Delhi Summer Vacation: दिल्ली में भीषण गर्मी पड़ रही है और मई का महीना शुरू होते ही बच्चों को गर्मी की छुट्टियों का इंतजार भी बढ़ गया है। हर साल की तरह इस बार भी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों का ऐलान कर दिया गया है। शिक्षा निदेशालय के अनुसार, राजधानी के सभी सरकारी स्कूलों में 11 मई से 30 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। हालांकि, नौवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए इस दौरान विशेष रिमेडियल और एक्स्ट्रा क्लासेज भी आयोजित की जाएंगी।
11 मई से शुरू होंगी रिमेडियल क्लासेज
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, कक्षा 9वीं, 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए 11 मई से 23 मई तक रिमेडियल क्लासेज चलाई जाएंगी। इन कक्षाओं का उद्देश्य छात्रों की पढ़ाई में कमजोर विषयों को मजबूत करना और उनके सीखने के स्तर में सुधार करना है।
ये कक्षाएं रोज सुबह 7:30 बजे से 10:30 बजे तक आयोजित होंगी। वहीं शिक्षकों को सुबह 7:20 बजे से 11 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक दिन तीन पीरियड होंगे और हर पीरियड की अवधि एक घंटे की होगी।
विज्ञान और गणित पर रहेगा खास फोकस
सर्कुलर के अनुसार, कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए विज्ञान और गणित विषय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हालांकि, जरूरत के अनुसार स्कूल प्रमुख अन्य विषयों की कक्षाएं भी संचालित कर सकते हैं। वहीं 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए विषयों का चयन उनकी शैक्षणिक जरूरतों के आधार पर किया जाएगा। दो शिफ्ट वाले स्कूलों में इन कक्षाओं का संचालन अलग-अलग विंग में किया जाएगा ताकि पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके।
रिमेडियल क्लास में शामिल होने वाले छात्रों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य होगा। साथ ही अभिभावकों की सहमति भी जरूरी होगी। छात्रों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।
शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूल प्रमुखों को छुट्टियों से पहले टाइम-टेबल तैयार कर संबंधित उप शिक्षा निदेशक को भेजने के निर्देश दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों को भी इसकी जानकारी देने को कहा गया है।
स्कूलों को दिए गए विशेष निर्देश
भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों में साफ पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा, छात्रों के स्व-अध्ययन के लिए स्कूल लाइब्रेरी भी खुली रहेंगी।
जरूरत पड़ने पर अतिथि और संविदा शिक्षकों की मदद भी ली जाएगी। वहीं उप शिक्षा निदेशकों को पूरे कार्यक्रम की निगरानी करने और रोज कम से कम दो स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
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