Lucknow Fire Tragedy

Lucknow Fire Tragedy: अवैध कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और सुरक्षा चूक ने ली 15 लोगों की जान

Lucknow Fire Tragedy: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में ज्यादातर गर्मी की छुट्टियां मनाने और एनिमेशन की क्लास लेने आए छात्र शामिल थे। इस हादसे ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम की लापरवाही और मकान मालिकों के लालच को बेनकाब कर दिया है।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस बिल्डिंग में यह हादसा हुआ, वह कागजों में रेसिडेंशियल दर्ज थी। साल 2014 में नियमों को ताक पर रखकर इसे कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बदल दिया गया। हाउस टैक्स के रिकॉर्ड में आज भी यह रहने की जगह ही दिखाई गई है।

बिल्डिंग के मालिकों ने नियमों की खामियों का फायदा उठाया और कभी फायर डिपार्टमेंट से एनओसी लेने की जहमत नहीं उठाई। मौजूदा नियमों के अनुसार, 15 मीटर से कम ऊंची और 500 वर्ग मीटर से छोटे दायरे वाली बिल्डिंगों के लिए फायर एनओसी जरूरी नहीं थी, जिसका मालिकों ने गलत फायदा उठाया। यह प्रॉपर्टी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और उनके भाइयों के नाम पर दर्ज है।

मौत का जाल बनी बिल्डिंग की बनावट

इस तीन मंजिला इमारत में अंदर जाने और बाहर आने का सिर्फ एक ही रास्ता था। दोपहर के वक्त जब आग लगी, तो वह इकलौता रास्ता लपटों और काले धुएं से घिर गया। बिल्डिंग के अंदर एक पेट शॉप और वेटरनरी क्लिनिक था। वही दूसरी मंजिल पर ‘लर्निंग स्पेस’ नाम का कोचिंग सेंटर और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ नाम का एनिमेशन स्टूडियो चल रहा था।

जब पूरी बिल्डिंग में दमघोंटू धुआं भर गया, तो छात्रों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। कुछ छात्र जान बचाने के लिए बाथरूम में छिप गए, तो कुछ ने खिड़की से छलांग लगा दी। 25 साल के आदित्य श्रीवास्तव ने अपने दोस्त धीरज को फोन कर आखरी बार कहा ‘बचा लो!’ लेकिन जब तक मदद पहुंचती, सब कुछ खत्म हो चुका था।

स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीम का संघर्ष

हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े। लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़े ताकि धुआं बाहर निकल सके। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने मोर्चा संभाला। कुल 19 दमकल गाड़ियों को काम पर लगाया गया।

दीवार तोड़कर बनाया रास्ता

जब मुख्य रास्ते से अंदर जाना मुमकिन नहीं हुआ, तो रेस्क्यू टीम ने हाइड्रोलिक कटर और ड्रिलिंग मशीनों से बगल की बिल्डिंग की दीवार तोड़ी। इसके बाद अंदर से एक-एक कर शवों को निकालना शुरू किया गया। मौके से गुजर रहे सेना के लांस नायक छाबी राम ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में अपनी जान पर खेलकर मदद की।

मुख्यमंत्री की बड़ी कार्रवाई

हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर तुरंत लखनऊ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल और केजीएमयू (KGMU) अस्पताल का दौरा किया। सीएम के निर्देश पर 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

पुलिस ने लखनऊ के अलीगंज थाने में मकान मालिकों सहित 6 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

अस्पताल और मोर्चरी के बाहर पसरा मातम

केजीएमयू की वाइस चांसलर प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने पुष्टि की है कि अस्पताल में 15 शव लाए गए हैं। कई घायल छात्र अभी भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर अपनों की तस्वीरें हाथ में लिए परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित माताओं का रोते हुए बस एक ही सवाल है- ‘क्या इन गिरफ्तारियों और सस्पेंशन से हमारे बच्चे वापस आ जाएंगे?’

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