग संगठन से जुड़ रहे हैं और UKD अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
इसी बीच UKD के अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने पार्टी की पुरानी राजनीतिक भूमिका और आने वाले समय की रणनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने उन आरोपों का जवाब दिया जिनमें कहा जाता रहा है कि UKD के विधायक एक समय भाजपा की “गोद में बैठ गए थे।” कुकरेती ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उस समय परिस्थितियां अलग थीं।
उनके मुताबिक 2007 के बाद UKD ने भाजपा को बिना किसी राजनीतिक कारण के समर्थन नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता भुवन चंद्र खंडूरी और भगत सिंह कोश्यारी के निमंत्रण पर UKD ने भाजपा को समर्थन देने का निर्णय लिया था। कुकरेती का कहना है कि इसे UKD के भाजपा के साथ चले जाने के रूप में देखना सही नहीं है।
अब पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उत्तराखंड की राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। UKD अब किसी दूसरे राजनीतिक दल को सरकार बनाने में मदद करने वाली भूमिका में खुद को नहीं देख रहा, बल्कि खुद सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का दावा कर रहा है।
सुरेंद्र कुकरेती ने अपने बयान में कहा कि अब परिस्थितियां पहले जैसी नहीं हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में दूसरे राजनीतिक दल UKD की तरफ आएंगे। उनका यह बयान साफ तौर पर दिखाता है कि पार्टी अब अपनी राजनीतिक भूमिका को बड़ा करने और उत्तराखंड में एक मजबूत regional option के तौर पर खुद को पेश करने की कोशिश कर रही है।
Uttarakhand Kranti Dal फिर क्यों दिख रहा Active?

पिछले कुछ समय से UKD सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीन पर भी प्रदेश से जुड़े मुद्दों को उठाता दिखाई दे रहा है। पार्टी नेतृत्व इसे संगठन के लिए सकारात्मक संकेत मान रहा है। UKD का दावा है कि उसकी सक्रियता के कारण नए लोग पार्टी से जुड़ रहे हैं।
- सोशल मीडिया पर UKD की सक्रियता बढ़ी है।
- प्रदेश के मुद्दों को लेकर पार्टी सड़क पर भी आवाज उठा रही है।
- नए लोगों के पार्टी से जुड़ने का दावा किया जा रहा है।
- संगठन अपनी regional political identity मजबूत करने में जुटा है।
- पार्टी नेतृत्व भविष्य को लेकर confident दिखाई दे रहा है।
2007 में BJP को Support करने पर Surendra Kukreti ने क्या कहा?
UKD को लेकर लंबे समय से यह राजनीतिक आरोप लगाया जाता रहा है कि उसके विधायक एक समय भाजपा के साथ चले गए थे। इसी मुद्दे पर सुरेंद्र कुकरेती ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।
कुकरेती ने कहा कि उस दौर में UKD ने भाजपा के सामने समर्पण नहीं किया था। उनके मुताबिक भाजपा के वरिष्ठ नेताओं भुवन चंद्र खंडूरी और भगत सिंह कोश्यारी की ओर से UKD को साथ आने और समर्थन देने के लिए कहा गया था। इसके बाद पार्टी ने उस समय भाजपा को समर्थन दिया।
उनका कहना है कि उस फैसले को आज के राजनीतिक हालात से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। कुकरेती के मुताबिक उस समय की परिस्थितियां अलग थीं, जबकि वर्तमान में UKD की रणनीति और लक्ष्य दोनों बदल चुके हैं।
अब पार्टी नेतृत्व का कहना है कि UKD किसी दूसरे दल की सरकार को सहारा देने के बजाय खुद राजनीतिक रूप से मजबूत होकर सत्ता की ओर बढ़ना चाहता है।
- UKD ने 2007 के राजनीतिक घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा।
- कुकरेती ने भाजपा की “गोद में बैठने” वाले आरोप को खारिज किया।
- खंडूरी और कोश्यारी के निमंत्रण का जिक्र किया।
- वर्तमान परिस्थितियों को 2007 से अलग बताया।
- अब खुद सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का दावा किया।
UKD 2007 Vs वर्तमान Politics: क्या बदली है सोच?
सुरेंद्र कुकरेती के बयान के मुताबिक UKD की मौजूदा रणनीति पुराने राजनीतिक दौर से अलग है। जहां पहले पार्टी ने दूसरी सरकार को समर्थन दिया था, वहीं अब नेतृत्व खुद सत्ता की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रहा है।
| मुद्दा | 2007 की स्थिति | वर्तमान UKD का रुख |
|---|---|---|
| राजनीतिक भूमिका | भाजपा को समर्थन | खुद मजबूत विकल्प बनने का दावा |
| BJP के साथ संबंध | समर्थन दिया गया | वर्तमान परिस्थितियां अलग |
| Party Strategy | दूसरी सरकार को समर्थन | खुद सरकार बनाने की दिशा |
| Leadership Message | सहयोग की राजनीति | स्वतंत्र राजनीतिक मजबूती |
| मौजूदा Focus | — | सोशल मीडिया से सड़क तक सक्रियता |
“अब दूसरे दल UKD की गोद में बैठेंगे” बयान के क्या मायने?
सुरेंद्र कुकरेती का सबसे चर्चा वाला बयान यही है कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और आने वाले समय में दूसरे राजनीतिक दल UKD की तरफ आएंगे। इसे पार्टी के बढ़े हुए राजनीतिक confidence के तौर पर देखा जा सकता है।
उनका कहना है कि UKD अब उस स्थिति में नहीं रहना चाहता जहां वह किसी दूसरे दल को सत्ता तक पहुंचाने में मदद करे। पार्टी नेतृत्व अब संगठन को इस स्तर तक मजबूत करने की बात कर रहा है जहां UKD खुद सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच सके।
हालांकि यह फिलहाल पार्टी नेतृत्व का राजनीतिक दावा है। इसका वास्तविक असर आने वाले समय में संगठन की सक्रियता, जनता के समर्थन और चुनावी प्रदर्शन से ही सामने आएगा।
- UKD खुद को मजबूत political option के रूप में पेश कर रहा है।
- पार्टी leadership का confidence बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है।
- दूसरे दलों पर निर्भर रहने की बजाय स्वतंत्र भूमिका पर जोर है।
- अंतिम राजनीतिक तस्वीर चुनावी समर्थन से स्पष्ट होगी।
Uttarakhand Kranti Dal की वापसी कितनी मजबूत होगी?
उत्तराखंड क्रांति दल की मौजूदा सक्रियता यह संकेत दे रही है कि पार्टी प्रदेश की राजनीति में अपनी जगह दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक प्रदेश के मुद्दों को उठाने और नए लोगों को संगठन से जोड़ने की कोशिश इसी strategy का हिस्सा दिखाई देती है।
सुरेंद्र कुकरेती ने 2007 में BJP को दिए गए समर्थन को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों का जवाब देते हुए साफ कहा है कि उस समय का फैसला तत्कालीन परिस्थितियों में लिया गया था। उनके मुताबिक अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात UKD नेतृत्व का खुद सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का दावा है। यह बयान पार्टी की बढ़ती राजनीतिक ambition को जरूर दिखाता है, लेकिन इसका वास्तविक असर आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और जनता के समर्थन से तय होगा।
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https://ourukd.in/present-team
https://timesofindia.indiatimes.com/india/ukd-to-support-bjp-in-uttarakhand/articleshow/1719924.cms
FAQs :Uttarakhand Kranti Dal
1. Uttarakhand Kranti Dal के अध्यक्ष कौन हैं?
दिए गए source information के अनुसार सुरेंद्र कुकरेती UKD के अध्यक्ष हैं।
2. UKD पर BJP को support करने का आरोप क्यों लगता है?
2007 के राजनीतिक घटनाक्रम में UKD ने भाजपा को समर्थन दिया था, जिसको लेकर समय-समय पर पार्टी की आलोचना होती रही है।
3. Surendra Kukreti ने BJP support पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि BJP नेताओं भुवन चंद्र खंडूरी और भगत सिंह कोश्यारी के निमंत्रण पर उस समय UKD ने समर्थन दिया था।
4. UKD अब क्या दावा कर रहा है?
पार्टी नेतृत्व का दावा है कि UKD अब खुद सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
5. क्या UKD की सक्रियता बढ़ी है?
आपके दिए source के अनुसार पार्टी सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक प्रदेश के मुद्दों पर सक्रिय है और नए लोग संगठन से जुड़ रहे हैं

